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रुपये न होने पर गर्भवती महिला को निजी अस्पताल ने बैरंग लौटाया

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2020 07:50 PM IST
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Private hospital returned the pregnant woman due to lack of fund
नवजात शिशु के साथ चंपावत की शहनाज। - फोटो : AMAR UJALA
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। मंगलवार को एक गर्भवती महिला को जिला अस्पताल में इलाज के लिए भटकना पड़ा। मगर उसे न सरकारी अस्पताल में इलाज मिल सका और नहीं किसी दूसरे अस्पताल में। कोविड-19 के संक्रमित लोगों को रखे जाने के बाद जिला अस्पताल के बजाय मंगलवार को जिस निजी अस्पताल में सरकारी अस्पताल चलना था, वहां महिला से रकम की मांग की गई। धन नहीं होने पर गर्भवती महिला को भर्ती नहीं किया जा सका। बाद में महिला ने आशा कार्यकर्ता की मदद से घर में ही शिशु को जन्म दिया। जच्चा, बच्चा की हालत सामान्य है।
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चंपावत के खटकना पुल के पास रहने वाली शहनाज (27) पत्नी अजीम गर्भवती थी। मंगलवार सुबह करीब पांच बजे उसे एकाएक तेज दर्द हुआ, तो गर्भवती को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में महिला को यह कहने से लेने से इंकार कर दिया गया कि अस्पताल परिसर में कोविड-19 के संक्रमित लोग रखे गए हैं। बाद में यह बताया गया कि मंगलवार को जिला अस्पताल का काम निजी (जीवन अनमोल) अस्पताल से संचालित होगा। अजीम ने अपनी पत्नी को सुबह पौने सात बजे किसी तरह निजी अस्पताल पहुंचाया, मगर वहां उसे प्रसव कराने के लिए 20 हजार रुपये जमा कराने को कहा गया।
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आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उसकी मिन्नतों को नहीं माना। रुपये नहीं होने से गर्भवती को अस्पताल से वापस लाना पड़ा। अस्पताल से मायूस लौटी महिला का आशा और एक अन्य की मदद से घर पर ही प्रसव करा दिया गया।
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इधर, जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के मद्देनजर जिला अस्पताल को दूसरी जगह शिफ्ट करने का देर रात ही निर्णय हुआ था। हो सकता है कि इस कारण ये गलतफहमी पैदा हुई हो।
-:: "गर्भवती महिला को अस्पताल में सुबह पौने सात बजे लाया गया था। उस वक्त तक जिला अस्पताल का कोई भी स्टाफ  नहीं पहुंचा था। वैसे भी जिला अस्पताल की ओपीडी 8 बजे से शुरू होनी थी। निजी अस्पताल ने महिला के इलाज पर होने वाला खर्च बताया।  दीपक जोशी,  प्रबंधक, जीवन अनमोल अस्पताल।  --::प्रभारी मंत्री ने दिए जांच के आदेश ::: चंपावत। मंगलवार को जिले के संक्षिप्त दौरे पर आए प्रदेश के कैबिनेट व जिले के प्रभारी मंत्री अरविंद पांडेय ने मामले के संज्ञान में आने पर इसे गंभीर बताया। गर्भवती महिला को वक्त पर इलाज न मिलना और रकम की मांग को सरकारी सिस्टम की नाकामी बताते हुए अधिकारियों को फटकार भी लगाई। मंत्री ने डीएम और सीएमओ से पूरे मामले की जांच के आदेश दिए।
--::: लॉकडाउन के बाद से ठंडा है अजीम का फेरी का काम :: चंपावत। खटकना में रहने वाला अजीम फेरी कर गुजरबसर करता है, लेकिन कोरोना वायरस की महामारी के चलते 22 मार्च से लॉकडाउन ने उसका रोजगार ठंडा कर दिया। अजीम बताता है कि 22 मार्च से उसका काम चौपट है। इस वजह से उसका रोजमर्रा का खर्चा भी नहीं चल पा रहा है। ऐसे में वह इलाज के लिए रुपये कहां से लाता? उसे सरकारी अस्पताल का ही आसरा था, मगर वहां से भी निराशा मिली।
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