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थपलियालखेड़ा गांव के लोग बारिश से परेशानी से झेेल रहे
अमर उजाला ब्यूरो, टनकपुर (चंपावत)।
Updated Fri, 04 Aug 2017 10:31 PM IST
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टनकपुर बैराज पार एसएसबी कैंप के पास जलभराव से गुजरते थपलियालखेड़ा के ग्रामीण।
- फोटो : amar ujala
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बरसात का मौसम तीन छोर से नेपाल से घिरे सीमांत थपलियाखेड़ा गांव के ग्रामीणों के लिए आफत लेकर आता है। बाजार आने के लिए ग्रामीणों को रास्ते पर कीचड़ व जल भराव से जूझना पड़ता है। इस दौरान उन्हें उफनाए बरसाती नालों को भी पार करना पड़ता है। इन दिनों बैराज पार एसएसबी कैंप के पास थपलियालखेड़ा जाने वाले मार्ग पर भारी जल भराव से ग्रामीणों को आवाजाही में खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
शहर से करीब छह किमी. दूर पूर्वी दिशा में नेपाल सीमा पर बसे थपलियालखेड़ा गांव के लोगों को सरकार ने वोट देने का अधिकार तो दिया है, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए है। इस क्षेत्र के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। आरक्षित वन क्षेत्र होने के कारण गांव तक जाने के लिए सड़क तक नहीं है। ग्रामीण जंगल की पगडंडियों से आवाजाही करने को विवश हैं। रास्ते में पड़ने वाले बरसाती नालों के उफान पर पर होने से उन्होंने काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
इन दिनों जंगल की पगडंडियों में कीचड़ के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव के शिक्षक गोविंद सिंह का कहना है कि गांव के लोग सीमा पर प्रहरी की तरह बसे हैं, लेकिन सरकार परेशानी झेल रहे गांव के लोगों की सुध नहीं ले रही है। उन्होंने बताया कि शासन-प्रशासन के नुमाइंदों के समक्ष कई बार समस्याएं रखी गई। लेकिन आज तक इनका निस्तारण नहीं किया जा सका है।
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शहर से करीब छह किमी. दूर पूर्वी दिशा में नेपाल सीमा पर बसे थपलियालखेड़ा गांव के लोगों को सरकार ने वोट देने का अधिकार तो दिया है, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए है। इस क्षेत्र के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। आरक्षित वन क्षेत्र होने के कारण गांव तक जाने के लिए सड़क तक नहीं है। ग्रामीण जंगल की पगडंडियों से आवाजाही करने को विवश हैं। रास्ते में पड़ने वाले बरसाती नालों के उफान पर पर होने से उन्होंने काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
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इन दिनों जंगल की पगडंडियों में कीचड़ के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव के शिक्षक गोविंद सिंह का कहना है कि गांव के लोग सीमा पर प्रहरी की तरह बसे हैं, लेकिन सरकार परेशानी झेल रहे गांव के लोगों की सुध नहीं ले रही है। उन्होंने बताया कि शासन-प्रशासन के नुमाइंदों के समक्ष कई बार समस्याएं रखी गई। लेकिन आज तक इनका निस्तारण नहीं किया जा सका है।
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