ई-लर्निंग से दूर होगा फासला : प्रो.धामी
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कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति डा. होशियार सिंह धामी ने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी का ई-लर्निंग ही नहीं सामाजिक विकास में योगदान लगातार बढ़ रहा है। हिमालय वाटर सर्विस तथा विकास एवं पर्यावरण संरक्षण समिति (हिमवत्स) की ओर से डिजिटल प्रौद्योगिकी की ई-लर्निंक और सामाजिक विकास में भूमिका विषय पर जीजीआईसी सभागार में कार्यशाला हुई। कुलपति डा. धामी ने कहा कि वेबसाइट, एप्लीकेशन, कंप्यूटर इंफॉरमेशन टैक्नॉलोजी का उपयोग कर शिक्षण की नवीनतम विधा से रूबरू कराया जा सकता है। इसके उपयोग में दूरी भी कोई बाधा नहीं है।
जीबी पंत विश्वविद्यालय के पूर्व उप कुलपति और बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड साइंस के निदेशक डा.बीएस बिष्ट ने कहा कि ई-लर्निंग की बुनियादी अवधारणा बताई। तीर्थांकर महावीर विश्वविद्यालय मुरादाबाद के निदेशक प्रो.केके पांडेय ने मेसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज (एमओओसी) के जरिए ऑनलाइन पाठ्यक्रम, स्मार्ट कक्षाएं, जीपीएस, टैबलेट से कक्षा का संचालन आदि से रूबरू कराया।
आर्यभट्ट अनुसंधान संस्थान (एरीज) नैनीताल के पुरुषोत्तम जोशी, हरीश तिवारी ने स्लाइड के जरिए ग्रहों की जानकारी दी। दूरबीन के काम करने के तरीकों को भी बताया गया। डा.उमेश जोशी ने प्रदूषण रहित धरती और विकास के बीच समन्वय पर जोर दिया। डा.बीडी सुतेड़ी ने ई-लर्निंग को रिमोट एरिया के लिए बेहद फायदेमंद बताया।
बीडी फुलारा के संचालन में हुए कार्यक्रम में प्रो.सीएस मथेला, संस्था के सचिव जीबी बिष्ट, आरडी जोशी, जीबी रस्यारा, डा.जीबी बिष्ट, जीजीआईसी की प्रधानाचार्या हेमंती बोहरा, मुक्तेश पचौली, गोकुल तिवारी, ओम प्रकाश, अक्षय वर्मा, दीपक, रमका, चंद्रमोहन जोशी, प्रकाश पुनेठा, पूजा खाती, भुवन पुनेठा आदि ने सहयोग किया। इससे पूर्व स्कूली छात्राओं ने सरस्वती वंदना और सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया।
साविद्या का हुआ विमोचन
साविद्या पुस्तिका का विमोचन हुआ। डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी, गोविंद बल्लभ पंत विश्वविद्यालय के पूर्व उप कुलपति डा.वीएस बिष्ट, प्रो.केके पांडेय, हरीश तिवारी, पुरुषोत्तम जोशी, डा.उमेश जोशी ने साविद्या किताब का विमोचन किया। हिमवत्स के संपादक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के रिटायर्ड प्रोफेसर डा.एचडी बिष्ट और डा.जीबी बिष्ट ने बताया कि साविद्या के 2016 के अंक में शैक्षिक और पर्यावरण से संबंधित विभिन्न क्रियाकलापों की जानकारी दी गई है। यह वार्षिक पत्रिका 2007 से शुरू की गई।