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त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव में पहली बार:निर्विरोध निर्वाचित प्रत्याशियों को भी देना होगा चुनावी खर्च का ब्यौरा
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अक्तूबर में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव में निर्विरोध चुने जाने वाले उम्मीदवारों को भी अब चुनावी खर्च का हिसाब देना होगा। 2014 के चुनाव में निर्विरोध विजयी प्रत्याशियों पर ये प्रावधान लागू नहीं होता था।
राज्य निर्वाचन आयोग ने इस साल सितंबर में ये आदेश जारी किए थे जिसमें खर्च का ब्योरा जमा नहीं कराने वाले निर्विरोध प्रत्याशियों के खिलाफ भी छह वर्ष तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। इससे पूर्व तक खर्च का ब्योरा सिर्फ मतदान से चुनाव जीते प्रत्याशी और अन्य दावेदारों को देना होता था।
2014 के चुनावों में चंपावत जिले में त्रिस्तरीय पंचायती चुनावों में कुल 1316 उम्मीदवार निर्विरोध चुनाव जीते थे और इन प्रत्याशियों ने चुनावी खर्च का हिसाब-किताब नहीं दिया। तब निर्विरोध रूप से विजयी होने वाले उम्मीदवारों के संबंध में स्पष्ट प्रावधान नहीं थे लेकिन अब उन्हें भी खर्च का ब्योरा अनिवार्य रूप से देना होगा।
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सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी संजीव रावत ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग ने पिछले साल 13 अप्रैल को इस संबंध में आदेश जारी किया है जिसके तहत निर्विरोध निर्वाचित त्रिस्तरीय पंचायती प्रतिनिधियों को भी मतदान के जरिए विजयी होने वाले उम्मीदवारों की तरह ही नतीजों के 30 दिन के भीतर खर्च का ब्योरा अनिवार्य रूप से जमा कराना होगा।
ऐसा नहीं होने पर निर्विरोध निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी चुनाव लड़कर प्रतिनिधि बने प्रत्याशियों की तरह अनर्ह (अयोग्य) घोषित करने की कार्रवाई की जाएगी।
2014 के त्रिस्तरीय पंचायती चुनावों में चंपावत जिले के निर्विरोध चुने गए प्रत्याशी:
ग्राम पंचायत सदस्य:1285
ग्राम प्रधान:21
क्षेत्र पंचायत सदस्य:10
2019 के चुनाव में ये है खर्च की अधिकतम सीमा:
1.जिला पंचायत सदस्य: 1 लाख 40 हजार रुपये।
2.क्षेत्र पंचायत सदस्य व ग्राम प्रधान: 50 हजार रुपये।
3.ग्राम पंचायत सदस्य:10 हजार रुपये।
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राज्य निर्वाचन आयोग ने इस साल सितंबर में ये आदेश जारी किए थे जिसमें खर्च का ब्योरा जमा नहीं कराने वाले निर्विरोध प्रत्याशियों के खिलाफ भी छह वर्ष तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। इससे पूर्व तक खर्च का ब्योरा सिर्फ मतदान से चुनाव जीते प्रत्याशी और अन्य दावेदारों को देना होता था।
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2014 के चुनावों में चंपावत जिले में त्रिस्तरीय पंचायती चुनावों में कुल 1316 उम्मीदवार निर्विरोध चुनाव जीते थे और इन प्रत्याशियों ने चुनावी खर्च का हिसाब-किताब नहीं दिया। तब निर्विरोध रूप से विजयी होने वाले उम्मीदवारों के संबंध में स्पष्ट प्रावधान नहीं थे लेकिन अब उन्हें भी खर्च का ब्योरा अनिवार्य रूप से देना होगा।
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सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी संजीव रावत ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग ने पिछले साल 13 अप्रैल को इस संबंध में आदेश जारी किया है जिसके तहत निर्विरोध निर्वाचित त्रिस्तरीय पंचायती प्रतिनिधियों को भी मतदान के जरिए विजयी होने वाले उम्मीदवारों की तरह ही नतीजों के 30 दिन के भीतर खर्च का ब्योरा अनिवार्य रूप से जमा कराना होगा।
ऐसा नहीं होने पर निर्विरोध निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी चुनाव लड़कर प्रतिनिधि बने प्रत्याशियों की तरह अनर्ह (अयोग्य) घोषित करने की कार्रवाई की जाएगी।
2014 के त्रिस्तरीय पंचायती चुनावों में चंपावत जिले के निर्विरोध चुने गए प्रत्याशी:
ग्राम पंचायत सदस्य:1285
ग्राम प्रधान:21
क्षेत्र पंचायत सदस्य:10
2019 के चुनाव में ये है खर्च की अधिकतम सीमा:
1.जिला पंचायत सदस्य: 1 लाख 40 हजार रुपये।
2.क्षेत्र पंचायत सदस्य व ग्राम प्रधान: 50 हजार रुपये।
3.ग्राम पंचायत सदस्य:10 हजार रुपये।