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देवदार, चीड़ की बजाय लोहे के पाइप के उपयोग को किया प्रेरित
सतीश जोशी सत्तू/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 05 Jun 2016 09:27 PM IST
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लोहे के पाइप के उपयोग को किया प्रेरित
- फोटो : अमर उजाला
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वृक्ष मित्र पुरस्कार से सम्मानित पिथौरागढ़ जिले के निवासी कुंवर दामोदर राठौर से प्रेरित होकर सुंई वन पंचायत के सरपंच कैलाश तलनियां ने पर्यावरण को सहेजने की नई मुहिम चलाई है।
पहाड़ में जाड़ों के लिए सूखी घास को लकड़ी के खंभे पर बांधने का प्रचलन है। इसे लुटियास कहा जाता है। सामान्य रूप से लकड़ी के खंभे के लिए देवदार और अन्य पेड़ों की लकड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरपंच ने बाकायदा अभियान चलाकर लकड़ी के खंभे की बजाय लोहे के पाइप का उपयोग करने के लिए लोगों को प्रेरित किया। इस अभियान की सफलता पर जिले में ही हर साल दो हजार से अधिक पेड़ बच सकेंगे।
अपनी वन पंचायत से अभियान का श्रीगणेश करने वाले सरपंच ने दूसरे इलाकों में भी पशुपालकों को जागरूक किया है। अब लोग लुटियास में चीड़, देवदार पेड़ की बजाय लोहे के पाइप लगाने को प्रेरित हो रहे हैं। सरपंच का कहना है कि इससे हर साल सैकड़ों पेड़ कटने से बच सकेंगे। एक पेड़ से दो से तीन खंभे बनाए जाते हैं। इस तरह हर साल 1300 से 2000 तक पेड़ बच सकेंगे। सरपंच कैलाश का कहना है कि लुटियास के लिए लोहे के पाइप की व्यवस्था प्रशासन को मनरेगा आदि मदों से करनी चाहिए।
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पेड़ों की जगह लोहे के पाइपों का प्रयोग किया जाए तो इसका दोहरा लाभ मिलेगा। एक तो वनों का विनाश रुकेगा, दूसरी तरफ टिकाऊ होने की वजह से लोहे के पाइपों का प्रयोग कई सालों तक किया जा सकता है। रेंजर बीएम टम्टा भी सरपंच की इस मुहिम को बेहतरीन बता रहे हैं। उनका कहना है कि इस अभियान से पहाड़ी क्षेत्रों में लुटियास के नाम पर हर साल कटने वाले पेड़ों को इस मुहिम से बचाया जा सकेगा।
पहाड़ी क्षेत्रों में हर साल लुटियास के नाम पर सैकड़ों पेड़ काटे जाते हैं। औसतन पशुपालकों के एक परिवार को हर बार छह तक लुटियास की जरूरत होती है। उसके लिए पेड़ों को निशाना बनाया जाता है, जिसकी भरपाई नहीं हो पाती है। जागरूकता के इस अभियान को और बड़ा रूप दिया जाएगा।
- कैलाश तलनियां सरपंच, सुंई चंपावत।
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पहाड़ में जाड़ों के लिए सूखी घास को लकड़ी के खंभे पर बांधने का प्रचलन है। इसे लुटियास कहा जाता है। सामान्य रूप से लकड़ी के खंभे के लिए देवदार और अन्य पेड़ों की लकड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरपंच ने बाकायदा अभियान चलाकर लकड़ी के खंभे की बजाय लोहे के पाइप का उपयोग करने के लिए लोगों को प्रेरित किया। इस अभियान की सफलता पर जिले में ही हर साल दो हजार से अधिक पेड़ बच सकेंगे।
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अपनी वन पंचायत से अभियान का श्रीगणेश करने वाले सरपंच ने दूसरे इलाकों में भी पशुपालकों को जागरूक किया है। अब लोग लुटियास में चीड़, देवदार पेड़ की बजाय लोहे के पाइप लगाने को प्रेरित हो रहे हैं। सरपंच का कहना है कि इससे हर साल सैकड़ों पेड़ कटने से बच सकेंगे। एक पेड़ से दो से तीन खंभे बनाए जाते हैं। इस तरह हर साल 1300 से 2000 तक पेड़ बच सकेंगे। सरपंच कैलाश का कहना है कि लुटियास के लिए लोहे के पाइप की व्यवस्था प्रशासन को मनरेगा आदि मदों से करनी चाहिए।
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पेड़ों की जगह लोहे के पाइपों का प्रयोग किया जाए तो इसका दोहरा लाभ मिलेगा। एक तो वनों का विनाश रुकेगा, दूसरी तरफ टिकाऊ होने की वजह से लोहे के पाइपों का प्रयोग कई सालों तक किया जा सकता है। रेंजर बीएम टम्टा भी सरपंच की इस मुहिम को बेहतरीन बता रहे हैं। उनका कहना है कि इस अभियान से पहाड़ी क्षेत्रों में लुटियास के नाम पर हर साल कटने वाले पेड़ों को इस मुहिम से बचाया जा सकेगा।
पहाड़ी क्षेत्रों में हर साल लुटियास के नाम पर सैकड़ों पेड़ काटे जाते हैं। औसतन पशुपालकों के एक परिवार को हर बार छह तक लुटियास की जरूरत होती है। उसके लिए पेड़ों को निशाना बनाया जाता है, जिसकी भरपाई नहीं हो पाती है। जागरूकता के इस अभियान को और बड़ा रूप दिया जाएगा।
- कैलाश तलनियां सरपंच, सुंई चंपावत।