न बेरोजगार घटे और न बेरोजगारी भत्ता मिला

ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत Updated Fri, 13 Jan 2017 11:14 PM IST
Neither lowered nor unemployed received unemployment allowance
बिजनौर विधानसभा सीट का इतिहास - फोटो : SELF
चंपावत। जवान भारत में युवा अपने संख्या बल से सबसे बड़ी ताकत हैं, लेकिन यंग इंडिया में पहाड़ के नवयुवक बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। रोजगार के मौके लगातार सिकुड़ रहे हैं, वहीं बेरोजगारों की फौज में दिन दोगुनी रात चौगुनी वृद्धि हो रही है। 18 से 40 वर्ष तक की संख्या 54152 है, लेकिन इनमें से बेरोजगारों की संख्या 25 हजार पार कर गई है, जबकि इसमें 49 प्रतिशत बेरोजगार महज पांच साल में बढ़ गए।
इस अवधि में दो हजार लोगों को भी सरकारी रोजगार नहीं दिया जा सका।
उत्तराखंड के सबसे छोटे जिले में से एक चंपावत की आबादी भले ही पौने तीन लाख हो, लेकिन यहां बेरोजगारों का ग्राफ लगातार ऊंचा हो रहा है। 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान जिले में 17158 (5283 महिलाएं, 11875 पुरुष) बेरोजगार थे, जो पांच साल बाद यानि प्रदेश के चौथे विधानसभा चुनाव के दौरान 2017 में बढ़कर 25648 हो गए हैं, इसमें 9579 महिलाएं, 16069 पुरुष बेरोजगार हैं।

काम का इंतजार कर रहे नौजवानों का ये आंकड़ा तो सरकारी है। करीब आठ हजार ऐसे लोग भी हैं, जो सेवायोजन कार्यालय में दर्ज ही नहीं हैं। बेरोजगार संगठन का कहना है कि बेरोजगारों को उनकी योग्यता के हिसाब से काम देना तो दूर, सामान्य काम देने में भी सरकार विफल रही हैं, और ये हाल सिर्फ इन पांच वर्षों में नहीं रहा, बल्कि इसके पूर्व के दो चुनाव के दौरान भी बेरोजगारों को मायूसी ही मिली। संगठन का कहना है कि राज्य विधानसभा के पहले चुनाव 2002 में जिले में करीब 5300 बेरोजगार थे, जो करीब 15 साल में पांच गुना बढ़ गए हैं, जबकि इस दौरान दोनों प्रमुख सियासी दल प्रदेश की सत्ता पर काबिज हो चुके हैं।

चंपावत। युवा देश के नौजवानों को नौकरी के लिए ही संघर्ष नहीं करना पड़ रहा है, बल्कि पिछले चुनाव के वक्त किए गए बेरोजगारी भत्ते को पाने के लिए भी जूझना पड़ रहा है। भत्ते का इंतजार करते-करते बेरोजगार परेशान हैं। सेवायोजन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1710 नौजवान बेरोजगारी भत्ते के पात्र हैं। इस संख्या में से 1214 को कुछ माह तक बेरोजगारी भत्ता मिला है।

बाकी 416 लोगों के आवेदन तो स्वीकृत हैं, लेकिन इन्हें एक बार भी भत्ता नहीं मिल सका है। मगर सबसे हैरत की बात यह है कि बेरोजगारों को सितंबर 2014 से भत्ता ही नहीं मिल सका है। सेवायोजन विभाग का कहना है कि 3.18 करोड़ रुपए की मांग की गई है। रकम मिलने के बाद ही बेरोजगारों को भत्ता दिया जा सकेगा। इंटरमीडिएट या समकक्ष को 750, स्नातक या समकक्ष को 1000, पीजी या समकक्ष को 1500 रुपए मासिक भत्ता देने का प्रावधान है।

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