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मैटल डिटेक्टर से गोली खोजने के प्रयास
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
Updated Fri, 07 Apr 2017 09:20 PM IST
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मेटल डिटेक्टर से तेंदुए को मारी गई गोली को ढूंढते वन कर्मी।
- फोटो : अमर उजाला
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टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच पर घाट के पास तेंदुए की गोली मारकर हत्या करने वालों की खोजबीन में वन विभाग की टीम नाकाम रही है। वारदात के छह दिन बाद भी वन विभाग की टीम के हाथ कोई सबूत नहीं लग सका है। चंपावत स्थित एसएसबी की पंचम वाहिनी की सहायता लेकर तेंदुए को मारी गई गोली को मैटल डिटेक्टर से ढूंढने के वन विभाग के प्रयास भी सफल नहीं हुए।
तेंदुए को गोली मारने वालों के खिलाफ वन विभाग की ओर से की जाने वाली कार्रवाई की जानकारी चाहने पर लोहाघाट के उप प्रभागीय वनाधिकारी द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया, जबकि वन क्षेत्राधिकारी एनके पंत ने बताया कि आरोपियों की तलाश के लिए लगातार लोगों से संपर्क किया जा रहा है। बताया कि बौतड़ी क्षेत्र में एक व्यक्ति के पास राइफल और एक भरवा बंदूक है। पिथौरागढ़ में रहने वाले इन दोनों लोगों से पूछताछ की जा रही है।
वन क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में शुक्रवार को वन कर्मियों ने घटना स्थल पर एसएसबी के जवान की मदद से मैटल डिटेक्टर द्वारा राइफल से निकली गोली को खोजने का घंटों प्रयास किया, लेकिन टीम को निराशा ही हाथ लगी। घटना के छह दिनों बाद भी तेंदुए को मौत के घाट उतारने वाले शिकारियों का कोई पता न लगने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि आरोपियों का पता लगाने में वन विभाग की टीम की नाकामी से न केवल क्षेत्र से तेंदुओं का नामों निशान भी मिट जाएगा, बल्कि अपराधियों के हौसले भी बुलंद होंगे।
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तेंदुए को गोली मारने वालों के खिलाफ वन विभाग की ओर से की जाने वाली कार्रवाई की जानकारी चाहने पर लोहाघाट के उप प्रभागीय वनाधिकारी द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया, जबकि वन क्षेत्राधिकारी एनके पंत ने बताया कि आरोपियों की तलाश के लिए लगातार लोगों से संपर्क किया जा रहा है। बताया कि बौतड़ी क्षेत्र में एक व्यक्ति के पास राइफल और एक भरवा बंदूक है। पिथौरागढ़ में रहने वाले इन दोनों लोगों से पूछताछ की जा रही है।
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वन क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में शुक्रवार को वन कर्मियों ने घटना स्थल पर एसएसबी के जवान की मदद से मैटल डिटेक्टर द्वारा राइफल से निकली गोली को खोजने का घंटों प्रयास किया, लेकिन टीम को निराशा ही हाथ लगी। घटना के छह दिनों बाद भी तेंदुए को मौत के घाट उतारने वाले शिकारियों का कोई पता न लगने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि आरोपियों का पता लगाने में वन विभाग की टीम की नाकामी से न केवल क्षेत्र से तेंदुओं का नामों निशान भी मिट जाएगा, बल्कि अपराधियों के हौसले भी बुलंद होंगे।
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