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सूने हैं कई बैंक, एटीएम का शटर डाउन

Fri, 18 Nov 2016 10:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत Updated Fri, 18 Nov 2016 10:15 PM IST
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Many deserted bank, ATM shutter down
सूने हैं कई बैंक, एटीएम का शटर डाउन - फोटो : अमर उजाला
 जिले में नकदी का संकट अब तक दूर नहीं हो सका है। कैश नहीं होने से यूनियन बैंक, अल्मोड़ा अर्बन कोआपरेटिव बैंक सहित ज्यादातर बैंकों में सन्नाटा है।
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भारतीय स्टेट बैंक के अलावा इक्का-दुक्का दूसरे बैंकों में ही नोट बदलने और पुराने नोट जमा करने का काम कर रहे हैं। एटीएम भी नहीं चल पा रहे हैं। वहीं, लीड बैंक अधिकारी आनंद सिंह रावत का कहना है कि जिले में मंगलवार तक कैश आने की संभावना है। इसके बाद नगदी का संकट कम हो जाएगा।
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पंजाब नेशनल बैंक के शाखा प्रबंधक नवीन कुमार का कहना है कि नगदी की कमी से बैंक 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों को खातों में जमा करवा रहा है। साथ ही कैश होने पर विवाह, बीमारी अथवा दूसरी अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंक 20 हजार रुपए तक देगा। वहीं शनिवार से बैंक का एटीएम काम करने की बात कही गई है। अल्मोड़ा अर्बन कोआपरेटिव बैंक के प्रबंधक अनिल तिवारी का कहना है कि बैंक में नगदी नहीं है। आरडी से मिली रकम से ही काम चल रहा है।
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शुक्रवार को भी एसबीआई में सबसे ज्यादा भीड़ रही। मुख्य प्रबंधक एचएस पांगती का कहना है कि लोगों के रुपये बदलने के अलावा खातों में जमा करने का काम चल रहा है। अब तक जिले में 41 करोड़ रुपए से अधिक बैंक खाते में जमा और मुद्रा विनियम किया जा चुका है। साथ ही एटीएम को भी नए नोटों के हिसाब से ठीक किए जाने का काम शुरू हो गया है।

पंडित जी को चेक से दी दक्षिणा
शादी-ब्याह और दूसरी जरूरी काम ही नहीं, नामकरण में भी कैश क्राइसेस भारी पड़ रहा है। यहां तक कि एक व्यक्ति को तो पंडित की दक्षिणा देने तक के लिए कैश नहीं था। बाद में पंडित जी को चेक के जरिए दक्षिणा की रकम का भुगतान किया गया।


यहां जीआईसी चौक के भुवन तिवारी को इस माह के शुरू में पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। बैंक में नकदी नहीं मिलने से नामकरण संस्कार की व्यवस्थाओं में दुश्वारी हुई। परचून, सब्जी, मिठाई, कपड़े, टेंट आदि के खर्चे के लिए कैश की कमी आड़े आई। जिसे बाद में चेक के माध्यम से दिया गया। और तो और नामकरण में दक्षिणा के लिए भी नगदी नहीं मिल पाई। बाद में पंडित पूरन चंद्र पांडेय, पंडित मोहन पांडेय और पंडित जगदीश पांडेय को दक्षिणा के रूप में चेक भेंट किया गया।
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