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पांच अस्पताल जाने के बाद भी नहीं बची प्रसूता की जान

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 31 Jul 2022 09:03 PM IST
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Maternity life did not survive even after going to five hospitals
प्रसूता संध्या। (फाइल फोटो) - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। जिला अस्पताल में ऑपरेशन से शिशु के जन्म के बाद से प्रसूता की जिंदगी बचाने के लिए पांच अस्पताल के चक्कर काटे लेकिन फिर भी प्रसूता को जान नहीं बच सकी। नवजात को जन्म देने के 11 दिन बाद 29 जुलाई को प्रसूता की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल पर इलाज में हीलाहवाली का आरोप लगाया है।
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चंपावत के बाजरीकोट की संध्या (24) पत्नी दीपक ने 19 जुलाई को जिला अस्पताल में ऑपरेशन से शिशु को जन्म दिया। 21 जुलाई को जच्चा-बच्चा को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। संध्या के चाचा हरीश कुमार ने बताया कि उनकी भतीजी को 23 जुलाई से लगातार बुखार रहा। दवा से राहत नहीं मिलने और तबीयत बिगड़ने पर 27 जुलाई को संध्या को फिर से जिला अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन एक दिन बाद 28 जुलाई को यहां से हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर कर दिया गया। हल्द्वानी ले जाने से पहले प्रसूता को यहां एक निजी अस्पताल में दिखाया। परीक्षण के बाद निजी अस्पताल ने संक्रमण फैलने की दलील देते हुए बाहर ले जाने की सलाह दी।
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परिजनों का कहना है कि हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल और हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल के जवाब देने के बाद वे 29 जुलाई को संध्या को बरेली के भोजीपुरा के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने संक्रमण फैलने से शरीर के अधिकांश अंगों के काम नहीं करने की जानकारी दी। इसी बीच 29 जुलाई की शाम भोजीपुरा में महिला ने दम तोड़ दिया। शनिवार को संध्या का अंतिम संस्कार हुआ। परिजनों ने रविवार को इस मामले में जिला अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि प्रसव के दौरान लापरवाही और बाद रेफर करने में की गई देरी की वजह से संध्या की जान गई है। इस मामले की सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, डीएम और सीएमओ से शिकायत कर जांच की मांग की है।
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अस्पताल की लापरवाही से संध्या की मौत नहीं हुई है। जिला अस्पताल में ऑपरेशन से सुरक्षित प्रसव कराने से तीन दिन तक अस्पताल में पूरी देखभाल की गई। अस्पताल दोबारा आने के बाद एकाएक तबीयत बिगड़ने पर रेफर करना जरूरी था। ऐसे में अस्पताल की लापरवाही का सवाल ही नहीं उठता है। मृतक के परिजनों की ओर से कोई शिकायत भी नहीं आई है। शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. एचएस ऐरी, पीएमएस, जिला अस्पताल
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