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शासन ने खनिज भंडारण नियम को किया और शिथिल
ब्यूरो/अमर उजाला, टनकपुर
Updated Thu, 11 Feb 2016 10:51 PM IST
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विधायक हेमेश खर्कवाल की पहल और मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन को खनिज भंडारण नीति को और सरल बनाना पड़ा है। भंडारण नियम में हुए इस नए संशोधन से अब निजी स्टाकिस्ट भी खनिज सामग्री का भंडारण कर सकेंगे। शासन ने जिला प्रशासन को शुक्रवार से ही स्टाकिस्टों को पूर्व की भांति खनिज भंडारण के लाइसेंस जारी करने के निर्देश दिए है।
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सरकार की नई खनिज भंडारण नीति में सरकार ने स्टोन क्रशर स्वामियों और निजी खनन पट्टाधारकों को ही खनिज भंडारण की अनुुमति दी थी। खनन कारोबारियों के विरोध पर शासन ने एक माह पूर्व ही भंडारण नीति में थोड़ी शिथिलता बरतते हुए नया नियम जारी किया था, जिसके तहत निजी स्टाकिस्टों को खनिज भंडारण के लिए भंडारण स्थल पर तौल कांटा लगाने, तीन साल का भंडारण शुल्क साठ हजार रुपये करने, हैसियत प्रमाण पत्र की अनिवार्यता और एक हजार घन मीटर तक खनिज स्टाक करने की अनुमति दी थी, परंतु नियम में इस संशोधन का भी खनन कारोबारियों ने विरोध किया।
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बृहस्पतिवार को यहां आए मुख्यमंत्री हरीश रावत के समक्ष विधायक हेमेश खर्कवाल ने खनन कारोबारियों की इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए भंडारण नियम को शिथिल बनाने की मांग की। मुख्यमंत्री ने नियम में नया संशोधन करने की घोषणा जनसभा में मंच से तो नहीं की, लेकिन यहां से खटीमा तक जिद पर अड़े रहे विधायक खर्कवाल के आगे मुख्यमंत्री को नियम में संशोधन का फैसला लेना पड़ा। मुख्यमंत्री के आदेश पर प्रमुख सचिव शत्रुघ्न सिंह ने खनिज भंडारण नियम में संशोधन कर जिला प्रशासन को शुक्रवार से ही निजी स्टाकिस्टों को खनिज भंडारण लाइसेंस जारी करने की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
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एसडीएम नरेश दुर्गापाल ने बताया कि संशोधित नियम के तहत अब खनिज भंडारण शुल्क 60 हजार से घटाकर 25 हजार रुपये के साथ ही शासन ने कांटे और हैसियत की अनिवार्यता भी खत्म कर दी है। इसके अलावा अब निजी स्टाकिस्ट एक हजार की जगह तीन हजार घन मीटर तक खनिज का भंडारण कर सकते हैं।