फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Disaster mitigation planning is now half-complete

अभी तो आधी-अधूरी है आपदा से बचाव की तैयारी

Sun, 15 May 2016 09:16 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत Updated Sun, 15 May 2016 09:16 PM IST
विज्ञापन
Disaster mitigation planning is now half-complete
अभी तो आधी-अधूरी है आपदा से बचाव की तैयारी - फोटो : अमर उजाला

 सूखे की आपदा के बाद इस बार अधिक बारिश की आशंका है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बार मानसून अवधि (15 जून से 15 सितंबर तक) में औसत से 6 प्रतिशत अधिक बारिश हो सकती है। बारिश में भूस्खलन और रोड बंद होने का खतरा अक्सर रहता है। लेकिन अभी आपदा विभाग की कार्ययोजना नहीं बन सकी है।

विज्ञापन


चंपावत जिले को आपदा के नजरिए से दोहरी मार झेलनी पड़ती है। जिले के 85 प्रतिशत पहाड़ी हिस्से में भूस्खलन और मार्ग बंद होना सबसे बड़ा खतरा है। तो वहीं मैदानी हिस्सा टनकपुर और बनबसा में बाढ़ तथा जलभराव का खतरा रहता है। अभी नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए पुनर्वास आदि की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। राष्ट्रीय राजमार्ग में मलबे के नजरिए से संवेदनशील स्पॉट को भी चयनित नहीं किया जा सका है। खतरे की जद में आने वाले स्कूल और अन्य इमारतों का ब्यौरा भी अभी नहीं मिला है। आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि सभी तहसीलों से मानसून के मद्देनजर आपदा की कार्ययोजना मांगी गई है। इस कार्ययोजना के बाद बचाव के पुख्ता उपाय किए जाएंगे।
विज्ञापन


मुस्तैद है आपदा राहत टीम : मनोज
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय का कहना है कि आपदा से निपटने के लिए विभाग और प्रशासन मुस्तैद हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीम जिले में अधिकारियों को दो दिनी ट्रेनिंग दे चुकी है। आपदा से निपटने के लिए जिलाधिकारी के निर्देशन में इंसिडेंट रिस्पोंस सिस्टम (आईआरएस) काम करेगा। कार्रवाई के लिए विभागों में समन्वय और संचार की पुख्ता व्यवस्था है।
विज्ञापन
विज्ञापन


12 साल से खड़ी है आपदा की क्रेन
आपदा से बचाव को विभाग के पास भरपूर उपकरण हैं। लेकिन इन उपकरणों का उपयोग कैसे होता है, इसका एक नजारा लोनिवि परिसर में वर्षों से खड़ी क्रेन बताती है। 2004 में करीब 18 लाख रुपये से खरीदी गई इस क्रेन का आपदा से निपटने के लिए कभी भी उपयोग नहीं किया जा सका। इसकी वजह क्रेन को चलाने के लिए आपरेटर का नहीं होना है। क्रेन का काम सड़क पर आए मलबे को साफ करना था। लोनिवि के जूनियर इंजीनियर नंदकिशोर भारती का कहना है कि क्रेन चालू हालत में नहीं है। इसके लिए प्रशासन को पत्र भेजा गया है। बहरहाल क्रेन के चारों तरफ घास और लंबी झाड़ियां उग गई हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed