फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Dry farm in Champawat

तो क्या चंपावत में नहीं पड़ा सूखा...

Thu, 28 Apr 2016 11:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। Updated Thu, 28 Apr 2016 11:43 PM IST
विज्ञापन
Dry farm in Champawat
चंपावत में सूखा खेत - फोटो : अमर उजाला

चंपावत। कृषि विभाग ने प्रदेश में पांच जिलों में सूखे का संकट माना है। इसे लेकर कृषि निदेशालय ने शासन को रिपोर्ट भेजी है लेकिन इस रिपोर्ट में चंपावत जिले का नाम गायब है, जबकि कृषि विभाग की ओर से जिले में 35 प्रतिशत सूखे की रिपोर्ट भेजी गई है। कृषि निदेशालय द्वारा शासन को भेजी गई सूखाग्रस्त जिलों की रिपोर्ट में चंपावत जिले का नाम नहीं है जबकि कुमाऊं के पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल, गढ़वाल मंडल में पौड़ी और रुद्रप्रयाग जिले में 33 प्रतिशत से अधिक (67097 हेक्टेयर) फसल की तबाही का जिक्र किया गया है।

विज्ञापन


मुख्य कृषि अधिकारी आरएल चंद्रवाल ने बताया कि चंपावत जिले में 10077 हेक्टेयर में से 3527 हेक्टेयर (35.0004 प्रतिशत) क्षेत्र सूखे की चपेट में आया है। इस रिपोर्ट को यहां से मुख्यालय भेजा भी गया। इसके बावजूद इस जिले को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है। सूखे से किसानों की फसल बर्बाद हो चुकी है। इसके बावजूद जिले को सूखाग्रस्त घोषित न करने से उन्हें कई तरह से नुकसान झेलना पड़ेगा। सूखाग्रस्त घोषित करने के बाद राजस्व वसूली पर रोक लगाई जाती है लेकिन वर्तमान स्थिति में चंपावत को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल सकेगा।
विज्ञापन


इस साल जाड़े में कम बारिश होने से रबी की फसल घटी है। कृषि विभाग का कहना है कि जनवरी में चार मिमी, फरवरी में 11, मार्च में शून्य, अप्रैल में नौ एमएम बारिश हुई है। यानि चार महीने में महज 24 एमएम बारिश हुई, जबकि इस अवधि में औसत बारिश 151 एमएम होनी चाहिए थी। 2015 में इन चार महीनों में 203 मिलीमीटर बारिश हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन


चंपावत। किसानों का कहना है कि पहाड़ में गेहूं की ज्यादातर फसल बर्बाद हो गई। आलू की बुवाई पर संकट है। किसान पुष्कर सिंह, त्रिलोक, रमेश जोशी, सुरेश पांडेय, खिलानंद, नाथ सिंह आदि का कहना है कि चौतरफा मार के बावजूद जिले को सूखाग्रस्त घोषित न करना नाइंसाफी है, जबकि खेती समेत पशुचारे, पशुपालन पर भी बुरा असर पड़ा है।



चंपावत। भाजपा के जिलाध्यक्ष हिमेश कलखुड़िया ने बृहस्पतिवार को राज्यपाल को ज्ञापन भेजा। बताया कि जिले में बेहद कम बारिश हुई है। बारिश की कमी से तमाम फसलें बर्बादी के कगार पर है, इसके बावजूद चंपावत जिले को प्रदेश के पांच अन्य जिलों की तरह सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है, जो इस जिले के साथ नाइंसाफी है। पार्टी ने यहां के हालात को देखते हुए सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed