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रेनबो, स्नो ट्राउट प्रजाति की हजारों मछलियां मरीं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।
Updated Mon, 23 May 2016 11:12 PM IST
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गंदे पानी से मरीं मछलियां
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तहत यहां ताड़केश्वर में स्थित शीत जल मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र में बरसात का गंदा पानी टैंकों में घुस गया। जिसके दुष्प्रभाव से रेनबो ट्राउट, स्नो ट्राउट प्रजाति की हजारों मछलियों की मौत हो गई। जिससे अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों को गहरा झटका लगा है। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुरेश चंद्रा के अनुसार दो सप्ताह पूर्व हुई बरसात के कारण नदी का गंदा जल मुख्य टैंक में घुस गया।
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जिससे तालाबों में आक्सीजन का स्तर बेहद न्यूनतम स्तर पर पहुंचने के कारण हजारों मछलियों की मौत हो गई। अलबत्ता करीब छह सौ से अधिक रेनबो ट्राउट को बचा लिया गया है। बड़ी मछलियों के मर जाने से आगे एक दो साल तक बीज का उत्पादन प्रभावित रहेगा। उनका कहना है कि रेनबो ट्राउट प्रजाति की मछलियां केवल बहते जल में रहती हैं। जबकि अन्य प्रजाति की मछलियां रूके हुए पानी में भी आसानी से रह लेती हैं। इस कारण वर्तमान में यहां सिल्वर कार्प, गोल्डन कार्प, ग्रास कार्प की ग्रोथ प्रभावित नहीं हुई है।
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चंपावत। मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र ताड़केश्वर के वैज्ञानिकों का कहना है कि केंद्र से महज पचास मीटर की दूरी पर हॉटमिक्स प्लांट लगाए जाने के कारण भी मछलियों की विभिन्न प्रकार की प्रजातियों की ग्रोथ प्रभावित हो रही है। प्लांट के नदी के किनारे होने के कारण सारा प्रदूषित पानी अनुसंधान केंद्र के टैंकों में पहुंच कर नुकसान पहुंचा रहा है। अनुसंधान केंद्र में इस बार वैज्ञानिकों के प्रयास से सिल्वर कार्प प्रजाति की तीस लाख से अधिक की ब्रीडिंग की गई है। केंद्र के तालाबों में करीब एक माह का बीज तैयार हो गया है। जिसे कुछ समय बाद मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराया जाएगा।
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