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फागुन मस्त महीना की होरी...
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
Updated Sun, 05 Mar 2017 09:15 PM IST
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सुंई में बैठकी होली का गायन करते होल्यार।
- फोटो : अमर उजाला
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सुंई गांव में भगवती जागरण समिति की ओर से बैठकी होली आयोजित की गई। देर रात तक होल्यार विभिन्न रागों में झूमते रहे। समिति के अध्यक्ष राजेश चौबे के आवास में हुई बैठकी होली का शुभारंभ राग काफी में ‘करूंगी कपोलन लाल, लला मोरी अंगिया न छुओ’ गीत की शानदार प्रस्तुति से की।
उर्वादत्त चौबे ने राग बहार में ‘अब कैसे यौवन बचाओगी गोरी, फागुन मस्त महीना की होरी’, गिरीश चौबे ने राग सहाना में ‘नवल यौवन मेरो, यों ही बीतो जात, कैसे घर ब्याह दई मोरी माता’ और रवि चौबे ने परज राग में ‘करले श्रृंगार, चतुर अलबेली साजन के घर जाना ही होगा’ गीत पर श्रोता झूमने को मजबूर हो गए।
मेजबान राजेश चौबे ने ठुमरी झपताल में ‘सखी री मोरी साड़ी रंगा दे गुलेनार, श्री बिनरा वन की कुंज गलिन में, घेर लियो नंदलाल’ , गणेश चौबे ने ठुमरी में ‘बिंदिया मोरी गिर गई ना जानूं राम, ना जानूं बिंदिया मोरी सेजा में गिर गई बलमा से लिपट गई ना जानू राम की’ प्रस्तुति ने समां बांध दिया। कैलाश चौबे ने राग जंगला काफी में ‘मेरे पिया के मन में पड़ी रे गांठ मैं कौन यतन कर खोलूं’ गीत प्रस्तुत किया। संतोष, मोहन, कैशव दत्त, प्रयाग दत्त, राजू चौबे ने सुर में सुर मिलाया।
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उर्वादत्त चौबे ने राग बहार में ‘अब कैसे यौवन बचाओगी गोरी, फागुन मस्त महीना की होरी’, गिरीश चौबे ने राग सहाना में ‘नवल यौवन मेरो, यों ही बीतो जात, कैसे घर ब्याह दई मोरी माता’ और रवि चौबे ने परज राग में ‘करले श्रृंगार, चतुर अलबेली साजन के घर जाना ही होगा’ गीत पर श्रोता झूमने को मजबूर हो गए।
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मेजबान राजेश चौबे ने ठुमरी झपताल में ‘सखी री मोरी साड़ी रंगा दे गुलेनार, श्री बिनरा वन की कुंज गलिन में, घेर लियो नंदलाल’ , गणेश चौबे ने ठुमरी में ‘बिंदिया मोरी गिर गई ना जानूं राम, ना जानूं बिंदिया मोरी सेजा में गिर गई बलमा से लिपट गई ना जानू राम की’ प्रस्तुति ने समां बांध दिया। कैलाश चौबे ने राग जंगला काफी में ‘मेरे पिया के मन में पड़ी रे गांठ मैं कौन यतन कर खोलूं’ गीत प्रस्तुत किया। संतोष, मोहन, कैशव दत्त, प्रयाग दत्त, राजू चौबे ने सुर में सुर मिलाया।
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