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यहां अप्रैल से नहीं मिला वृद्धों को पोषाहार
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Thu, 02 Nov 2017 10:53 PM IST
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शक्तिपुर बुंगा आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को सीखाती कार्यकर्ता।
- फोटो : अमर उजाला
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जिला मुख्यालय से सात किलोमीटर दूर शक्तिपुर बुंगा आंगनबाड़ी केंद्र है। यहां नन्हें बच्चों को तो जरूरी खाद्य सामग्री दी जाती है, लेकिन 14 गरीब बुजुर्ग महिलाओं को इस साल अप्रैल महीने से वृद्ध पोषाहार नहीं मिला है। जबकि इन गरीब महिलाओं के लिए 150 रुपये मूल्य का यह पोषाहार काफी उपयोगी रहता है।
आंगनबाड़ी केंद्र में एक बीपीएल वर्ग की बुजुर्ग महिला को डेढ़ किलो सूजी, आधा किलो दाल व छुआरे मिलते हैं, लेकिन इस साल अप्रैल से यह नहीं मिल पा रहा है। बुजुर्ग बसंती देवी, तुलसी देवी, हीरा देवी, माधवी देवी आदि महिलाओं का कहना है कि वृद्ध पोषण के लिए मिलने वाले इस राशन बड़ा सहारा मिलता था। लेकिन पिछले सात महीनों से इसके न मिलने से बेहद दिक्कतें हो रही है। बसंती अपनी बेटी के घर में रहकर अपनी बची जिंदगी के आखिरी वक्त को काट रही है। बसंती देवी का कहना है कि शासन को शीघ्र पोषाहार वितरित करना चाहिए।
माधवी का कहना है कि यहां से मिलने वाली दाल दस दिन चल जाती थी। तुलसी देवी बताती हैं आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाले पोषाहार काफी मदद मिलती है। हीरा देवी कहती है कि सरकार ने अच्छी योजना चलाई थी। योजना के अंतर्गत अब राशन क्यों नहीं मिल रहा इस सवाल का जबाब कोई नहीं दे पा रहा है। इनका कहना है कि वैसे 2015 में भी इन बुजुर्गों को मात्र पांच महीने और 2016 में भी सिर्फ तीन महीने का ही पोषाहार मिला।
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केंद्र से दूर हुआ शिशु कुपोषण
वर्षों तक लटौली में किराये में चलने वाला शक्तिपुर बुंगा आंगनबाड़ी केंद्र अब शक्तिपुर बुंगा में अपने मकान में है। इस केंद्र के खुलने के कुछ समय बाद से यहां बच्चों में कुपोषण की समस्या खत्म हो गई। केंद्र की कार्यकर्ता दीपा पांडेय बताती है कि 2015 में यहां एक बालिका कुपोषित थी। जिसे विशेष खुराक देकर कुपोषण से उबारा गया।
आंगनबाड़ी केंद्र में तीन वर्ष तक के बच्चों को टेक होम राशन दिया जाता है। जबकि तीन से 6 वर्ष वाले 6 बच्चों को तैयार भोजन दिया जाता है। अमर उजाला की पड़ताल में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दीपा पांडेय व सहायिका जीवंती जिम्मेदारी के साथ इन नन्हें बच्चों को खेल-खेल में अक्षर ज्ञान करा रही थी। कहानी सुनाकर भी इन नन्हें बच्चों को सिखाया जाता है।
वर्ष 3 वर्ष तक के शिशु 3 से 6 वर्ष तक के शिशु
2015 21 13
2016 28 09
2017 24 06
कोट
वृद्ध पोषण का बजट मौजूदा वित्त वर्ष में नहीं मिला है। इसके चलते किसी भी केंद्र के पंजीकृत वृद्धों को पोषाहार नहीं मिल पा रहा है। बजट आने के बाद ही ये व्यवस्था सुचारु हो सकेगी।
कामिनी गुप्ता, जिला कार्यक्रम अधिकारी,चंपावत।
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आंगनबाड़ी केंद्र में एक बीपीएल वर्ग की बुजुर्ग महिला को डेढ़ किलो सूजी, आधा किलो दाल व छुआरे मिलते हैं, लेकिन इस साल अप्रैल से यह नहीं मिल पा रहा है। बुजुर्ग बसंती देवी, तुलसी देवी, हीरा देवी, माधवी देवी आदि महिलाओं का कहना है कि वृद्ध पोषण के लिए मिलने वाले इस राशन बड़ा सहारा मिलता था। लेकिन पिछले सात महीनों से इसके न मिलने से बेहद दिक्कतें हो रही है। बसंती अपनी बेटी के घर में रहकर अपनी बची जिंदगी के आखिरी वक्त को काट रही है। बसंती देवी का कहना है कि शासन को शीघ्र पोषाहार वितरित करना चाहिए।
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माधवी का कहना है कि यहां से मिलने वाली दाल दस दिन चल जाती थी। तुलसी देवी बताती हैं आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाले पोषाहार काफी मदद मिलती है। हीरा देवी कहती है कि सरकार ने अच्छी योजना चलाई थी। योजना के अंतर्गत अब राशन क्यों नहीं मिल रहा इस सवाल का जबाब कोई नहीं दे पा रहा है। इनका कहना है कि वैसे 2015 में भी इन बुजुर्गों को मात्र पांच महीने और 2016 में भी सिर्फ तीन महीने का ही पोषाहार मिला।
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केंद्र से दूर हुआ शिशु कुपोषण
वर्षों तक लटौली में किराये में चलने वाला शक्तिपुर बुंगा आंगनबाड़ी केंद्र अब शक्तिपुर बुंगा में अपने मकान में है। इस केंद्र के खुलने के कुछ समय बाद से यहां बच्चों में कुपोषण की समस्या खत्म हो गई। केंद्र की कार्यकर्ता दीपा पांडेय बताती है कि 2015 में यहां एक बालिका कुपोषित थी। जिसे विशेष खुराक देकर कुपोषण से उबारा गया।
आंगनबाड़ी केंद्र में तीन वर्ष तक के बच्चों को टेक होम राशन दिया जाता है। जबकि तीन से 6 वर्ष वाले 6 बच्चों को तैयार भोजन दिया जाता है। अमर उजाला की पड़ताल में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दीपा पांडेय व सहायिका जीवंती जिम्मेदारी के साथ इन नन्हें बच्चों को खेल-खेल में अक्षर ज्ञान करा रही थी। कहानी सुनाकर भी इन नन्हें बच्चों को सिखाया जाता है।
वर्ष 3 वर्ष तक के शिशु 3 से 6 वर्ष तक के शिशु
2015 21 13
2016 28 09
2017 24 06
कोट
वृद्ध पोषण का बजट मौजूदा वित्त वर्ष में नहीं मिला है। इसके चलते किसी भी केंद्र के पंजीकृत वृद्धों को पोषाहार नहीं मिल पा रहा है। बजट आने के बाद ही ये व्यवस्था सुचारु हो सकेगी।
कामिनी गुप्ता, जिला कार्यक्रम अधिकारी,चंपावत।