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लावारिस गायों की सेवा कर रहे शंकर

Sun, 07 Feb 2016 10:05 PM IST
योगेश जोशी/अमर उजाला, चंपावत
योगेश जोशी/अमर उजाला, चंपावत Updated Sun, 07 Feb 2016 10:05 PM IST
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Cows unclaimed service

दूध देने वाली गाय की सेवा सभी ने की। बात तो तब है, जब लावारिस गाय की सेवा की जाए। बस यही विचार मन में आया और पड़ गई गौसदन की नींव। साथ ही हकीकत हुआ बचपन में देखा गया ख्वाब। जिक्र हो रहा है मड़ पसौली गांव निवासी शंकर पांडेय का। 2011 में खुद के स्थापित किए कामधेनु वात्सल्य सेवा धाम गौसदन में इस वक्त 65 गायों की सेवा हो रही है।

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पढ़ाई के दिनों से ही गायों के प्रति खास लगाव रखने वाले ज्योतिष शंकर पांडेय बताते हैं कि दादा जी के समय में उनके घर में 10 से 15 तक गायें बंधी होती थी। शहरों में लावारिस छोड़ी गायों को मार खाते देख बेहद पीड़ा होती थी। मन में विचार आया क्यों न एक गौसदन की स्थापना की जाए। आवारा पशुओं की पीड़ा देख उन्होंने कामधेनु वात्सल्य सेवा धाम गौसदन की स्थापना की। शुरुआत में उनके गौसदन में 15 गायों को जगह मिली। धीरे-धीरे उनके काम से लोग भी प्रेरित हुए और अब लोग खुद ही आवारा गायों को यहां पहुंचाने लगे। लोगों की मदद से दस नाली क्षेत्रफल में फैले गौसदन में 65 गाय पल रही हैं, जिनमें से 18 गाभिन हैं और 3 दूध दे रही हैं।
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उनके इस नेक काम में उनकी विधवा बहन रेनू और पत्नी ने खूब सहयोग दिया। जन सहयोग मिलने पर जनवरी से शंकर पांडेय विधवा बहन और दो नेपाली परिवार को चार-चार हजार रुपये वेतन भी देने लगे हैं। लोगों के नजरिए में आए बदलाव से दुखी शंकर कहते हैं कि मनुष्य वैतरणी पार करने को तो गोदान करता है, लेकिन जब गाय किसी काम की नहीं रहती तो उसे आवारा बना कर छोड़ देता है। शंकर को इसी वर्ष गौसदन आयोग का सदस्य भी बनाया गया है।
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मदद के लिए बनाई गुल्लक योजना
गौसदन में हर रोज गायों की संख्या बढ़ रही हैं। इनको पालने के लिए रुपयों की कमी बड़ी समस्या बन रही है। लोगों को गौसदन से जोड़ने के लिए जिला मुख्यालय में चुनिंदा दुकानों में 20 गुल्लक रखने की योजना बनाई जा रही है।

टेंट में भी चला गौसदन
शुरुआती एक साल तक गौसदन टेंट में चला। 2012-13 में गौसदन को छत नसीब हुई। विधायक निधि से 3.75 लाख रुपये से गौसदन का निर्माण हुआ।

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