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डॉक्टरों ने महिला पर लगाया अभद्रता का आरोप
Thu, 25 Apr 2019 10:41 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन
अमर उजाला ब्यूूराे चंपावत
अमर उजाला ब्यूूराे चंपावत
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Thu, 25 Apr 2019 10:41 PM IST
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चंपावत कोतवाली में कोतवाल धीरेंद्र कुमार को तहरीर देतें जिला अस्पताल के डॉक्टर।
- फोटो : अमर उजाला
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जिला अस्पताल (डीएच) में आई एक गर्भवती महिला के साथ आईं उनकी रिश्ेतदार पर ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों के साथ अभद्रता करने और काम में बाधा डालने का आरोप लगा है। महिला डॉक्टरों को यह बात इस कदर नागवार गुजरी कि उन्होंने कोतवाली पहुंच आरोपी महिला के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। बाद में आरोपी महिला की ओर से खेद जताने पर मामला शांत हुआ।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक बुधवार शाम को चंपावत से सात किमी दूर दुधपोखरा गांव की गर्भवती महिला कमला देवी (19) पत्नी संजय टम्टा दर्द से कराहते हुए डीएच पहुंचीं। डॉक्टरों का कहना है कि कमला देवी के गर्भ में पल रहा शिशु प्री-मैच्युर था। जटिल प्रसव के चलते डॉक्टरों ने गर्भवती के तीमारदारों से कंसेंट लेटर लिख कर देने को कहा। जिस पर लिखित में देने पर हीलाहवाली की गई। कंसेंट लटर नहीं देने पर केस को रेफर करने की मजबूरी जताई। केस को रेफर करने की बात सुन संजय की ताई जानकी देवी भड़क गई। डॉक्टरों का आरोप है कि जानकी ने उनके काम में व्यवधान डालने के साथ बदसलूकी भी की।
महिला डॉक्टरों ने किसी तरह कमला का सुरक्षित प्रसव कराया। शिशु का वजन भी महज दो किलो है। ऐसे में स्त्री रोग विशेषज्ञ के नहीं होने से प्रसव कराना बेहद जोखिम भरा था। सुरक्षित प्रसव कराने के बाद डॉ.श्वेता खर्कवाल, डॉ.वर्षा रानी और डॉ.विदुषी शर्मा दो अन्य डॉक्टर वैंकटेश द्विवेदी तथा डॉ.प्रदीप शर्मा के साथ ने कोतवाली पहुंच तहरीर दी और जानकी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अलबत्ता बाद में कोतवाल धीरेंद्र कुमार की मौजूदगी में महिला के खेद जताने पर मामला शांत हुआ। जानकी का कहना था कि उन्होंने अभद्रता नहीं की, बल्कि रेफर करने की धमकी पर आक्रोश था।
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कोट
स्त्री रोग विशेषज्ञ यानी गायनाकोलॉजिस्ट नहीं होने के बावजूद डॉक्टरों द्वारा जोखिम उठाकर जटिल प्रसव भी कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद कुछ समय से अस्पताल में कई मरीजों के तीमारदारों द्वारा डॉक्टरों से अभद्रता की गई है। लगातार हो रही इस तरह की घटनाओं से नाराज महिला डॉक्टरों ने कोतवाली में तहरीर दी। इस कार्रवाई की मंशा आगे से ऐसी हरकतों को रोकना है। डॉ.आरके जोशी मुख्य चिकित्साधीक्षक। (25 सीपीटी 09पी)
इनसेट
एक गायनाकोलोजिस्ट को तरस गया चंपावत जिला
चंपावत जिले में छोटे-बड़े कुल 23 सरकारी अस्पताल हैं, लेकिन किसी भी अस्पताल में एक भी गायनाकोलोजिस्ट नहीं है। अस्पताल प्रशासन द्वारा गायनोकोलॉजिस्ट के लिए हर महीने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजे जाने के बावजूद नियुक्ति नहीं हुई। सुविधाओं की कमी के चलते अस्पताल के एक कर्मी की पत्नी को भी 2017 में एक निजी अस्पताल में प्रसव कराना पड़ा था।
चंपावत जिले के रेफरल केस
वर्ष कुल गर्भवती केस अस्पताल में प्रसव रेफरल केस
2018: 519 444 75
2019 मार्च तक 41 37 04
बहू को रेफर करने से आहत थी जानकी देवी
चंपावत। बुधवार रात जिला अस्पताल में डॉक्टरों के साथ हुई अभद्रता की घटना डॉक्टरों और मरीजों के कम होते भरोसे का नतीजा है। मौजूदा घटना में भी अभद्रता की आरोपी महिला एक रेफरल केस की भुक्तभोगी थी। जिसके चलते यह महिला अस्पताल और सरकारी व्यवस्था पर आसानी से भरोसा नहीं कर सकी।
