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एक साथ भोजन से मिट गई दिलों की कड़वाहट

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 27 Dec 2021 11:15 PM IST
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Mid Day Meal in GIC Sukhidhang
सूखीढांग जीआईसी में भोजनमाता नियुक्ति मामले की जांच करते सीईओ आरसी पुरोहित और अन्य अधिकारी। संव - फोटो : CHAMPAWAT
टनकपुर (चंपावत)। भोजनमाता नियुक्ति विवाद के बीच सोमवार को जीआईसी सूखीढांग का माहौल खुशनुमा और रोज की तरह सामान्य था। पहले सवर्ण विद्यार्थियों और फिर शुक्रवार को अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) न खाने से माहौल में कड़ुवाहट थी लेकिन प्रशासन और ग्रामीणों की पहल से शनिवार को विवाद निपटा लिया गया। इस कारण छठी से आठवीं कक्षा तक के 66 छात्र-छात्राओं में से सोमवार को उपस्थित सभी 61 छात्र-छात्राओं ने एक साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में भोजन किया।
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जांच के लिए वहां पहुंची अधिकारियों की टीम ने भी छात्रों के साथ ही खाना खाया। टनकपुर के एसडीएम हिमांशु कफल्टिया ने हालात का जायजा लेने के लिए तहसीलदार पिंकी आर्या को भी स्कूल भेजा। उन्होंने छात्र-छात्राओं की काउंसलिंग भी की। सीईओ आरसी पुरोहित, बीईओ अंशुल बिष्ट, तहसीलदार पिंकी आर्या ने कहा कि छात्र-छात्राओं के साथ भोजन करने से एकजुटता और सकारात्मकता का संदेश देने में मदद मिली। 26 से 100 छात्र होने पर दो भोजनमाता रखने का प्रावधान है। फिलहाल यहां एक ही भोजनमाता विमलेश उप्रेती तैनात हैं। सीईओ ने कहा कि दूसरी भोजनमाता की तैनाती नियमों के मुताबिक की जाएगी।
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तीन सदस्यीय समिति ने पूरी की जांच, दस्तावेज जांचने के साथ बयान भी लिए
टनकपुर (चंपावत)। सूखीढांग जीआईसी में भोजनमाता नियुक्ति प्रकरण की जांच सोमवार को पूरी हो गई। सीईओ आरसी पुरोहित के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति ने कॉलेज पहुंच जांच की। दस्तावेजों की पड़ताल के साथ भोजनमाता, एसएमसी, पीटीए के अलावा स्कूल के संबंधित कर्मी-शिक्षकों के बयान लिए गए। डीएम विनीत तोमर ने तीन सदस्यीय जांच समिति को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे।
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जांच अधिकारी सीईओ आरसी पुरोहित, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी राजेश कुमार और सहायक परियोजना निदेशक विम्मी जोशी की टीम जांच के लिए पहुंची। दो घंटे से अधिक समय तक एमडीएम के दस्तावेजों की जांच के अलावा मामले से संबंधित पक्षों के बयान लिए गए। सीईओ ने बताया कि जांच पूरी कर ली गई है। बुधवार तक डीएम को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। जीआईसी में भोजनमाता की तैनाती के लिए नवंबर और दिसंबर में दो बार विज्ञप्ति निकाली गई। भोजनमाता के लिए दो नामों पुष्पा भट्ट और सुनीता देवी के बीच विवाद की स्थिति बनी रही।

ये है विवाद की वजह
टनकपुर (चंपावत)। सूखीढांग जीआईसी में दूसरी भोजनमाता की नियुक्ति के लिए पहली बैठक 15 नवंबर को हुई। प्रधानाचार्य प्रेम सिंह ने बताया कि बैठक में कुल 11 आवेदन आए लेकिन एक आवेदन विमला देवी का बेटा अंकित भट्ट 11वीं कक्षा का छात्र होने से आवेदन पत्र खारिज हो गया। बचे 10 आवेदनों में पांच अनुसूचित जाति और पांच सवर्ण जाति के थे। पुष्पा भट्ट और सुनीता देवी के नाम में विवाद होने से इस बैठक में अंतिम चयन नहीं हो सका। नियुक्ति के लिए दूसरी बैठक चार दिसंबर को हुई। इसमें चयन समिति ने सुनीता देवी के आवेदन को नियम के अनुरूप पाया लेकिन कुछ लोगों के विरोध के कारण नियुक्ति विवाद फिर भी नहीं थमा। इस बीच कई छात्र-छात्राओं ने एससी भोजनमाता का बनाया खाना नहीं खाया। प्रतिक्रिया स्वरूप 24 दिसंबर को एससी जाति के 23 विद्यार्थियों ने सवर्ण भोजनमाता का बनाया खाना छोड़ दिया।
भोजनमाता की तैनाती के ये हैं निर्देश
भोजनमाता के आवेदक का बच्चा अनिवार्य रूप से स्कूल में पढ़ता हो।
सबसे छोटी कक्षा में पढ़ने वाले छात्र-छात्रा की मां को वरीयता दी जाएगी।
एससी-एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग को वरीयता।
भोजनमाता का बीपीएल होना अनिवार्य है।

सूखीढांग जीआईसी में एमडीएम का भोजन करते छात्र-छात्राएं। संवाद न्यूज एजेंसी

सूखीढांग जीआईसी में एमडीएम का भोजन करते छात्र-छात्राएं। संवाद न्यूज एजेंसी- फोटो : CHAMPAWAT

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