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पोषाहार के बावजूद कुपोषणमुक्त नहीं चंपावत जिला

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 06 Oct 2021 11:27 PM IST
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Nutrition in Champawat
किराये में संचालित बजरंगबली वार्ड का आंगनबाड़ी केंद्र। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : CHAMPAWAT
पिथौरागढ़/चंपावत। आंगनबाड़ी केंद्रों का सबसे महत्वपूर्ण काम है शिशुओं का पोषण लेकिन कई प्रयासों के बावजूद शिशुओं का पोषण अब भी सवालों के घेरे में है। आयु के सापेक्ष मानक के अनुरूप वजन और लंबाई न होने के आधार पर पोषण को मापा जाता है। इसी से कुपोषित बच्चों का पता चलता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से मूंगफली, चना, दालों समेत कुपोषित बच्चों को अंडे आदि उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अब महिला एवं बाल विकास विभाग जल्द ही ऊर्जा पौष्टिक आहार वितरण शुरू करेगा।
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पिथौरागढ़ जिले में 13 बच्चे अति कुपोषित और 39 बच्चे कुपोषित हैं। बच्चे कुपोषण का शिकार न हो इसके लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में महिलाओं को पौष्टिक आहार आदि की जानकारी दे रहे हैं। प्रत्येक माह बच्चों का वजन मापा जाता है। जिन बच्चों का वजन कम होता है। उन्हें आरबीएस की टीम को दिखाया जाता है। इसके बाद बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए मेडिकल आदि कार्य कराए जाते हैं। पिथौरागढ़ जिले में 1111 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनके माध्यम से गर्भवती और नवजात बच्चों की देखरेख की जाती है।
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चंपावत जिले में मिनी आंगनबाड़ी सहित कुल 681 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें से चंपावत ब्लॉक में 289, पाटी में 152, लोहाघाट में 148, बाराकोट में 92 केंद्र हैं। छह साल तक के 19 हजार शिशु इन केंद्रों के जरिये पोषण से लेकर लिखना-पढ़ना तक सीखते हैं। पोषण के लिए हर शिशु को 200 रुपये का हर महीने टेक होम राशन (टीएचआर) दिया जाता है।
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पोषाहार की निगरानी के लिए कंप्यूटर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (केस) का उपयोग करने से स्थिति में तो सुधार हुआ है, फिर भी चंपावत जिले में 197 शिशु कुपोषण की गिरफ्त में हैं। इनमं से 176 कुपोषित, 21 अति कुपोषित शिशु हैं। हालांकि वर्ष 2016-17 के सापेक्ष ये संख्या करीब 40 प्रतिशत कम हुई है। सीडीपीओ लक्ष्मी पंत ने बताया कि अति कुपोषित शिशु को पोषाहार के लिए हर माह 100 रुपये अधिक का आहार दिया जाता है। अब कुपोषित और अति कुपोषित शिशु को हर महीने ऊर्जा पौष्टिक आहार दिया जाएगा।
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