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पांच डॉक्टरों के भरोसे लोहाघाट का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
अमर उजाला ब्यूरो, लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Sun, 13 Aug 2017 10:30 PM IST
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लोहाघाट अस्पताल में भर्ती हुए मरीज डाक्टरों का इंतजार करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
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यहां के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचएस) में डॉक्टरों की कमी मरीजों के लिए मुसीबत बन रही है। इस अस्पताल में फिलहाल 13 डॉक्टर के बजाय मात्र 5 डॉक्टर तैनात हैं। अस्पताल में एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने से लोगों को पिथौरागढ़, खटीमा, हल्द्वानी आदि स्थानों को जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
चिकित्साधीक्षक डॉ.मंजीत सिंह ने बताया कि अस्पताल में हर रोज 425 से अधिक नए व पुराने रोगी आ रहे हैं। लेकिन डॉक्टरों की कमी के चलते रोगियों को विशेष लाभ नहीं मलि पा रहा है। मरीजों को बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पताल में 13 डॉक्टरों में से इन दिनों चिकित्साधीक्षक सहित कुल 5 डॉक्टर हैं।
इलाज का जिम्मा चिकित्साधीक्षक डॉ.मंजीत सिंह के अलावा 4 अन्य डॉक्टर संभाले हुए हैं। 3 डॉक्टरों को कैलाश मानसरोवर यात्रा जाने के आदेश हुए। यहां स्थानांतरित किए गए डॉक्टरों में से 2 ने अभी कार्यभार ग्रहण नहीं किया है, 3 अवकाश में हैं। अस्पताल की डिस्पेंसरी में एप्रेंटिस कर रही स्टाफ नर्स द्वारा दवाओं का वितरण किया जा रहा है।
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साथ ही रोगियों को इंजेक्शन लगाने का जिम्मा भी प्रशिक्षणार्थी फार्मेसिस्टों को दिया गया है। अस्पताल में पीपीपी मोड समाप्त होने के आठ माह बाद शासन ने अस्थि रोग विशेषज्ञ, सर्जन, निश्चेतक और रेडियोलॉजिस्ट सहित 7 डॉक्टरों की तैनाती के आदेश किए थे। 5 डॉक्टरों ने चार्ज भी ले लिया, जिनमें से 3 डॉक्टर फिलहाल छुट्टी पर हैं।
नेपाल सीमा से लगे पंचेश्वर, पंथ्यूड़ा, निडिल, रौंसाल, पुलहिंडोला, बर्दाखान, सिमलखेत, बाराकोट, देवीधुरा, रीठासाहिब आदि स्थानों से रोज बड़ी संख्या में मरीज लोहाघाट उपचार के लिए आते हैं। मगर यहां भी इलाज नहीं मिलने से उन्हें खटीमा, हल्द्वानी या बरेली की दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
नहीं हो रहा है आदेशों का पालन
सीएचसी में संविदा में कार्यरत डॉ.आशीष, डॉ.रवींद्र बोहरा और डॉ.अजय को स्वास्थ्य विभाग ने कैलाश मानसरोवर यात्रा की ड्यूटी ज्वाइन करने के आदेश दिए थे, लेकिन ये तीनों डॉक्टर ड्यूटी में नहीं गए। आदेशों का पालन न करने पर सीएमओ ने उन्हें लोहाघाट सीएचसी में सेवा देने से मना कर दिया।
इसके बाद से उन्होंने भी सीएचसी में मरीजों को देखना बंद कर दिया है। इससे सीएचसी में लगातार डॉक्टरों का टोटा बढ़ता जा रहा है। बीडीसी सदस्य दिवान सिंह बिष्ट ने कहा कि पूरे क्षेत्र के इस सबसे बड़े अस्पताल में इलाज नहीं मिलने से लोग दूरदराज जाने को मजबूर हैं।
