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हर्बल हब को हकीकत बनाने में जुटे लीलाधर

Sun, 29 May 2016 10:51 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत Updated Sun, 29 May 2016 10:51 PM IST
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 Herbal Hub reality working at Lilladher
हर्बल हब को हकीकत बनाने में जुटे लीलाधर - फोटो : अमर उजाला

चंपावत। 69 वर्ष के वैद्य लीलाधर जोशी के खेत अब स्वास्थ्य के लिहाज से सोना उगल रहे हैं। सेहत के लिए उपयोगी करीब 33 जड़ी-बूटियों की नर्सरी जोशी ने अपने दम पर विकसित की है। जोशी की लगन का ही सबब है कि चंपावत के अलावा तल्लापाल, पाटी, तल्लादेश आदि के इलाकों के लोग भी अब इस काम को अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं। इन इलाकों में करीब 370 नाली जमीन में जड़ी-बूटी की खेती की जा रही है।

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 यहां से करीब नौ किलोमीटर दूर पल्सों  (हिंग्लादेवी) गांव के वैद्य लीलाधर जोशी ने पिछले 29 सालों की मेहनत के जरिये प्रदेश के हर्बल उत्तराखंड के नारे को हकीकत में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है। वैद्य का काम करते हुये जड़ी-बूटियों को जुटाने की कोशिश में उन्होंने अपने लिए एक भरपूर नर्सरी खड़ी कर ली। अब यह नर्सरी उनके इलाज में दवाओं को उपलब्ध कराने का काम कर रही है। जोशी ने जड़ी-बूटियों के संसार से अपना परिचय बढ़ाया और खेती किसानी के अपने मोह से इसे जोड़ा। 1987 से उन्होंने अपने गांव में जड़ी बूटियों की नर्सरी की बुनियाद डाली।
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अब पल्सो गांव में 30 नाली भूमि में औषधीय महत्व की जड़ी-बूटी की नर्सरी लहलहा रही है। इससे आसपास के लोगों को भी प्रेरणा मिली है। आसपास के लोग अब यह मान रहे हैं कि परंपरागत खेती से अलग हटकर भी खेती से कमाई की जा सकती है। जड़ी-बूटी भेषज विकास इकाई के जिला समन्वयक राकेश वर्मा बुजुर्ग वैद्य  की पहल से काफी किसान अपनी जमीन पर जड़ीबूटी की खेती के लिए प्रेरित हुए हैं। रामलाल, ईश्वरी जोशी, मुकेश आदि का कहना है कि लीलाधर की कामयाबी ने उन्हें परंपरागत खेती के बजाय जड़ी-बूटी की खेती की ओर मोड़ा। 

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