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माइक्रोस्कोप से देख रहे बेहतर भविष्य के सपने
योगेश जोशी/अमर उजाला, चंपावत
Updated Fri, 11 Dec 2015 10:24 PM IST
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किसी भी छात्र के स्वर्णिम भविष्य का अंतिम पायदान होती है उच्च शिक्षा। इसके बाद ही तैयार होती है छात्र के बेहतर भविष्य की बुनियाद, लेकिन जिला मुख्यालय के पीजी कॉलेज के हाल बुरे हैं। छात्र बेहतर भविष्य की बुनियाद तैयार करें भी तो कैसे? न लैब में सामान है और न ही महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक। लैब में उपकरण के नाम पर मात्र माइक्रोस्कोप है। शिक्षकों और उपकरणों के अभाव में यहां के छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। चहारदीवारी नहीं होने से कॉलेज परिसर में जानवरों का आना-जाना लगा रहता है।
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छात्र-छात्राओं की बेहतर मुकाम पाने की राह में रोड़ा बन रही है पीजी कॉलेज की कमियां। 615 की छात्र संख्या वाला बेशक यह पीजी कॉलेज है, लेकिन परास्नातक में दो विषयों राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र स्वीकृत हैं, जिसमें राजनीति विज्ञान में 40 और अर्थशास्त्र में 20 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। बीएससी के हाल तो और भी खराब है। उपकरण नहीं होने से छात्र प्रेक्टिकल को तरस रहे हैं। गणित और फिजिक्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षकों की तैनाती नहीं हो सकी है। यहीं हाल स्नातक में कला वर्ग के हैं। अर्थशास्त्र और इतिहास में एक-एक पद खाली हैं, जबकि गृह विज्ञान और भूगोल विषयों में शिक्षक की तैनाती नहीं हो सकी हैं।
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लिपिक वर्ग में दो पद स्वीकृत हैं। प्रशासनिक अधिकारी को छोड़ प्रवर सहायक का पद खाली है। लैब असिस्टेंट के चार पद स्वीकृत हैं, लेकिन दो पर ही तैनाती हो सकी है। चतुर्थ श्रेणी के स्वीकृत छह पदों पर मात्र एक की तैनाती है, पांच पदों पर संविदा में तैनाती की गई है।
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पीजी कॉलेज में ये हैं स्वीकृत विषय
पीजी कॉलेज में स्नातक कला वर्ग में आठ विषय हिंदी साहित्य, अंग्रेजी साहित्य, राजनीति विज्ञान, इतिहास, समाजशास्त्र, भूगोल, गृह विज्ञान और अर्थशास्त्र स्वीकृत हैं। विज्ञान वर्ग में पांच विषय भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, जंतु विज्ञान और गणित स्वीकृत हैं। कला वर्ग में प्राध्यापकों के स्वीकृत 16 पदों के सापेक्ष छह पद खाली हैं, जबकि विज्ञान वर्ग में स्वीकृत पांच पदों के सापेक्ष दो पद खाली हैं।
महाविद्यालय के विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विज्ञान वर्ग में शीघ्र ही गणित और फिजिक्स के प्रवक्ताओं की तैनाती हो जाएगी। लैब में उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कोशिश जारी है। चहारदीवारी निर्माण को पचास लाख रुपये की मांग की गई है। -डा.सीडी सूंठा, प्राचार्य, पीजी कॉलेज चंपावत।
जिले के सभी डिग्री कॉलेज मेें आवश्यक संसाधन जुटाए जा रहे हैं। उच्च शिक्षा की बेहतरी के लिए प्रदेश सरकार संजीदा है। चंपावत डिग्री कॉलेज का दौरा कर शीघ्र वहां की कमियों को पूरा किया जाएगा। -विधायक, हेमेश खर्कवाल।