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अप्रैल में नहीं हुई बारिश
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
Updated Wed, 13 Apr 2016 10:47 PM IST
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घटकू मंदिर में स्थापित कुंडा। मान्यता है कि इस बीडी में यदि एक घड़ा पानी डालने पर लबलबा भर जाए तो बारिश होती है।
- फोटो : अमर उजाला
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2016 के वित्त वर्ष का पहला महीना, मगर अप्रैल के पहले 13 दिनों में एक बूंद बारिश नहीं हुई, जबकि पिछले साल 13 अप्रैल को ही मेघ खूब बरसे थे। इस बार तपिश भी ज्यादा है। बारिश नहीं होने से खेत-खलिहान सूख गए हैं। फसल से लेकर मवेशियों के लिए हरी घास तक की समस्या पैदा हो रही है।
पिछले साल 13 अप्रैल को बारिश ने मौसम को खुशगवार बना दिया था। 19 मिलीमीटर बारिश हुई थी। तापमान भी 10 डिग्री सेल्सियस से कम रहा पर इस साल 13 अप्रैल सबसे गरम दिन रहा। तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक रहा।
तपिश से किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। बारिश नहीं होने से खेत-खलिहानों से लेकर मवेशी तक मुसीबत में हैं। जल स्रोतों में लगातार गिरावट आ रही है। पेयजल का हाल भी बुरा है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता पीसी करगेती का कहना है कि जल स्रोतों में पानी एक-तिहाई से भी कम रह गया है।
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बारिश की मान्यता से जुड़ा है घटोत्कच मंदिर
बारिश नहीं होने से लोग बेहाल हैं। खेती, पानी किल्लत से लेकर प्रशासन तक लाचारी महसूस कर रहा है। इस लाचारी के बीच आम लोगों की नजर मेघों पर लगी है। मान्यता है कि चंपावत जिले के घटोत्कच मंदिर का ताल्लुक बरसात से जोड़ा जाता है। घटोत्कच मंदिर के पुजारी गौरव पांडेय का कहना है कि महाभारतकालीन यह मंदिर बारिश की मान्यता से जुड़ा है। घटोत्कच मंदिर की खूबी इसमें बना छोटा सा कुंडा (जल संग्रह करने के लिए बना स्थान) है। नियमों का पालन कर घड़ों से कुंड के पूरा भरने से बारिश होने की मान्यता है। वहीं सात घड़े डालने से भी कुंड के नहीं भरने का मतलब बारिश न होने का संकेत माना जाता है। पंडित दिनेश तिवारी का कहना है कि छह साल पहले तक यहां इस मान्यता का उपयोग किया जाता रहा है।
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पिछले साल 13 अप्रैल को बारिश ने मौसम को खुशगवार बना दिया था। 19 मिलीमीटर बारिश हुई थी। तापमान भी 10 डिग्री सेल्सियस से कम रहा पर इस साल 13 अप्रैल सबसे गरम दिन रहा। तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक रहा।
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तपिश से किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। बारिश नहीं होने से खेत-खलिहानों से लेकर मवेशी तक मुसीबत में हैं। जल स्रोतों में लगातार गिरावट आ रही है। पेयजल का हाल भी बुरा है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता पीसी करगेती का कहना है कि जल स्रोतों में पानी एक-तिहाई से भी कम रह गया है।
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बारिश की मान्यता से जुड़ा है घटोत्कच मंदिर
बारिश नहीं होने से लोग बेहाल हैं। खेती, पानी किल्लत से लेकर प्रशासन तक लाचारी महसूस कर रहा है। इस लाचारी के बीच आम लोगों की नजर मेघों पर लगी है। मान्यता है कि चंपावत जिले के घटोत्कच मंदिर का ताल्लुक बरसात से जोड़ा जाता है। घटोत्कच मंदिर के पुजारी गौरव पांडेय का कहना है कि महाभारतकालीन यह मंदिर बारिश की मान्यता से जुड़ा है। घटोत्कच मंदिर की खूबी इसमें बना छोटा सा कुंडा (जल संग्रह करने के लिए बना स्थान) है। नियमों का पालन कर घड़ों से कुंड के पूरा भरने से बारिश होने की मान्यता है। वहीं सात घड़े डालने से भी कुंड के नहीं भरने का मतलब बारिश न होने का संकेत माना जाता है। पंडित दिनेश तिवारी का कहना है कि छह साल पहले तक यहां इस मान्यता का उपयोग किया जाता रहा है।