कोरियर कंपनियों ने लगाई डाक सेवा क्षेत्र में सेंध
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ब्रिटिश हुकूमत के दौर से शुरू हुई डाक सेवा संदेशों और पत्रों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का एकमात्र विश्वसनीय विकल्प हुआ करती थी। लेकिन वर्तमान में डाक सेवा क्षेत्र में निजी कोरियर कंपनियों के आने से जबरदस्त प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। निजी क्षेत्र की कोरियर कंपनियां अब तक डाक सेवा के सेवित क्षेत्र में सेंध लगाने में कामयाब रही हैं। नगरीय क्षेत्रों में कोरियर सेवाओं के चलन ने लोगों का रुझान डाकघरों की ओर कम कर दिया है।
नगरीय क्षेत्र में पंजीकृत डाक सेवाओं के कारोबार में बीते पांच वर्षों में तकरीबन 50 फीसदी तक की गिरावट आई है। जिसके चलते अब विभाग की डाक सेवाओं का एकाधिकार सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में ही सिमट कर रह गया है। संचार क्रांति के युग में एसएमएस, ईमेल जैसी अनेक त्वरित सेवाएं हैं। जिसने परंपरागत डाक के अंदाज को प्रभावित किया है। लेकिन कोरियर कंपनियों के पांव पसारने के बाद से पिछले पांच वर्षों में डाक विभाग से होने वाली रजिस्टर्ड डाक सेवाओं में तकरीबन पचास फीसदी से अधिक तक कमी आई है। ये गिरावट विशुद्ध रूप से नगरीय क्षेत्र में हुई है।
प्रतिदिन चार से पांच सौ पत्र होते हैं रजिस्टर्ड
चंपावत। जिला मुख्यालय में स्थित हेड पोस्ट आफिस के पोस्टमास्टर जगदीश पांडेय के अनुसार जिले से प्रतिदिन चार से पांच सौ पंजीकृत पत्र और स्पीड पोस्ट भेजी जाती है।
एक जिले को देख रहे दो अधीक्षक
चंपावत। जिले की डाक सेवाएं दो मंडलों से संचालित होती है। पहाड़ी हिस्से की व्यवस्था का जिम्मा पिथौरागढ़ तथा टनकपुर बनबसा का मैदानी इलाका नैनीताल प्रवर डाक अधीक्षक के जिम्मे हैं। जिले में चंपावत मुख्य डाकघर के अलावा लोहाघाट, खेतीखान, देवीधुरा, बाराकोट, एबटमाउंट, चंदनी और टनकपुर में सब डाकघर हैं। जबकि विषम भौगोलिक परिस्थिति वाले इस इलाके में 72 शाखा डाकघर हैं।
एक दर्जन से अधिक कोरियर कंपनियां सक्रिय
चंपावत। जिले में करीब एक दर्जन से अधिक कोरियर कंपनियां इस समय सेवाएं दे रही है। हालांकि कोरियर सेवा की दस्तक वर्ष 1998 से हो गई थी, मगर इन्होंने अपनी प्रभावपूर्ण उपस्थिति वर्ष 2003 के बाद से दर्ज कराई है। इस वक्त चंपावत जिले से हर रोज करीब एक से डेढ़ हजार से अधिक डाकें केोरियर कंपनियों के जरिए जा रही हैं। जबकि आने वाली डाकों की संख्या इससे पांच गुना तक ज्यादा है।