लोहाघाट (चंपावत)। एक साल के ठहराव के बाद लोहाघाट में पहली नवरात्र के साथ रामलीला के मंचन का श्रीगणेश हुआ। पहले दिन रावण, कुभकर्ण, विभीषण ने कैलास पर्वत में तपस्या की। तप से प्रसन्न हो उन्हें वरदान मिला। वर पाकर प्रसन्न रावण अपने दूत के माध्यम से मुनिगणों को ये संदेश भिजवाता है- राज हमार जग में सारा, सुर-नर मुनि आधीन, कोई हारे कोई मारे, किए सभी श्रीहीन। दूतो मुनियों से जा पूछो, क्यों कर दिया अमीन। कर हम लेते नर सब देते, चाहे दीन-मलीन। राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन, सीता जन्म तक की लीला का मंचन हुआ। रावण का किरदार आशीष वर्मा, कुंभकर्ण पप्पू वर्मा, विभीषण ब्रजेश पांडेय ने किया।
इससे पूर्व शहर में 121वें वर्ष की रामलीला का मंचन का पूजा-अर्चना के साथ श्रीगणेश हुआ। पंडित प्रकाश पुनेठा के पौरोहित्य में पूजन हुआ। दानू सुतेड़ी, आनंद पुजारी, मुकेश साह ने पूजा-अर्चना की। चेयरमैन गोविंद वर्मा वर्मा ने रामलीला का शुभारंभ किया। शिक्षक नरेश राय के संचालन में हुई लीला में कमेटी के अध्यक्ष जीवन मेहता ने बताया कि लीला के दौरान नशा मुक्ति का संदेश दिया जाएगा। कोविड दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए लीला का आयोजन किया जा रहा है। दोनों टीके लगाने वाले कलाकारों को ही मंचन की अनुमति दी गई है। आयोजन में दीपक सुतेड़ी, संजय फर्त्याल, विनोद गोरखा, पारस जुकरिया, क्षितिज, जीवन गहतोड़ी, राजन राय, सतीश राजन आदि सहयोग कर रहे हैं। कोविड की वजह से 2020 में रामलील का आयोजन नहीं हो सका था। अलबत्ता परंपरा बनाए रखने के लिए दर्शकों की गैर मौजूदगी में चौपाई का गायन कर ऑनलाइन प्रसारण किया गया था।