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सड़क सुविधा के अभाव से गांव छोड़ना बना मजबूरी
अमर उजाला ब्यूरो, लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:38 PM IST
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पलायन के बाद लोहाघाट के सुदूर मड गांव में वीरान पड़ा मकान।
- फोटो : अमर उजाला
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राज्य बनने बाद से अब तक लोहाघाट विकासखंड के पांच गांवों में से 131 परिवारों ने गांव से नाता तोड़ दिया है। इन परिवारों के गांवों से पलायन करने की मुख्य वजह इन गांवों में सड़क सुविधा का न होना है। लोगों का कहना है कि सड़क नहीं होने से लोगों को यातायात के साथ-साथ दूसरी जरूरी सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ा है।
लोहाघाट ब्लॉक के मड़, नूंघर, डगला, कुंदड़ी, पड़ौश गांव के लोग सड़क सुविधा न होने से परेशान हैं। इन गांवों के लोगों को सड़क तक पहुंचने के लिए क्वैराली खीड़ी बैंड (लोहाघाट-पंचेश्वर मोटर मार्ग) 1.5 किलोमीटर से 5 किलोमीटर तक की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने से ये गांव विकास से कटे हुए हैं। सड़क समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव से इन गांवों के लोग तेजी से अन्यत्र बसते जा रहे हैं। नतीजतन गांव में बने मकान खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। पहले इन गांवों के 190 परिवार रहते थे।
अब इन परिवारों की संख्या सिमटकर 59 रह गई है। राज्य बनने के बाद से अब तक यहां से 131 परिवार लोहाघाट, चंपावत, बनबसा, खटीमा, सितारगंज, रुद्रपुर, काशीपुर, नानकमत्ता, दिल्ली, हरिद्वार, लखनऊ, देहरादून, हल्द्वानी आदि नगरीय क्षेत्रों में चले गए हैं। वजह इन गांवों में न हाइस्कूल हैं, न अस्पताल। गांव में यदि कोई अचानक बीमार पड़ जाता है तो उसे उपचार के लिए पहले गांव से खीड़ी तक डोली में पड़ता है। इसके बाद के 18 किलोमीटर सड़क मार्ग से लोहाघाट लाना होता है।
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गांव के लोग बताते हैं कि तीन साल पहले सड़क के लिए सर्वे हुआ था। मामला अभी सर्वे में अटका हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि क्वैराली खीड़ी बैंड से पांच किमी सड़क बन जाए तो लोगों को कई परेशानियों से निजात मिल जाएगी। इधर लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता बीसी पंत का कहना है कि इस रूट पर फिलहाल सड़क का कोई प्रस्ताव नहीं है।
मड़, नूंघर, डगला, कुंदड़ी, पड़ौश गांवों से राज्य बनने
के बाद पलायन कर चुके परिवारों का ब्यौरा
गांव पलायन कर चुके परिवार
मड़ 80
नूंघर 15
डगला 18
कुंदड़ी 15
पड़ौश 07
बेमानी है विकास
ग्रामीण शंकर दत्त पांडेय का कहना है कि सड़क की कमी ने यहां के गांवों को और पीछे कर दिया है। सड़क की कमी पढ़ाई से लेकर इलाज तक में आड़े आ रही है। नतीजा तेजी से पलायन हो रहा है।
पैदावार पर पड़ी मार
जगदीश चंद्र का कहना है कि इन गांवों में माल्टा, संतरा, अमरूद, केला फलों के अलावा अदरक, शिमला मिर्च आदि का खूब उत्पादन होता था, लेकिन सड़क सुविधा नहीं होने से उनकी उपज बर्बाद होती रही और दाम नहीं मिलने से अब लोगों ने खेतों में मेहनत करना कम कर दिया है।
बीमारों के लिए डोली की मजबूरी
खिलानंद जोशी का कहना है कि गांवों के लिए सड़क सुविधा नहीं होने से बीमार, वृद्धों और गर्भवती महिलाओं को सड़क तक लाने में दुर्गम रास्तों से लंबा सफर तय करना पड़ता है। बीमार लोगों को डोली में लाने की मजबूरी होती है।
