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हथेली पर जान: नदी को पार कर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे, आठ जुलाई को बह गया था झूलापुल; सड़क मार्ग बंद

Fri, 12 Jul 2024 09:00 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, चंपावत
अमर उजाला नेटवर्क, चंपावत Published by: हीरा मेहरा Updated Fri, 12 Jul 2024 09:00 PM IST
सार

चंपावत में नौलापानी ग्राम पंचायत के छात्र-छात्राएं हाईस्कूल, इंटर और स्नातक की पढ़ाई के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पर कर जा रहे हैं।

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Children forced to cross the river to go to school in champawat
नदी को पार कर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंपावत में नौलापानी ग्राम पंचायत के छात्र-छात्राएं हाईस्कूल, इंटर और स्नातक की पढ़ाई के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पर कर जा रहे हैं। नदी का बहाव अगर अचानक बढ़ गया तो कभी भी बच्चों की जान खतरे में आ सकती है। ग्राम पंचायत नौलापानी के करीब दर्जनों छात्र शिक्षा के मंदिर लधिया नदी पार जर जा रहे हैं। इसके बाद से बच्चों के लिए मुश्किलें और अधिक बढ़ गई थी। प्रतिदिन बच्चे करीब 10 किमी पैदल चलकर नदी पार कर पढ़ने जा रहे हैं।

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छह जुलाई को चल्थी-नौलापानी सड़क छह जुलाई को भारी वर्षा से मलबा आने से जगह-जगह बंद हो गई है, जिसे अभी तक नहीं खोला गया है। इस कारण कई छात्रों को पढ़ने के लिए चल्थी इंटर कॉलेज जाने के लिए नदी पार करना मजबूरी हो गया है। वहीं आठ जुलाई को बेलखेत का झूलापुल भी बह गया था। डिग्री कॉलेज अमोड़ी पढ़ने वाले बच्चे भी जान को हथेली में रखकर पढ़ने जा रहे हैं। बच्चे नदी पार करते समय चप्पल और जरूरी सामान हाथ में लेकर चलते हैं। गनीमत है कि नदी का बहाव तेज नहीं है। अगर कभी अचानक नदी का बहाव बढ़ गया तो बड़ी अनहोनी का खतरा रहता है।
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अभिभावकों को बच्चों के स्कूल से घर वापस आने तक चिंता सताती रहती है। उन्हें बड़े हादसे का डर लगा रहता है। क्षेत्रवासी वर्षों से तलियाबांज में इंटर कालेज और नौलापानी से शीशनगर के बीच झूला पुल बनाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। बारिश के कारण बंद मार्ग और क्षतिग्रस्त झूलापुल के कारण बच्चों के लिए खतरा मोल लेकर स्कूल जाना नियत बन गया है।

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नौलापानी ग्राम पंचायत की समस्याओं को लेकर अनेक बार जिला प्रशासन सहित सांसद, विधायक, मंत्रियों को झूला पुल बनाने की मांग की गई थी, लेकिन आज तक सुनवाई नहीं हुई है।


-गीता देवी, प्रधान, नौला पानी।

बारिश के मौसम में नोलापानी के लोग खतरे के साये में जीवन जीते हैं। वर्तमान में बेलखेत का झूलापुल बहने और सड़क मार्ग बंद होने के कारण बच्चों की मुश्किलें बढ़ गई है। कभी भी बढ़ा हादसा हो सकता है।
-शंकर जोशी, स्थानीय।

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