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पेयजल किल्लत पर भारी पड़ रहा लीकेज
योगेश जोशी/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sat, 18 Mar 2017 10:32 PM IST
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पानी का लीकेज
- फोटो : अमर उजाला
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रौखेत स्रोत के गिरते जल स्तर के बारे में पूछने पर स्थानीय निवासी आनंद सिंह मौनी बोले ‘साहब क्या बताए! कभी इससे ज्यादा पानी तो जेठ के महीने में होता था। इस साल बारिश नहीं होने से स्रोत में जल स्तर कम हो गया’। वैसे विभाग का मानना है कि जल स्तर में 55 फीसदी की कमी आ गई है। वहीं पानी की कमी के बीच पेयजल लाइनों हुए लीकेज मुसीबत बढ़ा रहे हैं।
जेई एसएस थापा का कहना है कि चंपावत क्षेत्र में 73 पेयजल योजनाएं संचालित हैं। रौखेत स्रोत से बनी तीन पेयजल योजनाओं से जिला मुख्यालय की तल्ली मादली, मल्ली मादली, देवल, मांजगांव, त्यारकूड़ा, जीआईसी रोड, कनलगांव और जीजीआईसी क्षेत्र की बड़ी आबादी की प्यास बुझाती है। पेयजल को लेकर दिक्कतों का सफर यहीं खत्म नहीं होता। पेयजल लाइनों के लीकेज मुसीबत बढ़ाने का काम कर रहे हैं। कई लाइनों के लीकेज से निकलने वाले पानी से हर रोज हजारों लीटर पानी की बेवजह बर्बादी हो रही है। जेई का कहना है कि चंपावत क्षेत्र में मात्र पांच लीकेज हैं। जिन्हें जल्दी ठीक कर लिया जाएगा। लेकिन असल में ये संख्या विभागीय दावों से कहीं ज्यादा है। जल संस्थान के अधिकारी बताते हैं कि एक लीकेज से एक दिन में 5760 लीटर पानी की बर्बादी होती है। चार लीकेज से 28800 लीटर पानी बर्बाद हो रहा है।
ऐसे में गिरते जल स्तर के संरक्षण और लीकेज से बर्बाद हो रहे पानी को नहीं बचाया गया, तो भविष्य में जबर्दस्त जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। पानी की कमी इस कदर है कि विभाग ने एक मार्च से एक दिन छोड़ कर पानी की सप्लाई करना शुरू कर दिया है।
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तो कम होगा लोहाघाट में पेयजल संकट
लोहाघाट में पेयजल संकट को कम करने के लिए एक ट्यूबवेल का निर्माण कराया जा रहा है। विभाग का कहना है कि तीन सप्ताह के भीतर इस ट्यूबवेल का काम पूरा करा लिया जाएगा। इस ट्यूबवेल को गर्मियों में सूखने वाली बंसवाड़ पेयजल योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि इससे दो लाख लीटर के टैंक को भरा जा सकेगा। इसके अलावा लोहाघाट में चार लाख लीटर के टैंक को चौड़ी पंपिंग योजना से भरा जा रहा है। लोहाघाट में रोजाना 16.20 लाख लीटर पानी की जरूरत है, मगर आपूर्ति इस वक्त 4.20 लाख लीटर ही हो पा रही है। इस कारण यहां अधिकांश मोहल्लों को नलों के जरिए चौथे दिन पानी की आपूर्ति हो रही है, लेकिन ट्यूबवेल के निर्माण से पानी का संकट कम होगा।
जेई एसएस थापा का कहना है कि चंपावत क्षेत्र में 73 पेयजल योजनाएं संचालित हैं। रौखेत स्रोत से बनी तीन पेयजल योजनाओं से जिला मुख्यालय की तल्ली मादली, मल्ली मादली, देवल, मांजगांव, त्यारकूड़ा, जीआईसी रोड, कनलगांव और जीजीआईसी क्षेत्र की बड़ी आबादी की प्यास बुझाती है। पेयजल को लेकर दिक्कतों का सफर यहीं खत्म नहीं होता। पेयजल लाइनों के लीकेज मुसीबत बढ़ाने का काम कर रहे हैं। कई लाइनों के लीकेज से निकलने वाले पानी से हर रोज हजारों लीटर पानी की बेवजह बर्बादी हो रही है। जेई का कहना है कि चंपावत क्षेत्र में मात्र पांच लीकेज हैं। जिन्हें जल्दी ठीक कर लिया जाएगा। लेकिन असल में ये संख्या विभागीय दावों से कहीं ज्यादा है। जल संस्थान के अधिकारी बताते हैं कि एक लीकेज से एक दिन में 5760 लीटर पानी की बर्बादी होती है। चार लीकेज से 28800 लीटर पानी बर्बाद हो रहा है।
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ऐसे में गिरते जल स्तर के संरक्षण और लीकेज से बर्बाद हो रहे पानी को नहीं बचाया गया, तो भविष्य में जबर्दस्त जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। पानी की कमी इस कदर है कि विभाग ने एक मार्च से एक दिन छोड़ कर पानी की सप्लाई करना शुरू कर दिया है।
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तो कम होगा लोहाघाट में पेयजल संकट
लोहाघाट में पेयजल संकट को कम करने के लिए एक ट्यूबवेल का निर्माण कराया जा रहा है। विभाग का कहना है कि तीन सप्ताह के भीतर इस ट्यूबवेल का काम पूरा करा लिया जाएगा। इस ट्यूबवेल को गर्मियों में सूखने वाली बंसवाड़ पेयजल योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि इससे दो लाख लीटर के टैंक को भरा जा सकेगा। इसके अलावा लोहाघाट में चार लाख लीटर के टैंक को चौड़ी पंपिंग योजना से भरा जा रहा है। लोहाघाट में रोजाना 16.20 लाख लीटर पानी की जरूरत है, मगर आपूर्ति इस वक्त 4.20 लाख लीटर ही हो पा रही है। इस कारण यहां अधिकांश मोहल्लों को नलों के जरिए चौथे दिन पानी की आपूर्ति हो रही है, लेकिन ट्यूबवेल के निर्माण से पानी का संकट कम होगा।