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चुनौतियों के बीच मरीजों के दर्द को दूर कर रहे डॉक्टर
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चंपावत जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी।
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। दंत सर्जन डॉ. शोभित तिवारी के लिए मरीजों के दांतों को सेहतमंद रखना ड्यूटी का हिस्सा नहीं बल्कि जुनून है। इस काम के चलते अक्सर उन्हें जिला अस्पताल की ओपीडी (वाह्यरोगी विभाग) के निर्धारित समय से देर तक काम करने में कोई गुरेज नहीं है।
डॉ. तिवारी बताते हैं कि हर माह करीब 900 लोगों में से 400 के दांतों को निकालने या ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है। ऐसे में घड़ी देखकर काम करना संभव नहीं होता है। इस काम की वजह से अक्सर मरीजों को ओपीडी के निर्धारित वक्त से एक-दो घंटे अतिरिक्त समय देना पड़ता है। पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी का कहना है कि जिला अस्पताल का दंतरोग विभाग बेहतरीन काम कर रहा है।
दांतों को मजबूत रखना आमतौर पर लोगों की प्राथमिकता में नहीं होता है। दांत में असहनीय दर्द होने के बाद ही ज्यादातर लोग अस्पताल का रुख करते हैं। यहीं से समस्या शुरू होती है। अस्पताल पहुंचते पहुंचते दांतों को बचाना बड़ी चुनौती बनता है। चंपावत जिला अस्पताल में साढ़े तीन साल के अनुभव के आधार पर दंत सर्जन डॉ. शोभित तिवारी बताते हैं कि दांतों की सेहत को लेकर लोग कोताही बरतते हैं। इस वजह से अस्पताल आने वाले 40 प्रतिशत लोगों के दांतों को निकालने का विकल्प बचा रहता है। 30 प्रतिशत लोगों की हालत तो सर्जरी के जरिए दांतों को ठीक करने वाली रहती है।
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प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ मरीजों की भी सुध ले रहे पीएमएस डॉ. ऐरी
चंपावत। डॉ. एचएस ऐरी जिले के सबसे बड़े अस्पताल के पीएमएस (प्रमुख चिकित्साधीक्षक) ही नहीं है बल्कि मरीजों के दुखदर्द के भागीदार भी हैं।
डॉ. आरके जोशी की सेवानिवृत्ति के बाद एक सितंबर 2021 से अस्पताल की बागडोर संभालने वाले डॉ. ऐरी प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने के साथ चिकित्सक के सेवाधर्म को भी निभा रहे हैं। जिला अस्पताल में अकेले अस्थिरोग विशेषज्ञ होने की वजह से वे हड्डियों की दिक्कत वाले रोगियों के लिए भी मददगार बने हुए हैं।
डॉ. ऐरी आमतौर पर सुबह के वक्त इलाज करते हैं और फिर दोपहर बाद अस्पताल के रोजमर्रा के काम को निपटाते हैं। हर दिन प्लास्टर करने से लेकर हड्डी की दिक्कत से जुड़े इलाज तक में चार घंटे से अधिक समय लगाते हैं। प्रशासनिक काम के साथ ही आकस्मिक और ओपीडी सेवाओं पर निगरानी रखना उनका रोज का काम है। प्रभारी सीएमओ डॉ. इंद्रजीत पांडेय कहते हैं कि पीएमएस डॉ. ऐरी हर जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहे हैं।
सामान्य डॉक्टर ज्यादा लेकिन विशेषज्ञों की कमी
चंपावत जिले में न्यूरो सर्जन, हृदयरोग विशेषज्ञ, चर्म रोग, प्लास्टिक सर्जन जिले में एक भी नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की काफी जरूरत है लेकिन कोरोना काल के बाद हालात में कुछ सकारात्मक बदलाव भी हुआ है।
एक साल में डॉक्टरों के कुल सृजित पदों के सापेक्ष तैनाती तो हो गई है, फिर भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर नहीं हो सकी है। चंपावत जिले में विशेषज्ञों सहित डॉक्टरों के कुल 111 पद सृजित हैं। अनुबंध वाले डॉक्टरों सहित चंपावत जिले में कुल 122 डॉक्टर हैं।
