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अफसर एक, दायित्व चार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Tue, 25 Apr 2017 10:16 PM IST
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हरगोविंद भट्ट, प्रभारी सीडीओ।
- फोटो : अमर उजाला
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विकास भवन किसी भी जिले के विकास की धुरी होती है, लेकिन चंपावत जिले में विकास भवन के हाल बुरे हैं। यहां ज्यादातर अधिकारियों की कुर्सी रिक्त है। विभागीय मुखिया का पद भी खाली है। आलम यह है कि परियोजना निदेशक के पास मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) समेत चार पदों की जिम्मेदारियां हैं। स्थिति यह है कि जब उन्हें विभागीय बैठकों के चलते जिला मुख्यालय से बाहर जाना पड़ता है तो चार्ज देने के लिए भी अधिकारी नहीं है।
जिले के विकास विभाग को विकास से जुड़े कई दायित्व निभाने होते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र विकास योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, आवास, सांसद आदर्श ग्राम, आजीविका, सांसद विकास निधि, विधायक विकास निधि सहित विभिन्न विकास योजनाओं की मॉनीटरिंग से लेकर सुपरविजन तक की जिम्मेदारी उसकी है, मगर इन दायित्वों को निभाने के लिए उसके पास अधिकारियों का जबर्दस्त टोटा है। विकास विभाग के शीर्ष अधिकारी सीडीओ की कुर्सी लंबे समय से रिक्त है।
इसके अलावा जिला विकास अधिकारी और अपर परियोजना निदेशक के पदों पर भी कोई अधिकारी नहीं है। ले-देकर महज एक परियोजना निदेशक (पीडी) हरगोविंद भट्ट की कुर्सी पर तैनाती है। और इस वक्त पीडी के पास ही सीडीओ से लेकर विकास विभाग के सभी चारों पदों का जिम्मा है।
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पीडी भट्ट का कहना है कि अफसरों की कमी के चलते देहरादून, पौड़ी या अन्यत्र विभागीय बैठकों में जाने पर चार्ज देने की भी दिक्कत आती है। ऐसे में जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी को प्रभार दिया जाता है।
विकास विभाग के रिक्त पदों की स्थिति नियमित रूप से ग्राम्य विकास निदेशालय को भेजी जा रही है। अधिकारियों की कमी से काम का बोझ बढ़ा है। इसके बावजूद सभी कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है।
-हरगोविंद भट्ट, प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी, चंपावत।
जिले के विकास विभाग को विकास से जुड़े कई दायित्व निभाने होते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र विकास योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, आवास, सांसद आदर्श ग्राम, आजीविका, सांसद विकास निधि, विधायक विकास निधि सहित विभिन्न विकास योजनाओं की मॉनीटरिंग से लेकर सुपरविजन तक की जिम्मेदारी उसकी है, मगर इन दायित्वों को निभाने के लिए उसके पास अधिकारियों का जबर्दस्त टोटा है। विकास विभाग के शीर्ष अधिकारी सीडीओ की कुर्सी लंबे समय से रिक्त है।
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इसके अलावा जिला विकास अधिकारी और अपर परियोजना निदेशक के पदों पर भी कोई अधिकारी नहीं है। ले-देकर महज एक परियोजना निदेशक (पीडी) हरगोविंद भट्ट की कुर्सी पर तैनाती है। और इस वक्त पीडी के पास ही सीडीओ से लेकर विकास विभाग के सभी चारों पदों का जिम्मा है।
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पीडी भट्ट का कहना है कि अफसरों की कमी के चलते देहरादून, पौड़ी या अन्यत्र विभागीय बैठकों में जाने पर चार्ज देने की भी दिक्कत आती है। ऐसे में जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी को प्रभार दिया जाता है।
विकास विभाग के रिक्त पदों की स्थिति नियमित रूप से ग्राम्य विकास निदेशालय को भेजी जा रही है। अधिकारियों की कमी से काम का बोझ बढ़ा है। इसके बावजूद सभी कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है।
-हरगोविंद भट्ट, प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी, चंपावत।