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गहराने लगा पेयजल संकट

Fri, 15 Apr 2016 09:40 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत Updated Fri, 15 Apr 2016 09:40 PM IST
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In rural areas, the water crisis deepened
पेयजल संकट - फोटो : अमर उजाला

भीषण गर्मी के चलते पेयजल योजनाओं के जल स्रोतों में भारी कमी आने से ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल संकट गहरा गया है। पेयजल के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। पेयजल स्रोतों में 70 फीसदी से अधिक की कमी आने से कई पेयजल योजनाएं ठप पड़ गई हैं, जबकि कई ठप होने की कगार में पहुंचती जा रही हैं। चंपावत में जहां देर रात तक लोग हैंडपंपों में लाइन लगाकर पानी का इंतजाम कर रहे हैं वहीं लोहाघाट में लोग तड़के चार बजे से ही पेयजल की तलाश में निकल जा रहे हैं। बच्चे पानी की तलाश में निकल जाते हैं। सीमांत दुबड़मंच में पेयजल संकट के कारण लोगों को कई किलोमीटर दूर से पीने का पानी जुटाना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान पुष्कर सिंह का कहना है कि लोगों का अधिकांश समय पेयजल की व्यवस्था करने में ही जुट जा रहा है।

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लोहाघाट के रायनगर चौड़ी गांव के लिए बनी बनगांव पेयजल योजना का जलस्तर रसातल में पहुंचने से यह योजना ठप हो गई है। जिसके चलते लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, हालांकि विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए काम चलाया जा रहा है। लेकिन पर्याप्त पानी न मिलने से लोग काफी परेशान हैं। लोगों की पूरी निर्भरता नौलों पर होने से उनका पानी भी समाप्त हो जा रहा है। लोग कपड़े धोने, नहाने के लिए नदी में जा रहे हैं। उधर खूना मलक, फोर्ती, कलीगांव, टूंडा, पाटन पाटनी, पुलहिंडोला, चमदेवल आदि गांवों में भी पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है।
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लोग गाड़ गधेरों का पानी पीने को मजबूर हो गए हैं। मनुष्य और मवेशी एक घाट से पानी पी रहे हैं। जिससे संक्रामक रोग फैलने का खतरा बना हुआ है। नगर क्षेत्र में पेयजल किल्लत से जूझ रहे लोग नर्सरी गधेरे, अक्कल धारा, शिवालय मंदिर के पास बनी टंकी से प्यास बुझा रहे हैं। जिसमें भी शरारती तत्व छेड़छाड़ कर लोगों की दिक्कतों को बढ़ाते आ रहे हैं। जल संस्थान की ओर से टैंकरों के जरिए मेन टैंक में पानी डाला जा रहा है। लेकिन मांग के अनुरूप पानी उपलब्ध न होने से दिनों दिन पेयजल समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। 

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