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दो बच्चों के लिए प्राइमरी स्कूल

Sun, 24 Apr 2016 11:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। Updated Sun, 24 Apr 2016 11:58 PM IST
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primary school For Two children
दो बच्चों के लिए प्राइमरी स्कूल - फोटो : अमर उजाला

चंपावत। यह राजकीय प्राथमिक विद्यालय न तो एजूकेशन का कोई मॉडल है और न ही इस पर स्कूल चलो अभियान का कोई असर है, मगर यहां पढ़ने वाले प्रति छात्र खर्चा किसी नामी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं है। चंपावत ब्लॉक में गजार गांव के प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले दो छात्रों पर हर महीने सरकार 50 हजार रुपये से अधिक खर्च कर रही है।

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इस रकम में निशुल्क पुस्तकें, यूनिफार्म, एमडीएम आदि शामिल नहीं है। इसके बावजूद सात साल में यहां छात्र संख्या करीब 90 प्रतिशत कम हो गई है। तीन साल से कोई नया दाखिला नहीं हुआ। गांव में छोटे बच्चे न होने से दो साल में इस स्कूल का बंद होना तय है।
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गांव के लोगों ने स्कूल की मांग की थी। जिस कारण धुरा ग्राम पंचायत के गजार तोक के ईजीएस को 2009 में अपग्रेड कर राजकीय प्राथमिक स्कूल बनाया गया। शुरुआत में वहां 18 छात्र थे, लेकिन अब सात वर्षों में ये संख्या मात्र दो रह गई है। दोनों चौथी कक्षा में पढ़ते हैं। इन दो नौनिहालों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षा मित्र सहित दो गुरुजी है।
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प्रधानाध्यापक हरीश पाठक का कहना है कि स्कूल में सिर्फ चौथी कक्षा चल रही है। इसमें मुकेश और कविता दो बच्चे पढ़ रहे हैं। बच्चों की कम संख्या से उनमें सामूहिकता का विकास नहीं हो पा रहा है। मूलभूत सुविधाओं की कमी के साथ ही यहां भूस्खलन का भी खतरा है।

धुरा की ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी और सरपंच स्वरूप राम का कहना है कि गजार गांव से लोग लगातार पलायन कर रहे हैं। भूस्खलन आपदा है, तो तमाम बुनियादी समस्याओं की कमी अलग तरह की चुनौती बन रही है। कई बार इन समस्याओं को उठाया भी गया लेकिन कोई हल नहीं निकला। इस गांव में 13 परिवार से भी कम रह गए हैं। बच्चों के भविष्य के चलते ज्यादातर लोग यहां से मजबूर हो गांव छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।

चंपावत जिले में बीते छह वर्षों में 12 राजकीय प्राथमिक विद्यालयों पर ताला लटक गया है। दो साल बाद गजार स्कूल के भी बंद होने का अंदेशा है। शिक्षा विभाग के मुताबिक खुनाड़ी, कोट जमराड़ी, सेलागाढ़, दियूली, खुरपाली, कोटला, झिरकुनी, भनार, पुरोला, गहतोड़ा, मध्यावली, हल्दुवा प्राथमिक स्कूल बंद हो चुके हैं।


 चंपावत के मुख्य शिक्षाधिकारी नवीन चंद्र पाठक बताते हैं कि पलायन की वजह से गजार गांव में छह साल से 14 वर्ष की उम्र के दो से अधिक बच्चे नहीं हैं। बाल गणना में भी ये तस्वीर सामने आई है। 40 की आबादी वाले इस गांव में सिर्फ दो छोटे बच्चे हैं, लेकिन इनकी उम्र भी तीन साल से कम है।

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