मानसरोवर ड्यूटी के लिए तीन डॉक्टरों को भेजने के आदेश हुए, मगर वे मानसरोवर यात्रा ड्यूटी में नहीं गए। निश्चेतक, सर्जन और अस्थि रोग विशेषज्ञ छुट्टी पर हैं। सीएचसी लोहाघाट में डाक्टरों की कमी पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ.एमएस बोहरा
मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
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चिकित्साधीक्षक डॉ.मंजीत सिंह ने बताया कि अस्पताल में हर रोज 425 से अधिक नए व पुराने रोगी आ रहे हैं। लेकिन डॉक्टरों की कमी के चलते रोगियों को विशेष लाभ नहीं मलि पा रहा है। मरीजों को बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पताल में 13 डॉक्टरों में से इन दिनों चिकित्साधीक्षक सहित कुल 5 डॉक्टर हैं।
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इलाज का जिम्मा चिकित्साधीक्षक डॉ.मंजीत सिंह के अलावा 4 अन्य डॉक्टर संभाले हुए हैं। 3 डॉक्टरों को कैलाश मानसरोवर यात्रा जाने के आदेश हुए। यहां स्थानांतरित किए गए डॉक्टरों में से 2 ने अभी कार्यभार ग्रहण नहीं किया है, 3 अवकाश में हैं। अस्पताल की डिस्पेंसरी में एप्रेंटिस कर रही स्टाफ नर्स द्वारा दवाओं का वितरण किया जा रहा है।
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साथ ही रोगियों को इंजेक्शन लगाने का जिम्मा भी प्रशिक्षणार्थी फार्मेसिस्टों को दिया गया है। अस्पताल में पीपीपी मोड समाप्त होने के आठ माह बाद शासन ने अस्थि रोग विशेषज्ञ, सर्जन, निश्चेतक और रेडियोलॉजिस्ट सहित 7 डॉक्टरों की तैनाती के आदेश किए थे। 5 डॉक्टरों ने चार्ज भी ले लिया, जिनमें से 3 डॉक्टर फिलहाल छुट्टी पर हैं।
नेपाल सीमा से लगे पंचेश्वर, पंथ्यूड़ा, निडिल, रौंसाल, पुलहिंडोला, बर्दाखान, सिमलखेत, बाराकोट, देवीधुरा, रीठासाहिब आदि स्थानों से रोज बड़ी संख्या में मरीज लोहाघाट उपचार के लिए आते हैं। मगर यहां भी इलाज नहीं मिलने से उन्हें खटीमा, हल्द्वानी या बरेली की दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
नहीं हो रहा है आदेशों का पालन
सीएचसी में संविदा में कार्यरत डॉ.आशीष, डॉ.रवींद्र बोहरा और डॉ.अजय को स्वास्थ्य विभाग ने कैलाश मानसरोवर यात्रा की ड्यूटी ज्वाइन करने के आदेश दिए थे, लेकिन ये तीनों डॉक्टर ड्यूटी में नहीं गए। आदेशों का पालन न करने पर सीएमओ ने उन्हें लोहाघाट सीएचसी में सेवा देने से मना कर दिया।
इसके बाद से उन्होंने भी सीएचसी में मरीजों को देखना बंद कर दिया है। इससे सीएचसी में लगातार डॉक्टरों का टोटा बढ़ता जा रहा है। बीडीसी सदस्य दिवान सिंह बिष्ट ने कहा कि पूरे क्षेत्र के इस सबसे बड़े अस्पताल में इलाज नहीं मिलने से लोग दूरदराज जाने को मजबूर हैं।
मानसरोवर ड्यूटी के लिए तीन डॉक्टरों को भेजने के आदेश हुए, मगर वे मानसरोवर यात्रा ड्यूटी में नहीं गए। निश्चेतक, सर्जन और अस्थि रोग विशेषज्ञ छुट्टी पर हैं। सीएचसी लोहाघाट में डाक्टरों की कमी पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ.एमएस बोहरा
मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।