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जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल से गूंजा गुरु का द्वार
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
Updated Thu, 08 Jun 2017 10:40 PM IST
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रीठा साहिब कीर्तन गाते तीर्थ यात्री
- फोटो : अमर उजाला
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रीठा साहिब जोड़ मेले का मुख्य पर्व बृहस्पतिवार को हुआ। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित कई प्रदेशों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारे में मत्था टेका। समूचा क्षेत्र जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल के नारों से गूंज रहा था। शुक्रवार को तीन दिनी मेले का समापन होगा। श्री गुरुग्रंथ साहिब के पाठ की लड़ी शुरू होने के साथ नानकमत्ता साहिब सहित तमाम जगहों से यहां पहुंचे जत्थे के प्रतिनिधियों ने गुरुग्रंथ साहिब की अमृतवाणी का पाठ किया। रीठा साहिब गुरुद्वारे का इतिहास बताया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र लधिया व रतिया नदी के संगम पर स्नान किया।
रीठा साहिब गुरुद्वारे के संरक्षक बाबा तरसेम सिंह और प्रबंधक बाबा श्याम सिंह ने तमाम जगहों से पहुंचे श्रद्धालुओं का स्वागत किया। अमृतसर के जत्थेदार ज्ञानी पूरन सिंह, गुरुवचन सिंह, पटना साहिब के ज्ञानी गुरु इकबाल सिंह, जत्थेदार बाबा वचन सिंह, सुरेंद्र सिंह, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के रंजीत सिंह, रजपाल सिंह, जोगेंद्र पाल सिंह ने कहा कि सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव जी ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति के बल पर रीठे की कड़ुवाहट में मिठास भरकर दुनिया को मिलकर रहने का संदेश दिया। दूरदराज से आए जत्थेदारों ने भी सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया।
मेले में लंगर में बड़ी तादात में लोग प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। गुरुद्वारे नानकमत्ता साहिब की ओर से चिकित्सा शिविर लगाया गया है। जिसमें सैकड़ों मरीजों का नि:शुल्क इलाज किया गया। शिविर में फार्मेसिस्ट दीपक गिरि गोस्वामी भी सहयोग कर रहे हैं।
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150 किलोमीटर में लगे हैं आठ लंगर
रीठा साहिब जोड़ मेले के मद्देनजर टनकपुर से रीठा साहिब तक जगह-जगह श्रद्धालुओं की सुविधाओं का ख्याल रखा जा रहा है। सिख संगत ने इस 150 किलोमीटर के फासले में आठ लंगर लगाए हैं। जिनमें तीर्थ यात्रियों और अन्य लोगों को दाल, चावल, रोटी, शर्बत, चाय पकौड़े और जलेबी का प्रसाद दिया जा रहा है। सड़क किनारे लगे इन लंगरों में सेवादार राह चलते लोगों को बेहद आत्मीयता के साथ प्रसाद छकने का आग्रह कर रहे हैं।
इन लंगरों में तैनात सेवादार बिना किसी भेदभाव के सेवा करने में मशगूल हैं। गुरु राम दास सेवा समिति ऊधमसिंह नगर के बलवंत सिंह का कहना है कि सिख धर्म में सेवा को सर्वोपरि माना गया है। यहीं वजह है कि कोई भी सेवादार सेवा करने का मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं। बेहद व्यवस्थित तरीके से चलने वाले इन लंगरों में बर्तन धोने और सफाई करने के काम को बेहद सम्मान के नजरिए से देखा जाता है। हर सेवादार इस काम को करने के लिए बेताब दिखाई देता है। भिंगराड़ा में माधोटांडा से आई सिख संगत, जोस्यूड़ा में पीलीभीत, पोखरी में नानकमत्ता, नलियां चौकी खेतीखान में पूरनपुर, मुड़ियानी में ऊधमसिंह नगर से आई सिख संगत ने लंगर लगाए हैं। इसके अलावा सलना पुल, चल्थी और सूखीढ़ांग में भी लंगर लगा कर प्रसाद बांटा जा रहा है।
