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संतरा और माल्टा के पौधों में लगा रोग
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
Updated Thu, 12 Nov 2015 10:06 PM IST
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खीड़ीकोट, बाईलाखेत, सनकाफल, धूरा, खीड़ी, बायल, बनसों समेत कई गांवों में संतरा और माल्टा के पौधों में रोग लग गया है, जिससे लाखों रुपये मूल्य की फलों की खेती बर्बाद हो गई है। इन गांवों के लोग प्रतिवर्ष 20 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये के संतरा और माल्टा बेचकर अपनी आजीविका चलाते आ रहे थे।
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इस वर्ष पेड़ों की पत्तियां पीली पड़ने के साथ ऊपर से पेड़ सूखना शुरू हो गया है, जिससे दाने का आकार भी बहुत छोटा और सूखे हुए स्थानों में फलों की पैदावार न होने से फलोत्पादक काफी परेशान हैं। फलोत्पादक रघुवर दत्त कलौनी, डूंगर गिरि, पूरन गिरि, राम गिरि, हरीश पांडेय, एमसी कलौनी, शेर सिंह, हयात गिरि, दीवान सिंह, बहादुर सिंह, गोपाल राम, मोहन गिरि, नाथू राम, लछी राम आदि ने बताया कि इस वर्ष फलोत्पादकों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। किसानों ने उद्यान विभाग से तत्काल रोग की रोकथाम करने की मांग की है।
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बायट्राक्स का छिड़काव करें किसान : डीएचओ
डीएचओ डा.एचसी तिवारी ने कहा कि यह स्थानीय भाषा में उड़का रोग है, जिसमें पहले पत्तियां पीली होती हैं, उसके बाद ऊपर से पेड़ सूखने लगता है। इस रोग में फलों का आकार बहुत छोटा और पकने से पहले वह गिरने लगते हैं। इस रोग की रोकथाम के लिए फलोत्पादकों को बायट्राक्स का छिड़काव करने के साथ सूखे हुए स्थान से एक इंच नीचे से टहनी काटकर अलग कर देनी चाहिए। ऐसे प्रभावित पौधों को एनपीके और गोबर की खाद की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह उद्यान निदेशक से संपर्क कर किसानों को मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे।
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