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कोरोना काल में खेती और पशुपालन से खुशहाल हो रहे गांव
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चंपावत जिले के दूरस्थ गांवों में इस तरह से आबाद किए जा रहे हैं बंजर खेत। फोटो:संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। जिले के पर्वतीय क्षेत्र के पशुपालकों के लिए अच्छी खबर है। पहाड़ी क्षेत्र में कोरोना संक्रमण के दौर में पशुपालन उद्यम खुशहाल हो रहा है। कोरोना महामारी के कारण बाहरी राज्यों और जिलों से प्रवासियों की घर वापसी के बाद जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में दुधारू पशुओं की डिमांड एकाएक बढ़ गई है। जिसकी वजह से कम दूध देने के कारण अब तक बेकद्री झेल रही स्थानीय नस्ल की बद्री गायों की कमी होने लगी है। पशुपालकों को दुधारू पशुओं को बिक्री करने पर खासा लाभ भी हो रहा है। वर्तमान में जहां स्थानीय नस्ल की दुधारू गायों की कीमत दस से 15 हजार रुपये तक पहुंच गई है। वहीं जर्सी, साहीवाल और अन्य प्रजाति की दुधारू गायों की कीमत 25 से 35 हजार रुपये के बीच पहुंच गई है।
दुग्ध संघ 335 व्यक्तियों को रोजगार से जोड़ेगा
चंपावत। जिले में दुग्ध संघ की ओर से समेकित सहकारी विकास योजना के तहत तीन पशुओं के दो सौ यूनिट व पांच पशुओं के 75 यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। गंगा गाय महिला डेयरी योजना के अंतर्गत बेसहरा महिलाओं को एक गाय क्रय करने के लिए 27 हजार रुपये की धनराशि दी जा रही है। दुग्ध संघ अध्यक्ष पार्वती देवी ने बताया कि इन योजनाओं से करीब 335 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
ढाई सौ हेक्टेयर बंजर भूमि को किया जा चुका है आबाद
लोहाघाट (चंपावत)। कोरोना महामारी की वजह से जिले में बाहरी राज्यों से आए प्रवासियों ने लॉकडाउन के दौरान लगभग ढाई सौ हेक्टेयर बंजर भूमि को आबाद किया गया है। जिसमें पांच सौ लोग इस कार्य में जुड़े है। अब खेतों को आबाद करने एवं पुराने मकानों की मरम्मत के कार्य भी शुरू हो रहे हैं। संवाद
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प्रवासियों एवं अन्य लोगों के माध्यम से मनरेगा के तहत बंजर खेतों को आबाद करने के प्रयास किए जा रहे है। जिला प्रशासन की ओर से ऐसी कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है, जिससे गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार देने की पहल की जा रही है।
- राजेंद्र उप्रेती, मुख्य कृषि अधिकारी, चंपावत।
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दुग्ध संघ 335 व्यक्तियों को रोजगार से जोड़ेगा
चंपावत। जिले में दुग्ध संघ की ओर से समेकित सहकारी विकास योजना के तहत तीन पशुओं के दो सौ यूनिट व पांच पशुओं के 75 यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। गंगा गाय महिला डेयरी योजना के अंतर्गत बेसहरा महिलाओं को एक गाय क्रय करने के लिए 27 हजार रुपये की धनराशि दी जा रही है। दुग्ध संघ अध्यक्ष पार्वती देवी ने बताया कि इन योजनाओं से करीब 335 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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ढाई सौ हेक्टेयर बंजर भूमि को किया जा चुका है आबाद
लोहाघाट (चंपावत)। कोरोना महामारी की वजह से जिले में बाहरी राज्यों से आए प्रवासियों ने लॉकडाउन के दौरान लगभग ढाई सौ हेक्टेयर बंजर भूमि को आबाद किया गया है। जिसमें पांच सौ लोग इस कार्य में जुड़े है। अब खेतों को आबाद करने एवं पुराने मकानों की मरम्मत के कार्य भी शुरू हो रहे हैं। संवाद
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प्रवासियों एवं अन्य लोगों के माध्यम से मनरेगा के तहत बंजर खेतों को आबाद करने के प्रयास किए जा रहे है। जिला प्रशासन की ओर से ऐसी कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है, जिससे गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार देने की पहल की जा रही है।
- राजेंद्र उप्रेती, मुख्य कृषि अधिकारी, चंपावत।