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कर्मियों को फिर लगा जोर का झटका
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चंपावत। महिला सशक्तीकरण और बाल विकास विभाग में आउटसोर्स से रखे गए 21 कर्मचारी 16 सितंबर से बेरोजगार हो गए हैं। काम तो छूटा ही, उनका नौ माह का मानदेय भी नहीं मिला है। आउटसोर्स एजेंसी बदलने के लिए देहरादून में हो रही निविदा के बाद कर्मियों को काम की उम्मीद थी, लेकिन अब नई एजेंसी तय न होने से कर्मियों को फिर झटका लगा है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, राष्ट्रीय पोषण अभियान, वन स्टॉप सेंटर और महिला शक्ति केंद्र की विभिन्न केंद्र पोषित योजनाओं के संचालन के लिए जिले में पिछले साल सितंबर में एक साल के लिए 21 कर्मियों की तैनाती हुई थी। चंपावत सहित प्रदेश के अन्य जिलों में कर्मियों की नियुक्ति करने वाली एजेंसी बदलकर नई एजेंसी तलाशी गई थी, लेकिन सोमवार को इस नई आउटसोर्स एजेंसी का कार्यादेश भी निरस्त कर दिया गया। इससे हटाए गए कर्मियों के जल्द दोबारा काम पर रखे जाने की संभावना धूमिल हो गई है। इन कर्मियों का कहना है कि उन्हें काम से तो हटाया ही गया है, पांच से नौ माह के वेतन का भुगतान भी नहीं किया गया है।
यद्यपि विभागीय कर्मियों का रोस्टर बनाकर जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन 21 कर्मियों को 16 सितंबर से हटाने से इन योजनाओं के संचालन पर असर पड़ रहा है। कर्मियों को आउटसोर्स पर रखने वाली नई एजेंसी तय होने तक कर्मियों की तैनाती पर संशय बना रहेगा। फिलहाल कर्मियों को पुरानी आउटसोर्स कंपनी से वेतन दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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- पीएस बृजवाल, डीपीओ, चंपावत।
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प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, राष्ट्रीय पोषण अभियान, वन स्टॉप सेंटर और महिला शक्ति केंद्र की विभिन्न केंद्र पोषित योजनाओं के संचालन के लिए जिले में पिछले साल सितंबर में एक साल के लिए 21 कर्मियों की तैनाती हुई थी। चंपावत सहित प्रदेश के अन्य जिलों में कर्मियों की नियुक्ति करने वाली एजेंसी बदलकर नई एजेंसी तलाशी गई थी, लेकिन सोमवार को इस नई आउटसोर्स एजेंसी का कार्यादेश भी निरस्त कर दिया गया। इससे हटाए गए कर्मियों के जल्द दोबारा काम पर रखे जाने की संभावना धूमिल हो गई है। इन कर्मियों का कहना है कि उन्हें काम से तो हटाया ही गया है, पांच से नौ माह के वेतन का भुगतान भी नहीं किया गया है।
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यद्यपि विभागीय कर्मियों का रोस्टर बनाकर जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन 21 कर्मियों को 16 सितंबर से हटाने से इन योजनाओं के संचालन पर असर पड़ रहा है। कर्मियों को आउटसोर्स पर रखने वाली नई एजेंसी तय होने तक कर्मियों की तैनाती पर संशय बना रहेगा। फिलहाल कर्मियों को पुरानी आउटसोर्स कंपनी से वेतन दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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- पीएस बृजवाल, डीपीओ, चंपावत।