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... तो यूपी सेतु निगम नहीं बनाएगा चूका में पुल!
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टनकपुर-जौलजीबी रोड पर चूका में लधिया नदी पर यहां बनना है पुल। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंद्रशेखर जोशी
चंपावत। नेपाल सीमा से लगे निर्माणाधीन टीजे (टनकपुर-जौलजीबी) सड़क पर चूका और रूपालीगाड़ के बीच पुल फिर लटक गया है। इस साल मई में पुल निर्माण का जिम्मा उत्तर प्रदेश सेतु निगम को दे दिया गया था। निविदा राशि 29.51 प्रतिशत अधिक होने के अलावा शासन से हरी झंडी नहीं मिलने से एलओयू (लेटर ऑफ अंडरटेकिंग) के बावजूद निगम से काम वापस लिया जा रहा है।
टीजे रोड के दो पैकेज (18.600 किमी लंबे ठुलीगाड़ से चूका और 24.400 किमी के दूसरे पैकेज चूका-रूपालीगाड़) वाली सड़क के दूसरे पैकेज चूका-रूपालीगाड़ को मिलाने के लिए लधिया नदी पर पुल जरूरी है। ब्रिडकुल (ब्रिज, रोपवे, टनल एंड अदर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड) को जून 2019 तक 29 करोड़ रुपये में पुल तैयार करना था लेकिन विवादों और काम में ढिलाई के चलते शासन ने अनुबंध निरस्त कर दिया। इस साल फिर से हुई निविदा के बाद चूका और रूपालीगाड़ के बीच बनने वाले 690 मीटर लंबा पुल बनाने का जिम्मा उप्र सेतु निगम को दिया गया। निगम को 24 मई को एलओयू भी दे दिया गया।
उप्र सेतु निगम ने निविदा में इस पुल को बनाने के लिए 37.56 करोड़ रुपये की राशि भरी थी। ये रकम 2016 में तय लागत 29 करोड़ रुपये से 29.51 प्रतिशत ज्यादा थी। डीएम विनीत तोमर ने बताया कि अधिक राशि की वजह से शासन की ओर से पड़ताल (क्वेरी) की जा रही है। इसके निस्तारण के बगैर आगे की कार्रवाई मुमकिन नहीं है। अब इसमें नया पेंच आ गया है। सीमा सड़क प्रबंधन की छह अक्तूबर को हुई बैठक में एक सप्ताह में शासन की ओर से फैसला नहीं लिए जाने पर फिर से निविदा प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं और ये समयावधि भी बीत चुकी है। अभी शासन की ओर से इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
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सीमा सड़क प्रबंधन की छह अक्तूबर की बैठक में उच्चस्तर पर एक हफ्ते में निर्णय नहीं होने पर री-टेंडर की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। फिर से निविदा निकाले जाने से पहले उप्र सेतु निगम की निविदा को निरस्त करना जरूरी है।
-ओंकार पांडेय, एई, पीआई, टनकपुर-जौलजीबी रोड।
चूका-रूपालीगाड़ रोड में भी 39 माह तक लटका रहा था काम
चंपावत। 690 मीटर लंबा पुल ही नहीं, 123 करोड़ रुपये से निर्मित होने वाली चूका-रूपालीगाड़ सड़क का काम कम विवाद में नहीं रहा। इस कारण अगस्त 2017 से पूरे 39 महीने तक काम लटका रहा। ऑर्बिटेशन की क्लीन चिट और सरकार की अनुमति के बाद दिसंबर 2020 से काम शुरू हुआ।
नेपाल सीमा पर सुरक्षा चौकसी तेज करने और एसएसबी की बार्डर आउटपोस्ट तक सशक्त आधारभूत ढांचा बनाने के लिए बनाई जा रही टीजे रोड खासी महत्वपूर्ण है। सीमा पर स्थित बीओपी तक पहुंच को सुगम बनाने के साथ सीमा पर चौकसी के लिए आधारभूत ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी।
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चंपावत। नेपाल सीमा से लगे निर्माणाधीन टीजे (टनकपुर-जौलजीबी) सड़क पर चूका और रूपालीगाड़ के बीच पुल फिर लटक गया है। इस साल मई में पुल निर्माण का जिम्मा उत्तर प्रदेश सेतु निगम को दे दिया गया था। निविदा राशि 29.51 प्रतिशत अधिक होने के अलावा शासन से हरी झंडी नहीं मिलने से एलओयू (लेटर ऑफ अंडरटेकिंग) के बावजूद निगम से काम वापस लिया जा रहा है।
टीजे रोड के दो पैकेज (18.600 किमी लंबे ठुलीगाड़ से चूका और 24.400 किमी के दूसरे पैकेज चूका-रूपालीगाड़) वाली सड़क के दूसरे पैकेज चूका-रूपालीगाड़ को मिलाने के लिए लधिया नदी पर पुल जरूरी है। ब्रिडकुल (ब्रिज, रोपवे, टनल एंड अदर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड) को जून 2019 तक 29 करोड़ रुपये में पुल तैयार करना था लेकिन विवादों और काम में ढिलाई के चलते शासन ने अनुबंध निरस्त कर दिया। इस साल फिर से हुई निविदा के बाद चूका और रूपालीगाड़ के बीच बनने वाले 690 मीटर लंबा पुल बनाने का जिम्मा उप्र सेतु निगम को दिया गया। निगम को 24 मई को एलओयू भी दे दिया गया।
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उप्र सेतु निगम ने निविदा में इस पुल को बनाने के लिए 37.56 करोड़ रुपये की राशि भरी थी। ये रकम 2016 में तय लागत 29 करोड़ रुपये से 29.51 प्रतिशत ज्यादा थी। डीएम विनीत तोमर ने बताया कि अधिक राशि की वजह से शासन की ओर से पड़ताल (क्वेरी) की जा रही है। इसके निस्तारण के बगैर आगे की कार्रवाई मुमकिन नहीं है। अब इसमें नया पेंच आ गया है। सीमा सड़क प्रबंधन की छह अक्तूबर को हुई बैठक में एक सप्ताह में शासन की ओर से फैसला नहीं लिए जाने पर फिर से निविदा प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं और ये समयावधि भी बीत चुकी है। अभी शासन की ओर से इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
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सीमा सड़क प्रबंधन की छह अक्तूबर की बैठक में उच्चस्तर पर एक हफ्ते में निर्णय नहीं होने पर री-टेंडर की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। फिर से निविदा निकाले जाने से पहले उप्र सेतु निगम की निविदा को निरस्त करना जरूरी है।
-ओंकार पांडेय, एई, पीआई, टनकपुर-जौलजीबी रोड।
चूका-रूपालीगाड़ रोड में भी 39 माह तक लटका रहा था काम
चंपावत। 690 मीटर लंबा पुल ही नहीं, 123 करोड़ रुपये से निर्मित होने वाली चूका-रूपालीगाड़ सड़क का काम कम विवाद में नहीं रहा। इस कारण अगस्त 2017 से पूरे 39 महीने तक काम लटका रहा। ऑर्बिटेशन की क्लीन चिट और सरकार की अनुमति के बाद दिसंबर 2020 से काम शुरू हुआ।
नेपाल सीमा पर सुरक्षा चौकसी तेज करने और एसएसबी की बार्डर आउटपोस्ट तक सशक्त आधारभूत ढांचा बनाने के लिए बनाई जा रही टीजे रोड खासी महत्वपूर्ण है। सीमा पर स्थित बीओपी तक पहुंच को सुगम बनाने के साथ सीमा पर चौकसी के लिए आधारभूत ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी।