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जज्बे और परहेज से हारा कैंसर
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
Updated Sat, 03 Feb 2018 10:19 PM IST
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कैंसर को पछाड़ने वाले दीपक राय
- फोटो : अमर उजाला
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कैंसर का नाम सुनते ही शरीर में सिहरन दौड़ जाती है, बेहतर मानसिक मजबूती वाला शख्स भी इसकी चपेट में आते ही हिम्मत हार जाता है। पर हमारे बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने कीमोथेरेपी की असहनीय पीड़ा सहते हुए मानसिक मजबूती और अपने जज्बे के दम पर इस जानलेवा रोग को शिकस्त दी है। ऐसे ही एक शख्स हैं चंपावत के कारोबारी दीपक राय। अपने जज्बे की बदौलत इन्होंने फोर्थ स्टेज के कैंसर को मात दी और आज सेहतमंद जिंदगी जीते हुए वे दूसरों के लिए मिसाल बने हुए हैं।
दीपक राय के अनुसार, बात 2013 की है जब अचानक से उनका वजन कम होने लगा। वजन की ये गिरावट 70 किलो से 42 किलो तक पहुंच गई। कमजोरी का अहसास होने पर इलाज के लिए ऊधमसिंह नगर जिले पहुंचे। एमआरआई परीक्षण के बाद नाक का ऑपरेशन हुआ। इसी दौरान बायोप्सी हुई, तो कैंसर का पता चला। इससे परिजन सकते में आ गए। जब सहारा देने वाले ही निराश हों जाएं तो मरीज की मुश्किलें बढ़ जाती हैं, पर दीपक ने हिम्मत नहीं हारी। बायोप्सी के बाद रीढ़, नाक और पेट में चतुर्थ अवस्था में कैंसर का पता चला। दिल्ली के राजीव गांधी कैंसर संस्थान में इलाज चला। 18 रेडियोथैरेपी और छह कीमियोथैरेपी हुई। एक साल से अधिक समय तक चले इलाज के बाद अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और पहले की तरह अपना कारोबार संभाल रहे हैं। दीपक का कहना है कि दवाओं के साथ खानपान में परहेज, योग व प्राणायाम के अलावा पत्नी, बहनोई और परिवार के तमाम सदस्यों ने कैंसर से लड़ने का जज्बा पैदा करने में मदद की।
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
लंबे समय से कोई बीमारी ठीक नहीं हो रही हो।
एकाएक वजन घटने लगे और भूख लगना कम हो जाए।
पेट और छाती में दर्द की वजह पता नहीं चल रही हो।
ऐसी समस्या होने पर कैंसर का फौरन परीक्षण कराना चाहिए।
काेट
शुरुआत में कैंसर का पता नहीं चलने पर इसके शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने का खतरा बढ़ जाता है। देरी से पता चलने पर इलाज भी कठिन हो जाता है। अलबत्ता लक्षणों को जानकर कैंसर की जांच के लिए बायोप्सी के जरिए सहजता से इसका पता लगाया जा सकता है। बायोप्सी में शरीर से कोशिकाएं या ऊतक निकालकर जांच की जाती है। पुरुष सबसे ज्यादा प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथी) व मुंह के कैंसर और महिलाएं गर्भाशय व स्तन कैंसर की जद में हैं। अब तंबाकू की बढ़ती लत से गाल और मुंह के कैंसर में भी इजाफा हो रहा है।
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- डा.आरके जोशी, मुख्य चिकित्साधीक्षक
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दीपक राय के अनुसार, बात 2013 की है जब अचानक से उनका वजन कम होने लगा। वजन की ये गिरावट 70 किलो से 42 किलो तक पहुंच गई। कमजोरी का अहसास होने पर इलाज के लिए ऊधमसिंह नगर जिले पहुंचे। एमआरआई परीक्षण के बाद नाक का ऑपरेशन हुआ। इसी दौरान बायोप्सी हुई, तो कैंसर का पता चला। इससे परिजन सकते में आ गए। जब सहारा देने वाले ही निराश हों जाएं तो मरीज की मुश्किलें बढ़ जाती हैं, पर दीपक ने हिम्मत नहीं हारी। बायोप्सी के बाद रीढ़, नाक और पेट में चतुर्थ अवस्था में कैंसर का पता चला। दिल्ली के राजीव गांधी कैंसर संस्थान में इलाज चला। 18 रेडियोथैरेपी और छह कीमियोथैरेपी हुई। एक साल से अधिक समय तक चले इलाज के बाद अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और पहले की तरह अपना कारोबार संभाल रहे हैं। दीपक का कहना है कि दवाओं के साथ खानपान में परहेज, योग व प्राणायाम के अलावा पत्नी, बहनोई और परिवार के तमाम सदस्यों ने कैंसर से लड़ने का जज्बा पैदा करने में मदद की।
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इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
लंबे समय से कोई बीमारी ठीक नहीं हो रही हो।
एकाएक वजन घटने लगे और भूख लगना कम हो जाए।
पेट और छाती में दर्द की वजह पता नहीं चल रही हो।
ऐसी समस्या होने पर कैंसर का फौरन परीक्षण कराना चाहिए।
काेट
शुरुआत में कैंसर का पता नहीं चलने पर इसके शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने का खतरा बढ़ जाता है। देरी से पता चलने पर इलाज भी कठिन हो जाता है। अलबत्ता लक्षणों को जानकर कैंसर की जांच के लिए बायोप्सी के जरिए सहजता से इसका पता लगाया जा सकता है। बायोप्सी में शरीर से कोशिकाएं या ऊतक निकालकर जांच की जाती है। पुरुष सबसे ज्यादा प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथी) व मुंह के कैंसर और महिलाएं गर्भाशय व स्तन कैंसर की जद में हैं। अब तंबाकू की बढ़ती लत से गाल और मुंह के कैंसर में भी इजाफा हो रहा है।
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- डा.आरके जोशी, मुख्य चिकित्साधीक्षक