सामग्री के ढुलान में खर्च हो रही दोगुना खर्च
हयात नाथ का कहना है कि सड़क बनने से पलायन पर रोक लगेगी। साथ ही ग्रामीण दोबारा खेती भी शुरू कर सकेंगे। इस वक्त मकान बनाने की सामग्री में ढुलान में सामान से दोगुनी रकम खर्च हो जाती है।
लोहाघाट ब्लॉक के मड़, नूंघर, डगला, कुंदड़ी, पड़ौश गांव के लोग सड़क सुविधा न होने से परेशान हैं। इन गांवों के लोगों को सड़क तक पहुंचने के लिए क्वैराली खीड़ी बैंड (लोहाघाट-पंचेश्वर मोटर मार्ग) 1.5 किलोमीटर से 5 किलोमीटर तक की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने से ये गांव विकास से कटे हुए हैं। सड़क समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव से इन गांवों के लोग तेजी से अन्यत्र बसते जा रहे हैं। नतीजतन गांव में बने मकान खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। पहले इन गांवों के 190 परिवार रहते थे।
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अब इन परिवारों की संख्या सिमटकर 59 रह गई है। राज्य बनने के बाद से अब तक यहां से 131 परिवार लोहाघाट, चंपावत, बनबसा, खटीमा, सितारगंज, रुद्रपुर, काशीपुर, नानकमत्ता, दिल्ली, हरिद्वार, लखनऊ, देहरादून, हल्द्वानी आदि नगरीय क्षेत्रों में चले गए हैं। वजह इन गांवों में न हाइस्कूल हैं, न अस्पताल। गांव में यदि कोई अचानक बीमार पड़ जाता है तो उसे उपचार के लिए पहले गांव से खीड़ी तक डोली में पड़ता है। इसके बाद के 18 किलोमीटर सड़क मार्ग से लोहाघाट लाना होता है।
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गांव के लोग बताते हैं कि तीन साल पहले सड़क के लिए सर्वे हुआ था। मामला अभी सर्वे में अटका हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि क्वैराली खीड़ी बैंड से पांच किमी सड़क बन जाए तो लोगों को कई परेशानियों से निजात मिल जाएगी। इधर लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता बीसी पंत का कहना है कि इस रूट पर फिलहाल सड़क का कोई प्रस्ताव नहीं है।
मड़, नूंघर, डगला, कुंदड़ी, पड़ौश गांवों से राज्य बनने
के बाद पलायन कर चुके परिवारों का ब्यौरा
गांव पलायन कर चुके परिवार
मड़ 80
नूंघर 15
डगला 18
कुंदड़ी 15
पड़ौश 07
बेमानी है विकास
ग्रामीण शंकर दत्त पांडेय का कहना है कि सड़क की कमी ने यहां के गांवों को और पीछे कर दिया है। सड़क की कमी पढ़ाई से लेकर इलाज तक में आड़े आ रही है। नतीजा तेजी से पलायन हो रहा है।
पैदावार पर पड़ी मार
जगदीश चंद्र का कहना है कि इन गांवों में माल्टा, संतरा, अमरूद, केला फलों के अलावा अदरक, शिमला मिर्च आदि का खूब उत्पादन होता था, लेकिन सड़क सुविधा नहीं होने से उनकी उपज बर्बाद होती रही और दाम नहीं मिलने से अब लोगों ने खेतों में मेहनत करना कम कर दिया है।
बीमारों के लिए डोली की मजबूरी
खिलानंद जोशी का कहना है कि गांवों के लिए सड़क सुविधा नहीं होने से बीमार, वृद्धों और गर्भवती महिलाओं को सड़क तक लाने में दुर्गम रास्तों से लंबा सफर तय करना पड़ता है। बीमार लोगों को डोली में लाने की मजबूरी होती है।
सामग्री के ढुलान में खर्च हो रही दोगुना खर्च
हयात नाथ का कहना है कि सड़क बनने से पलायन पर रोक लगेगी। साथ ही ग्रामीण दोबारा खेती भी शुरू कर सकेंगे। इस वक्त मकान बनाने की सामग्री में ढुलान में सामान से दोगुनी रकम खर्च हो जाती है।