हर लंगर में लगा है मेडिकल कैंप
लंगरों मे भोजन उपलब्ध कराने के साथ ही श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाता है। हर लंगर में एक मेडिकल कैंप अवश्य लगाया जाता है। जिसमें प्राथमिक उपचार और दवाइयों की व्यवस्था रहती है। जिससे आवश्यकता पड़ने पर जरूरतमंद को दवाईयां उपलब्ध कराई जा रही है।
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रीठा साहिब गुरुद्वारे के संरक्षक बाबा तरसेम सिंह और प्रबंधक बाबा श्याम सिंह ने तमाम जगहों से पहुंचे श्रद्धालुओं का स्वागत किया। अमृतसर के जत्थेदार ज्ञानी पूरन सिंह, गुरुवचन सिंह, पटना साहिब के ज्ञानी गुरु इकबाल सिंह, जत्थेदार बाबा वचन सिंह, सुरेंद्र सिंह, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के रंजीत सिंह, रजपाल सिंह, जोगेंद्र पाल सिंह ने कहा कि सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव जी ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति के बल पर रीठे की कड़ुवाहट में मिठास भरकर दुनिया को मिलकर रहने का संदेश दिया। दूरदराज से आए जत्थेदारों ने भी सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया।
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मेले में लंगर में बड़ी तादात में लोग प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। गुरुद्वारे नानकमत्ता साहिब की ओर से चिकित्सा शिविर लगाया गया है। जिसमें सैकड़ों मरीजों का नि:शुल्क इलाज किया गया। शिविर में फार्मेसिस्ट दीपक गिरि गोस्वामी भी सहयोग कर रहे हैं।
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150 किलोमीटर में लगे हैं आठ लंगर
रीठा साहिब जोड़ मेले के मद्देनजर टनकपुर से रीठा साहिब तक जगह-जगह श्रद्धालुओं की सुविधाओं का ख्याल रखा जा रहा है। सिख संगत ने इस 150 किलोमीटर के फासले में आठ लंगर लगाए हैं। जिनमें तीर्थ यात्रियों और अन्य लोगों को दाल, चावल, रोटी, शर्बत, चाय पकौड़े और जलेबी का प्रसाद दिया जा रहा है। सड़क किनारे लगे इन लंगरों में सेवादार राह चलते लोगों को बेहद आत्मीयता के साथ प्रसाद छकने का आग्रह कर रहे हैं।
इन लंगरों में तैनात सेवादार बिना किसी भेदभाव के सेवा करने में मशगूल हैं। गुरु राम दास सेवा समिति ऊधमसिंह नगर के बलवंत सिंह का कहना है कि सिख धर्म में सेवा को सर्वोपरि माना गया है। यहीं वजह है कि कोई भी सेवादार सेवा करने का मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं। बेहद व्यवस्थित तरीके से चलने वाले इन लंगरों में बर्तन धोने और सफाई करने के काम को बेहद सम्मान के नजरिए से देखा जाता है। हर सेवादार इस काम को करने के लिए बेताब दिखाई देता है। भिंगराड़ा में माधोटांडा से आई सिख संगत, जोस्यूड़ा में पीलीभीत, पोखरी में नानकमत्ता, नलियां चौकी खेतीखान में पूरनपुर, मुड़ियानी में ऊधमसिंह नगर से आई सिख संगत ने लंगर लगाए हैं। इसके अलावा सलना पुल, चल्थी और सूखीढ़ांग में भी लंगर लगा कर प्रसाद बांटा जा रहा है।
हर लंगर में लगा है मेडिकल कैंप
लंगरों मे भोजन उपलब्ध कराने के साथ ही श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाता है। हर लंगर में एक मेडिकल कैंप अवश्य लगाया जाता है। जिसमें प्राथमिक उपचार और दवाइयों की व्यवस्था रहती है। जिससे आवश्यकता पड़ने पर जरूरतमंद को दवाईयां उपलब्ध कराई जा रही है।