एसीएमओ डॉ. इंद्रजीत पांडेय के मुताबिक 77 स्थायी और 45 अनुबंध वाले डॉक्टर हैं। जिले में कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। एक भी न्यूरो सर्जन, हृदयरोग विशेषज्ञ, चर्म रोग, प्लास्टिक सर्जन नहीं है। इसके बावजूद कई डॉक्टर बेहतरीन सेवा देकर मरीजों की सेहत संवार रहे हैं और लोगों का दिल भी जीत रहे हैं।
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डॉ. तिवारी बताते हैं कि हर माह करीब 900 लोगों में से 400 के दांतों को निकालने या ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है। ऐसे में घड़ी देखकर काम करना संभव नहीं होता है। इस काम की वजह से अक्सर मरीजों को ओपीडी के निर्धारित वक्त से एक-दो घंटे अतिरिक्त समय देना पड़ता है। पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी का कहना है कि जिला अस्पताल का दंतरोग विभाग बेहतरीन काम कर रहा है।
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दांतों को मजबूत रखना आमतौर पर लोगों की प्राथमिकता में नहीं होता है। दांत में असहनीय दर्द होने के बाद ही ज्यादातर लोग अस्पताल का रुख करते हैं। यहीं से समस्या शुरू होती है। अस्पताल पहुंचते पहुंचते दांतों को बचाना बड़ी चुनौती बनता है। चंपावत जिला अस्पताल में साढ़े तीन साल के अनुभव के आधार पर दंत सर्जन डॉ. शोभित तिवारी बताते हैं कि दांतों की सेहत को लेकर लोग कोताही बरतते हैं। इस वजह से अस्पताल आने वाले 40 प्रतिशत लोगों के दांतों को निकालने का विकल्प बचा रहता है। 30 प्रतिशत लोगों की हालत तो सर्जरी के जरिए दांतों को ठीक करने वाली रहती है।
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प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ मरीजों की भी सुध ले रहे पीएमएस डॉ. ऐरी
चंपावत। डॉ. एचएस ऐरी जिले के सबसे बड़े अस्पताल के पीएमएस (प्रमुख चिकित्साधीक्षक) ही नहीं है बल्कि मरीजों के दुखदर्द के भागीदार भी हैं।
डॉ. आरके जोशी की सेवानिवृत्ति के बाद एक सितंबर 2021 से अस्पताल की बागडोर संभालने वाले डॉ. ऐरी प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने के साथ चिकित्सक के सेवाधर्म को भी निभा रहे हैं। जिला अस्पताल में अकेले अस्थिरोग विशेषज्ञ होने की वजह से वे हड्डियों की दिक्कत वाले रोगियों के लिए भी मददगार बने हुए हैं।
डॉ. ऐरी आमतौर पर सुबह के वक्त इलाज करते हैं और फिर दोपहर बाद अस्पताल के रोजमर्रा के काम को निपटाते हैं। हर दिन प्लास्टर करने से लेकर हड्डी की दिक्कत से जुड़े इलाज तक में चार घंटे से अधिक समय लगाते हैं। प्रशासनिक काम के साथ ही आकस्मिक और ओपीडी सेवाओं पर निगरानी रखना उनका रोज का काम है। प्रभारी सीएमओ डॉ. इंद्रजीत पांडेय कहते हैं कि पीएमएस डॉ. ऐरी हर जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहे हैं।
सामान्य डॉक्टर ज्यादा लेकिन विशेषज्ञों की कमी
चंपावत जिले में न्यूरो सर्जन, हृदयरोग विशेषज्ञ, चर्म रोग, प्लास्टिक सर्जन जिले में एक भी नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की काफी जरूरत है लेकिन कोरोना काल के बाद हालात में कुछ सकारात्मक बदलाव भी हुआ है।
एक साल में डॉक्टरों के कुल सृजित पदों के सापेक्ष तैनाती तो हो गई है, फिर भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर नहीं हो सकी है। चंपावत जिले में विशेषज्ञों सहित डॉक्टरों के कुल 111 पद सृजित हैं। अनुबंध वाले डॉक्टरों सहित चंपावत जिले में कुल 122 डॉक्टर हैं।
एसीएमओ डॉ. इंद्रजीत पांडेय के मुताबिक 77 स्थायी और 45 अनुबंध वाले डॉक्टर हैं। जिले में कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। एक भी न्यूरो सर्जन, हृदयरोग विशेषज्ञ, चर्म रोग, प्लास्टिक सर्जन नहीं है। इसके बावजूद कई डॉक्टर बेहतरीन सेवा देकर मरीजों की सेहत संवार रहे हैं और लोगों का दिल भी जीत रहे हैं।

डॉ. शोभित तिवारी। संवाद- फोटो : CHAMPAWAT