फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Diwali festival is not an illusion to date

दिवाली पर्व की तिथि में नहीं है कोई भ्रम

Sun, 08 Nov 2015 10:17 PM IST
योगेश जोशी/अमर उजाला, चंपावत
योगेश जोशी/अमर उजाला, चंपावत Updated Sun, 08 Nov 2015 10:17 PM IST
विज्ञापन

इस बार दिवाली पर्व मनाने की तिथि में किसी तरह का कोई भ्रम नहीं है। धनतेरस हो या फिर भैया दूज, इन सभी पर्वों को मनाने की तिथि की घड़ी और पला में किसी तरह का अंतर नहीं है। इस बार दिवाली पर्व चाहे मैदान में हो या पहाड़ सभी जगह एक ही दिन मनेगा। इससे पहले कई बार पहाड़ और मैदान में दिवाली ही नहीं, बल्कि होली पर्व भी अलग-अलग तारीख को मनाई जाती रही है।

विज्ञापन


अलग-अलग पंचांगों की मान्यता से पड़ता है फर्क
ज्योतिष सतीश जोशी ने बताया कि पहाड़ों में रामदत्त जोशी के पंचांग की मान्यता है, जबकि मैदानी क्षेत्र में भाष्कर पंचांग का चलन है। दोनों पंचांगों की गणना में घड़ी और पला में अंतर का होना बड़ा फर्क पैदा कर देता है, जिससे कई बार एक ही त्योहार दो-दो दिन मनाया जाता है।
विज्ञापन


11 नवंबर को होगी दीपावली
ज्योतिषों के मुताबिक इस बार कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी 9 नवंबर को है, लिहाजा इस दिन धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा, जबकि चतुर्दशी 10 नवंबर को होने से इस दिन नरक चतुर्दशी का पर्व होगा। इसके अलावा अमावस्या 11 नवंबर को है, इसलिए इस दिन महालक्ष्मी पूजन का योग बन रहा है। 12 नवंबर को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा होने से इस दिन गोवर्द्धन पूजा की जाएगी, जबकि शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाए जाने वाला भैया दूज का पर्व 13 नवंबर को मनाया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये है त्योहारों को मनाने की मान्यता

धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी क्षीर सागर से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन इसे धनवंतरी जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन नया बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर पृथ्वी को भारमुक्त किया था, इसलिए इसे नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। अमावस्या को भगवान श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे थे। इस दिन लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। गोवर्द्धन पर्व के दिन भगवान कृष्ण ने गोवर्द्धन पर्वत को अपनी अंगुली में उठा लिया था, इस दिन गाय की भी पूजा की जाती है। भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक भैया दूज की तिथि को यमुना ने यमराज को अपने घर बुलाकर भोजन कराया था, इसलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed