{"_id":"5894b2a44f1c1bc64fe80ddf","slug":"malaysia-would-not-happen-again","type":"story","status":"publish","title_hn":"जगत को अब दोबारा मलयेशिया नहीं जाने देंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जगत को अब दोबारा मलयेशिया नहीं जाने देंगे
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
Updated Fri, 03 Feb 2017 10:11 PM IST
विज्ञापन
जगत
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मलयेशिया में बंधक बने जगत सिंह के शनिवार को घर पहुंचने की उम्मीद है। घर वापसी की सूचना से उनके परिजन बेहद खुश हैं। परिजनों का कहना है कि अब वे जगत सिंह को दोबारा मलयेशिया नहीं जाने देंगे।
जगत सिंह की पत्नी नीलम ने बताया कि उनके पति के भारत आने के लिए भारतीय दूतावास से कागजात तैयार करा लिए गए हैं। जगत शुक्रवार शाम को करीब 5.30 बजे की फ्लाइट से रात 9.30 बजे दिल्ली पहुंचे। उनके भाई बलवंत सिंह जगत को लाने के लिए दिल्ली में हैं। परिजनों ने बताया कि जगत के शनिवार रात तक घर पहुंचने की उम्मीद है। इस घटनाक्रम से परिजनों में खुशी का माहौल है।
जगत सिंह मलयेशिया के एक होटल में काम करने के लिए करीब तीन वर्ष पूर्व गए थे।
जनवरी में उनके वीजा की अवधि समाप्त हो गई थी। आरोप है कि इसके बाद से होटल स्वामी ने उन्हें बंधक बनाकर शोषण किया। जगत सिंह किसी तरह होटल स्वामी के चंगुल से भागकर 20 जनवरी को भारतीय दूतावास में पहुंचा। जिला प्रशासन की पहल पर दूतावास और विदेश मंत्रालय की मदद से उसकी वापसी की राह बनी।
विज्ञापन
विज्ञापन
जगत सिंह की पत्नी नीलम ने बताया कि उनके पति के भारत आने के लिए भारतीय दूतावास से कागजात तैयार करा लिए गए हैं। जगत शुक्रवार शाम को करीब 5.30 बजे की फ्लाइट से रात 9.30 बजे दिल्ली पहुंचे। उनके भाई बलवंत सिंह जगत को लाने के लिए दिल्ली में हैं। परिजनों ने बताया कि जगत के शनिवार रात तक घर पहुंचने की उम्मीद है। इस घटनाक्रम से परिजनों में खुशी का माहौल है।
विज्ञापन
जगत सिंह मलयेशिया के एक होटल में काम करने के लिए करीब तीन वर्ष पूर्व गए थे।
जनवरी में उनके वीजा की अवधि समाप्त हो गई थी। आरोप है कि इसके बाद से होटल स्वामी ने उन्हें बंधक बनाकर शोषण किया। जगत सिंह किसी तरह होटल स्वामी के चंगुल से भागकर 20 जनवरी को भारतीय दूतावास में पहुंचा। जिला प्रशासन की पहल पर दूतावास और विदेश मंत्रालय की मदद से उसकी वापसी की राह बनी।
विज्ञापन