फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Mobile hospitals took on the brakes

मोबाइल अस्पतालों पर भी लग गए ब्रेक

Wed, 31 Aug 2016 09:26 PM IST
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत Updated Wed, 31 Aug 2016 09:26 PM IST
विज्ञापन
Mobile hospitals took on the brakes
मोबाइल अस्पतालों पर भी लग गए ब्रेक - फोटो : अमर उजाला
 पीपीपी अस्पताल से परेशान लोगों ने मंगलवार को लोहाघाट में बंद कर नाराजगी जताई, मगर खराब स्वास्थ्य सेवाओं के हाल दूसरे स्थानों पर भी हैं। जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बीमार हैं। ज्यादातर अस्पताल ही नहीं, यहां के दो सचल चिकित्सालय (चलते-फिरते अस्पताल) वाहन भी बंद हैं। इस वजह से मरीजों की मुसीबत बढ़ रही है।
विज्ञापन


जैन वीडियो ऑन व्हीकल वाहन सेवा पर इस साल अप्रैल से ब्रेक लग गया है, जबकि इसका प्रदेश सरकार से कांट्रेक्ट इस साल सितंबर तक है। 2009 से शुरू जैन वीडियो ऑन व्हीकल वाहन सेवा के जरिए तल्लादेश, गुमदेश, लधिया घाटी, अमोड़ी सहित कई ग्रामीण इलाकों में हर माह निर्धारित तिथि को 15 कैंप लगाए जाते थे। इन कैंपों में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और खून की जांच की जाती थी।
विज्ञापन


तीन डॉक्टर, लैब तकनीशियन, फार्मेसिस्ट, नर्स सहित कुल दस कार्मिक वैन के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों का इलाज करते हैं। साथ ही बीपीएल मरीजों को निशुल्क दवाएं दी जाती थी। इसका मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के डॉक्टर अथवा अस्पतालविहीन इलाकों को लाभ मिल रहा था पर इस साल अप्रैल से यह सेवा भी बंद है।
विज्ञापन
विज्ञापन


श्याम सिंह, शेर सिंह महर, उमेश भट्ट, माधो सिंह, दीपक बोहरा आदि ग्रामीणों का कहना है कि इस सेवा के ठप होने से रोड से लगे अस्पतालविहीन दूरदराज के गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ी है। उन्हें अब लोहाघाट, चंपावत में इलाज के लिए जाना पड़ रहा है। जिला समन्वयक कुलदीप का कहना है कि बजट नहीं मिलने की वजह से वैन काम नहीं कर पा रही है।


31 लाख के मोबाइल वैन से लगे सिर्फ 39 कैंप
सीएचसी परिसर में 69 महीनों से सचल चिकित्सा वाहन बेबस खड़ा है। दिसंबर 2010 से इस वाहन ने एक भी मरीज का इलाज नहीं किया। 2006 में राष्ट्रीय सम विकास योजना से 31.5 लाख रुपये की चलित शल्य चिकित्सालय एवं परीक्षण वाहन (मोबाइल वैन) चंपावत को मिला। दिसंबर 2010 के बाद से एक भी मरीज का इलाज नहीं हुआ है। अस्पताल परिसर के एक कोने में दुबकी इस वैन पर जंक लग चुका है। धन नहीं मिलने से मोबाइल वैन का संचालन ठप है। वैन से हर साल 72 कैंप लगाए जाने थे, मगर मोबाइल अस्पताल से अब तक सिर्फ 39 कैंप ही लग सके हैं।


पांच माह से वेतन भी नहीं मिला
जैन वीडियो ऑन व्हीकल वाहन सेवा तो बंद हुई ही, इसमें सेवा देने वाले कार्मिकों के लिए मुसीबत भी आई है। पांच माह से इन कार्मिकों को वेतन नहीं मिला है। इस सेवा के जिला समन्वयक कुलदीप का कहना है कि अप्रैल में सेवा बंद होने से पूर्व के पांच महीनों का डॉक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारियों का वेतन नहीं दिया गया है।



बजट की कमी की वजह से जैन सचल सेवा नहीं चल रही है। धन मिलने पर इस सेवा को शुरू किया जाएगा। वहीं राष्ट्रीय सम विकास योजना से संचालित मोबाइल वैन को चलाने के लिए तो वर्षों से धन नहीं मिल सका है। साथ ही इसके लिए स्टाफ भी नहीं है। इन कमियों को दूर करने के लिए फिर से पत्र भेजा जाएगा। -डा.डीएल साह, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed