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जिला मुख्यालय में फायर स्टेशन तक नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sat, 25 Feb 2017 09:00 PM IST
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जिला मुख्यालय में फायर स्टेशन तक नहीं
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में आग लगने पर 15 किलोमीटर दूर लोहाघाट के फायर स्टेशन से गाड़ी आती है। राज्य बनने के 16 साल से अधिक समय बाद भी चंपावत में अब तक फायर स्टेशन नहीं है। अगर यहां कोई बड़ा अग्निकांड हुआ, तो इससे बचाव को तात्कालिक तौर पर बंदोबस्त नहीं है। आग बुझाने को फायरब्र्रिगेड का अकेला सहारा 15 किमी दूर लोहाघाट से है। जिसे यहां पहुंचने में ही करीब 30 मिनट का समय लगता है।
अग्नि हादसों के समय चंपावत के लोग 15 किमी दूर लोहाघाट फायर स्टेशन पर आश्रित है। जिले में अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने के लिए भले ही सरकारी कार्यालयों और भवनों में हाइड्रेंड हैं। मगर निजी भवनों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, औद्योगिक इकाइयों, धार्मिक स्थलों, बैंकों सहित अन्य स्थानों में अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के उपाय भगवान भरोसे हैं। जिला मुख्यालय के अलावा पाटी और बाराकोट तहसील में भी आग से बचाव का अपना कोई इंतजाम नहीं है। और ये दोनों केंद्र भी लोहाघाट पर आश्रित हैं।
फायर स्टेशन के पास अपना भवन भी नहीं
टनकपुर (चंपावत)। जिला मुख्यालय से 75 किलोमीटर दूर मैदानी हिस्से टनकपुर में फायर स्टेशन पांच साल पूर्व खुला। मगर यहां फायर स्टेशन का अपना भवन नहीं है। फायर सर्विस अधिकारी का कहना है कि फायर स्टेशन के भवन के लिए भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जिस वजह से फायर स्टेशन नहीं बन पा रहा है। फायर कर्मियों के रहने का भी कोई इंतजाम तक नहीं है। यहां फायर कर्मी शारदा नदी के पास करीब डेढ़ दशक पूर्व बने पूर्ति विभाग के एक गोदाम में रात काटने को मजबूर हैं।
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एफएसओ के बगैर लोहाघाट का फायर स्टेशन
जिले के पहाड़ी क्षेत्रों की आगजनी की घटनाओं को काबू करने के लिए सबसे पुराना और अकेला फायर स्टेशन लोहाघाट में है, मगर 13 वर्ष पूर्व स्थापित फायर स्टेशन आधा-अधूरा ही है। फायर स्टेशन थाने के पुराने भवन में चल रहा है। आवास भी यहां पुराने टिनशेड में है। फायर सर्विस अफसर (एफएसओ) का पद लंबे समय से खाली है।
वहीं इस फायर स्टेशन के दो हाइडेंट खराब पड़े हैं। रामलीला मैदान के पास और एसडीएम कार्यालय चौराहे के हाइडेंट में कपलिंग खराब होने से पानी के प्रेशर में कमी आती है। लीडिंग फायरमैन मोहन थापा का कहना है कि प्रेशर बनाने के लिए पानी भरते वक्त दो लोग इसमें मदद करते हैं। इस खामी को दुरुस्त करने के लिए कहा गया है। वहीं 14 नाली 11 मुट्ठी जमीन की फायर स्टेशन के लिए रजिस्ट्री हो चुकी है। लेकिन काम अभी शुरू नहीं हो सका है।
चंपावत के पुलिस अधीक्षक आरसी राजगुरु का कहना है कि लोहाघाट और टनकपुर में आग से बचाव को सभी जरूरी उपकरण है। चंपावत में फायर स्टेशन का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय भेजा गया है। प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई हो सकेगी।
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अग्नि हादसों के समय चंपावत के लोग 15 किमी दूर लोहाघाट फायर स्टेशन पर आश्रित है। जिले में अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने के लिए भले ही सरकारी कार्यालयों और भवनों में हाइड्रेंड हैं। मगर निजी भवनों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, औद्योगिक इकाइयों, धार्मिक स्थलों, बैंकों सहित अन्य स्थानों में अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के उपाय भगवान भरोसे हैं। जिला मुख्यालय के अलावा पाटी और बाराकोट तहसील में भी आग से बचाव का अपना कोई इंतजाम नहीं है। और ये दोनों केंद्र भी लोहाघाट पर आश्रित हैं।
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फायर स्टेशन के पास अपना भवन भी नहीं
टनकपुर (चंपावत)। जिला मुख्यालय से 75 किलोमीटर दूर मैदानी हिस्से टनकपुर में फायर स्टेशन पांच साल पूर्व खुला। मगर यहां फायर स्टेशन का अपना भवन नहीं है। फायर सर्विस अधिकारी का कहना है कि फायर स्टेशन के भवन के लिए भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जिस वजह से फायर स्टेशन नहीं बन पा रहा है। फायर कर्मियों के रहने का भी कोई इंतजाम तक नहीं है। यहां फायर कर्मी शारदा नदी के पास करीब डेढ़ दशक पूर्व बने पूर्ति विभाग के एक गोदाम में रात काटने को मजबूर हैं।
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एफएसओ के बगैर लोहाघाट का फायर स्टेशन
जिले के पहाड़ी क्षेत्रों की आगजनी की घटनाओं को काबू करने के लिए सबसे पुराना और अकेला फायर स्टेशन लोहाघाट में है, मगर 13 वर्ष पूर्व स्थापित फायर स्टेशन आधा-अधूरा ही है। फायर स्टेशन थाने के पुराने भवन में चल रहा है। आवास भी यहां पुराने टिनशेड में है। फायर सर्विस अफसर (एफएसओ) का पद लंबे समय से खाली है।
वहीं इस फायर स्टेशन के दो हाइडेंट खराब पड़े हैं। रामलीला मैदान के पास और एसडीएम कार्यालय चौराहे के हाइडेंट में कपलिंग खराब होने से पानी के प्रेशर में कमी आती है। लीडिंग फायरमैन मोहन थापा का कहना है कि प्रेशर बनाने के लिए पानी भरते वक्त दो लोग इसमें मदद करते हैं। इस खामी को दुरुस्त करने के लिए कहा गया है। वहीं 14 नाली 11 मुट्ठी जमीन की फायर स्टेशन के लिए रजिस्ट्री हो चुकी है। लेकिन काम अभी शुरू नहीं हो सका है।
चंपावत के पुलिस अधीक्षक आरसी राजगुरु का कहना है कि लोहाघाट और टनकपुर में आग से बचाव को सभी जरूरी उपकरण है। चंपावत में फायर स्टेशन का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय भेजा गया है। प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई हो सकेगी।