भारत-नेपाल विवाद: सीमा से सटे जंगलों में गश्त नहीं कर रही वन विभाग की टीम, उड़ाई गई अफवाह
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भारत-नेपाल सीमा सील होने से वन विभाग की टीम शारदा पार नेपाल सीमा से सटे जंगल में गश्त नहीं कर पा रही है। भारतीय वनाधिकारियों ने नेपाल पुलिस की ओर से भारतीय वन कर्मियों को गश्त से रोकने की खबर को अफवाह बताया।
शारदा रेंज के रेंजर महेश सिंह बिष्ट का कहना है कोरोना संकट के कारण भारत-नेपाल सीमा पांच माह से पूरी तरह सील है। ऐसे में हल्द्वानी वन प्रभाग की शारदा रेंज की टीम शारदा नदी पार नेपाल से सटी सीमा के जंगल की सुरक्षा के लिए गश्त पर नहीं जा पा रही है।
उन्होंने कहा कि वन कर्मियों को नेपाल पुलिस द्वारा गश्त पर जाने से रोकने की खबर पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर प्रशासन, सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने मामले की पड़ताल की तो सूचना गलत निकली।
नेपाल पुलिस ने भी खबर को गलत बताया
भारतीय वन कर्मियों को गश्त करने से रोके जाने की खबर को नेपाल पुलिस के अधिकारियों ने भी गलत बताया है। ब्रह्मदेव (नेपाल) के थाना इंचार्ज जनकराज जोशी का कहना है कि शारदा के इस पार अपने वन क्षेत्र में भारतीय वन विभाग की टीम कुछ समय पूर्व तक बेरोकटोक गश्त पर आ रही थी, लेकिन इन दिनों कम आ रही है। नेपाल पुलिस ने उन्हें कभी गश्त पर आने से नहीं रोका। नेपाल जिला पुलिस कार्यालय के पुलिस अधिकारी जीवन गुरूंग ने भी खबर को अफवाह बताया है।
नेपाल सीमा से लगे वन क्षेत्र में गश्त के लिए मांगी स्वचालित बोट
नेपाल के साथ विवाद के चलते वन कर्मी नेपाल के रास्ते से गश्त में नहीं जा रहे हैं। अभी गश्त नदी को ट्यूब और नाव से पार कर की जा रही है। डीएफओ हल्द्वानी ने गश्त के लिए शासन से स्वचालित बोट मांगी है।
वन विभाग का 50 से 60 हेक्टेयर में शारदा टापू फर्स्ट बीट का वन क्षेत्र फैला हुआ है। इस क्षेत्र में जाने और गश्त करने के लिए वन विभाग नेपाल सीमा से होकर जाता था। इस बीट में जाने का दूसरा रास्ता नदी को से है।
22 जुलाई को टनकपुर के पास स्थित ब्रह्मदेव में इंडो-नेपाल बॉर्डर के नोमैंस लैंड को लेकर विवाद सामने आया था। उसके बाद वन कर्मियों ने नेपाल सीमा से जाकर गश्त करना बंद कर दिया है। अब गश्त के लिए नाव और ट्यूब का साहरा लिया जा रहा है।
डीएफओ हल्द्वानी कुंदन कुमार ने शासन को पत्र लिखा है। पत्र में हवाला दिया गया है कि नेपाल सीमा से गश्त करने में दिक्कत आ रही हैं। ट्यूब और नाव से गश्त करने के दौरान वन कर्मियों का जान का खतरा बना हुआ है लिहाजा वन कर्मियों को गश्त के लिए स्वचालित बोट दी जाए।