दुधपोखरा की बुजुर्ग महिला जानकी का जिला अस्पताल के डॉक्टरों से बदसलूकी करने की कोई मंशा नहीं थी, मगर कंसेंट लेटर देने पर रेफर करने की बात सुनकर वह एकाएक आपा खो बैठी। जानकी की गर्भवती बहू पूजा पत्नी प्रमोद मार्च महीने में जिला अस्पताल आई थी। जांच के बाद अस्पताल ने गर्भ में पल रहे चार माह के शिशु के सिर में दिक्कत बताई थी। डरे सहमे परिजन गर्भवती को लेकर सीधे दिल्ली पहुंचे। परिजनों का कहना है कि दिल्ली के अस्पताल की रिपोर्ट में गर्भ में पल रहे शिशु के सिर में किसी तरह की दिक्कत न होने की बात सामने आई। वहीं सीएमएस डॉ.आरके जोशी का कहना है कि पूरे प्रकरण की विस्त्रित जांच के बगैर कुछ कहना संभव नहीं है।
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प्राप्त जानकारी के मुताबिक बुधवार शाम को चंपावत से सात किमी दूर दुधपोखरा गांव की गर्भवती महिला कमला देवी (19) पत्नी संजय टम्टा दर्द से कराहते हुए डीएच पहुंचीं। डॉक्टरों का कहना है कि कमला देवी के गर्भ में पल रहा शिशु प्री-मैच्युर था। जटिल प्रसव के चलते डॉक्टरों ने गर्भवती के तीमारदारों से कंसेंट लेटर लिख कर देने को कहा। जिस पर लिखित में देने पर हीलाहवाली की गई। कंसेंट लटर नहीं देने पर केस को रेफर करने की मजबूरी जताई। केस को रेफर करने की बात सुन संजय की ताई जानकी देवी भड़क गई। डॉक्टरों का आरोप है कि जानकी ने उनके काम में व्यवधान डालने के साथ बदसलूकी भी की।
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महिला डॉक्टरों ने किसी तरह कमला का सुरक्षित प्रसव कराया। शिशु का वजन भी महज दो किलो है। ऐसे में स्त्री रोग विशेषज्ञ के नहीं होने से प्रसव कराना बेहद जोखिम भरा था। सुरक्षित प्रसव कराने के बाद डॉ.श्वेता खर्कवाल, डॉ.वर्षा रानी और डॉ.विदुषी शर्मा दो अन्य डॉक्टर वैंकटेश द्विवेदी तथा डॉ.प्रदीप शर्मा के साथ ने कोतवाली पहुंच तहरीर दी और जानकी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अलबत्ता बाद में कोतवाल धीरेंद्र कुमार की मौजूदगी में महिला के खेद जताने पर मामला शांत हुआ। जानकी का कहना था कि उन्होंने अभद्रता नहीं की, बल्कि रेफर करने की धमकी पर आक्रोश था।
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स्त्री रोग विशेषज्ञ यानी गायनाकोलॉजिस्ट नहीं होने के बावजूद डॉक्टरों द्वारा जोखिम उठाकर जटिल प्रसव भी कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद कुछ समय से अस्पताल में कई मरीजों के तीमारदारों द्वारा डॉक्टरों से अभद्रता की गई है। लगातार हो रही इस तरह की घटनाओं से नाराज महिला डॉक्टरों ने कोतवाली में तहरीर दी। इस कार्रवाई की मंशा आगे से ऐसी हरकतों को रोकना है। डॉ.आरके जोशी मुख्य चिकित्साधीक्षक। (25 सीपीटी 09पी)
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एक गायनाकोलोजिस्ट को तरस गया चंपावत जिला
चंपावत जिले में छोटे-बड़े कुल 23 सरकारी अस्पताल हैं, लेकिन किसी भी अस्पताल में एक भी गायनाकोलोजिस्ट नहीं है। अस्पताल प्रशासन द्वारा गायनोकोलॉजिस्ट के लिए हर महीने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजे जाने के बावजूद नियुक्ति नहीं हुई। सुविधाओं की कमी के चलते अस्पताल के एक कर्मी की पत्नी को भी 2017 में एक निजी अस्पताल में प्रसव कराना पड़ा था।
चंपावत जिले के रेफरल केस
वर्ष कुल गर्भवती केस अस्पताल में प्रसव रेफरल केस
2018: 519 444 75
2019 मार्च तक 41 37 04
बहू को रेफर करने से आहत थी जानकी देवी
चंपावत। बुधवार रात जिला अस्पताल में डॉक्टरों के साथ हुई अभद्रता की घटना डॉक्टरों और मरीजों के कम होते भरोसे का नतीजा है। मौजूदा घटना में भी अभद्रता की आरोपी महिला एक रेफरल केस की भुक्तभोगी थी। जिसके चलते यह महिला अस्पताल और सरकारी व्यवस्था पर आसानी से भरोसा नहीं कर सकी।
दुधपोखरा की बुजुर्ग महिला जानकी का जिला अस्पताल के डॉक्टरों से बदसलूकी करने की कोई मंशा नहीं थी, मगर कंसेंट लेटर देने पर रेफर करने की बात सुनकर वह एकाएक आपा खो बैठी। जानकी की गर्भवती बहू पूजा पत्नी प्रमोद मार्च महीने में जिला अस्पताल आई थी। जांच के बाद अस्पताल ने गर्भ में पल रहे चार माह के शिशु के सिर में दिक्कत बताई थी। डरे सहमे परिजन गर्भवती को लेकर सीधे दिल्ली पहुंचे। परिजनों का कहना है कि दिल्ली के अस्पताल की रिपोर्ट में गर्भ में पल रहे शिशु के सिर में किसी तरह की दिक्कत न होने की बात सामने आई। वहीं सीएमएस डॉ.आरके जोशी का कहना है कि पूरे प्रकरण की विस्त्रित जांच के बगैर कुछ कहना संभव नहीं है।