चंपावत। काली कुमाऊं के शेर पंडित हर्षदेव ओली की धरती खेतीखान ने आजादी की जंग में अविस्मरणीय योगदान दिया था। इसी खेतीखान की गोशनी ग्राम पंचायत के जागोली में बनी धर्मशाला स्वतंत्रता संग्राम की खास धरोहर है। यहां अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनती थी। बाद में प्रधानमंत्री बने स्व. लाल बहादुर शास्त्री ने भी इस धर्मशाला में दो रातें गुजारीं थीं।
सेनानी स्व. हर्षदेव ओली के पौत्र राजेश ओली और इतिहासकार देवेंद्र ओली बताते हैं कि सेनानी हर्षदेव के मकान के नजदीक जागोली मंदिर परिसर में बनी यह धर्मशाला गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने का हथियार बनी थी। वर्ष 1934 में लाल बहादुर शास्त्री यहां रुके थे। तब अंग्रेजी हुकूमत से निजात दिलाने के लिए मंत्रणा हुई थी। वर्ष 1920 में बनी जागोली धर्मशाला दूर और वीरान जगह होने की वजह से अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाने का महत्वपूर्ण पड़ाव बनी। दूसरे प्रधानमंत्री रहे शास्त्री के अलावा यूपी के पहले मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत, वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के सिपाही हरगोविंद पंत, मदन मोहन उपाध्याय, पंडित बद्री दत्त पांडेय सहित कई बड़े आंदोलनकारियों ने भी यहीं ठहरकर आजादी की लड़ाई लड़ थी। अब इस धर्मशाला को मूल स्वरूप बचाए रखते हुए संवारे जाने का प्रस्ताव है।