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खत्म हो सकता है जेल भवन का वनवास
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चंपावत का निर्माणाधीन जिला जेल भवन।
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। जिला जेल के निर्माण में संशय के बादल 14 साल बाद बादल छंट सकते हैं। 2.22 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद अब उम्मीद जगी है कि जेल अब गोरलचौड़ मैदान के नजदीक वाली जगह में नहीं बनेगी। इसे अब पांच किलोमीटर दूर फूंगर गांव में बनाया जाएगा। जमीन की भी तलाश कर प्रस्ताव भेजा गया है। 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी ने गोरलचौड़ मैदान इसका शिलान्यास किया था। 2012 से इसका निर्माण कार्य लटका है।
चंपावत जिला जेल का जून 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी ने शिलान्यास किया था। गोरलचौड़ मैदान के पास शुरू जेल भवन में चहारदीवारी पर 1.22 करोड़ और जमीन के मुआवजे पर एक करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। बजट नहीं मिलने से 2012 से काम ठप है। लंबे समय से काम बंद होने और चंपावत विकास एवं संघर्ष समिति के विरोध के चलते जेल की जगह बदलने की मांग होती रही। विधायक कैलाश गहतोड़ी ने भी इसे गौड़ी रोड या शहर से दूर किसी जगह बनाने की पैरवी की थी। कुछ महीने पहले डीएम विनीत तोमर ने भी निर्माणाधीन जेल भवन वाले स्थान में खेल विभाग कार्यालय और इंडोर स्टेडियम बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए थे। वैसे यहां न तो कोई नया स्टेडियम है और न ही खेल कार्यालय भवन। खेल कार्यालय गोरलचौड़ मैदान में सिर्फ दो कमरों में चल रहा है।
103 नाली जमीन चिन्हित की गई
चंपावत। हल्द्वानी के जेल अधीक्षक के निर्देश के बाद प्रशासन ने फूंगर गांव में जमीन की तलाश भी कर ली है। चंपावत की तहसीलदार ज्योति धपवाल ने बताया कि फूंगर में 103 नाली छह मुट्ठी जमीन को जेल भवन के लिए चिन्हित किया गया है। डीएम के माध्यम से यह प्रस्ताव भेज दिया गया है। 200 कैदियों की क्षमता वाली यह जेल 42 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाना प्रस्तावित है।
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24 की क्षमता वाले बंदीगृह में 38 कैदी
चंपावत। जिला जेल नहीं होने से जिले के विचाराधीन कैदियों को लोहाघाट बंदीगृह में रखा जाता है लेकिन ये बंदीगृह मानकों के अनुरूप जेल की श्रेणी में नहीं है। राजस्व विभाग का यह बंदीगृह बकायेदारों को रखने के लिए बनाया गया था। क्षमता से अधिक कैदी होने के अलावा शातिर, हत्या सहित गंभीर आपराधिक प्रवृत्ति वाले आरोपियों को लोहाघाट से अल्मोड़ा शिफ्ट किया जाता है। 24 की क्षमता वाले लोहाघाट बंदीगृह में इस वक्त तीन महिलाओं सहित कुल 38 कैदी रखे गए हैं। बंदीगृह प्रभारी हरीश चंद्र गहतोड़ी का कहना है बंदीगृह में कैदियों को अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैय्या कराई जाती है।
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चंपावत जिला जेल का जून 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी ने शिलान्यास किया था। गोरलचौड़ मैदान के पास शुरू जेल भवन में चहारदीवारी पर 1.22 करोड़ और जमीन के मुआवजे पर एक करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। बजट नहीं मिलने से 2012 से काम ठप है। लंबे समय से काम बंद होने और चंपावत विकास एवं संघर्ष समिति के विरोध के चलते जेल की जगह बदलने की मांग होती रही। विधायक कैलाश गहतोड़ी ने भी इसे गौड़ी रोड या शहर से दूर किसी जगह बनाने की पैरवी की थी। कुछ महीने पहले डीएम विनीत तोमर ने भी निर्माणाधीन जेल भवन वाले स्थान में खेल विभाग कार्यालय और इंडोर स्टेडियम बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए थे। वैसे यहां न तो कोई नया स्टेडियम है और न ही खेल कार्यालय भवन। खेल कार्यालय गोरलचौड़ मैदान में सिर्फ दो कमरों में चल रहा है।
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103 नाली जमीन चिन्हित की गई
चंपावत। हल्द्वानी के जेल अधीक्षक के निर्देश के बाद प्रशासन ने फूंगर गांव में जमीन की तलाश भी कर ली है। चंपावत की तहसीलदार ज्योति धपवाल ने बताया कि फूंगर में 103 नाली छह मुट्ठी जमीन को जेल भवन के लिए चिन्हित किया गया है। डीएम के माध्यम से यह प्रस्ताव भेज दिया गया है। 200 कैदियों की क्षमता वाली यह जेल 42 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाना प्रस्तावित है।
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24 की क्षमता वाले बंदीगृह में 38 कैदी
चंपावत। जिला जेल नहीं होने से जिले के विचाराधीन कैदियों को लोहाघाट बंदीगृह में रखा जाता है लेकिन ये बंदीगृह मानकों के अनुरूप जेल की श्रेणी में नहीं है। राजस्व विभाग का यह बंदीगृह बकायेदारों को रखने के लिए बनाया गया था। क्षमता से अधिक कैदी होने के अलावा शातिर, हत्या सहित गंभीर आपराधिक प्रवृत्ति वाले आरोपियों को लोहाघाट से अल्मोड़ा शिफ्ट किया जाता है। 24 की क्षमता वाले लोहाघाट बंदीगृह में इस वक्त तीन महिलाओं सहित कुल 38 कैदी रखे गए हैं। बंदीगृह प्रभारी हरीश चंद्र गहतोड़ी का कहना है बंदीगृह में कैदियों को अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैय्या कराई जाती है।