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सीएम का चेहरा बदला, क्या बदलेगी सेहत की सूरत?

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jul 2021 11:28 PM IST
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CM's face changed, will health condition change?
चंपावत। पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश ने दो दशक में पांच, तो उत्तराखंड ने इतने ही समय में 13 मुख्यमंत्री दिए हैं। और तो और भाजपा ने तो चार महीने के अंतराल में दो मुख्यमंत्री बदल दिए। पर मुख्यमंत्रियों की इस अदला-बदली से कुमाऊं मंडल और खासकर पहाड़ी क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं नहीं बदली हैं। यह आरोप इसलिए भी लगता है क्योंकि दोनों ही मुख्यमंत्रियों के पास स्वास्थ्य मंत्रालय भी था। नए मुख्यमंत्री को लेकर लोग बहुत ज्यादा आशावादी नहीं हैं क्योंकि नए मुख्यमंत्री के लिए समय कम और चुनौती बहुत ज्यादा है।
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कुमाऊं मंडल में 161 सरकारी अस्पताल हैं। 33 को छोड़कर अधिकतर में अल्ट्रासाउंड और एक्सरे जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं हैं। पहाड़ी क्षेत्रों के चार (चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर और अल्मोड़ा) जिलों में छोटे-बड़े 105 सरकारी अस्पतालों में से 87 अस्पताल बीमार लोगों के लिए रेफरल सेंटर से ज्यादा नहीं हैं। पहाड़ की 17 लाख से अधिक की आबादी के लिए एक भी न्यूरो सर्जन नहीं है। ज्यादातर विशेषज्ञ डॉॅक्टरों के पद खाली होने से एक भी ट्रॉमा सेंटर काम नहीं कर रहा है। आईसीयू बनने के बावजूद विशेषज्ञों की कमी इनके संचालन में भारी पड़ रही है।
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रेडियोलॉजिस्ट, गायनेकोलॉजिस्ट, हृदयरोग, ईएनटी, चर्मरोग सहित अधिकतर विशेषज्ञों की कमी ने लोगों की मुसीबत को बढ़ाया है। इन जिलों में डॉक्टरों के 37 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। इसके अलावा सस्ती दवा उपलब्ध कराने के लिए खोले गए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र या तो बंद हो गए हैं या उनमें अधिकतर महत्वपूर्ण दवाएं नदारद हैं। टनकपुर उप जिला अस्पताल का औषधि केंद्र पिछले साल सितंबर से बंद है। नैनीताल जिले में भी नैनीताल और हल्द्वानी को छोड़ दें तो जिले के अन्य सभी अस्पताल रेफरल सेंटर ही बने हुए हैं। (संवाद)
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पहाड़ से मैदान में संबद्ध करने से बिगड़ रहे हालात
चंपावत। डॉक्टरों की कमी के अलावा पहाड़ में तैनात कई डॉक्टरों को मैदानी क्षेत्रों में संबद्ध करने की प्रवृत्ति ने भी स्थितियां बिगाड़ी हैं। उदाहरण के लिए सबसे छोटे जिले चंपावत की तस्वीर देखें, तो यहां दो विशेषज्ञ डॉक्टर लंबे समय से दूसरे जिले से संबद्ध हैं। लोहाघाट के माइक्रो बायलॉजिस्ट को ऊधमसिंह नगर और निश्चेतक को देहरादून संबद्ध किया गया है। डॉक्टर ही नहीं, जिले के चीफ फार्मासिस्ट को भी कोटद्वार से संबद्ध किया गया है। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि संबद्धीकरण का कोई भी आदेश जिला स्तर से नहीं हुआ है।
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