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गौरा-महेश पर्व की धूम
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Mon, 28 Aug 2017 11:22 PM IST
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चंपावत में गौरा महेश की प्रतिमा को स्थापित करने को ले जाती महिला श्रद्घालु।
- फोटो : amar ujala
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जिला मुख्यालय के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों गौरा-महेश पर्व की धूम मची है। छतार, मादली सहित विभिन्न स्थानों में महिलाएं उपवास रखकर गौरा महेश की पूजा अर्चना कर रही हैं।
अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर में जिलों में हर साल भादो महीने की सप्तमी और अष्टमी को सातों-आठों पर्व को महिलाओं द्वारा बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है। इस पर्व में गांव घरों में उत्सव का माहौल रहता है। यह पर्व गौरा-महेश के विवाह के पश्चात पहली बार गौरा के अपने मायका आने की खुशी में मनाया जाता है। महिलाओं की ओर से गौरा महेश के चित्रों की साज सज्जा के साथ बाद उनकी शादी कराई जाती है। उनके सिरों पर मुकुट भी रखा जाता है। पूजा वाले स्थल पर रखा जाता है। फिर सभी महिलाएं हर्षोल्लास के साथ गौरा महेश के गीत गाती हैं।
आठों के दिन गौरा-महेश को विदा कर दिया जाता है। गौरा-महेश की विदाई के समय महिलाओं की आंखें भी नम होती हैं। उन्हें महिलाओं द्वारा अपनी बेटी और जमाई माना जाता है। गाजे-बाजे के साथ उन्हें विदाई दी जाती है। अगले वर्ष आने की आस लगाई जाती है। मान्यता है कि सातों-आठों का व्रत रखने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। दांपत्य जीवन सुखी होता है। वहां जानकी बिष्ट के आवास में विभा पांडेय, दीपा पांडेय, आशा खर्कवाल, नीमा, शांति पटवा, जया पांडेय, कविता वर्मा, ममता, पुष्पा गड़कोटी आदि महिलाओं ने सोमवार को गौरा-महेश की मूर्ति का निर्माण किया। इसका विसर्जन बुधवार को किया जाएगा।
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अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर में जिलों में हर साल भादो महीने की सप्तमी और अष्टमी को सातों-आठों पर्व को महिलाओं द्वारा बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है। इस पर्व में गांव घरों में उत्सव का माहौल रहता है। यह पर्व गौरा-महेश के विवाह के पश्चात पहली बार गौरा के अपने मायका आने की खुशी में मनाया जाता है। महिलाओं की ओर से गौरा महेश के चित्रों की साज सज्जा के साथ बाद उनकी शादी कराई जाती है। उनके सिरों पर मुकुट भी रखा जाता है। पूजा वाले स्थल पर रखा जाता है। फिर सभी महिलाएं हर्षोल्लास के साथ गौरा महेश के गीत गाती हैं।
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आठों के दिन गौरा-महेश को विदा कर दिया जाता है। गौरा-महेश की विदाई के समय महिलाओं की आंखें भी नम होती हैं। उन्हें महिलाओं द्वारा अपनी बेटी और जमाई माना जाता है। गाजे-बाजे के साथ उन्हें विदाई दी जाती है। अगले वर्ष आने की आस लगाई जाती है। मान्यता है कि सातों-आठों का व्रत रखने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। दांपत्य जीवन सुखी होता है। वहां जानकी बिष्ट के आवास में विभा पांडेय, दीपा पांडेय, आशा खर्कवाल, नीमा, शांति पटवा, जया पांडेय, कविता वर्मा, ममता, पुष्पा गड़कोटी आदि महिलाओं ने सोमवार को गौरा-महेश की मूर्ति का निर्माण किया। इसका विसर्जन बुधवार को किया जाएगा।
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