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चंपावत में हवा में लटक रहा हवाई सफर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Wed, 28 Dec 2016 08:50 PM IST
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चंपावत में अधर में लटका हैलीपेड निर्माण कार्य।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में हेली सेवा शुरू करने की प्रशासनिक पहल 2016 में भी पूरी नहीं हो सकी। इस वर्ष भी चंपावत में हवाई सफर का दावा हवा में ही रह गया। जिला मुख्यालय में सर्किट हाउस के पास स्वीकृत एकमात्र हेलीपेड का निर्माण पूरा न होने के कारण यहां हवाई सेवा की कल्पना परवान नहीं चढ़ सकी है।
इस वर्ष जनवरी में सर्किट हाउस के पास करीब 99 लाख रुपए की लागत से हेलीपेड का निर्माण प्रस्तावित किया गया था, लेकिन 11 माह बाद भी 99 लाख रुपए की मांग के सापेक्ष बजट रिलीज न होने के कारण प्रस्तावित स्थल में जमीन कटिंग के बाद आगे का काम भी रुक गया है।
सितंबर 1997 में स्थापित चंपावत जिले में कोई हेलीपेड नहीं है। लंबे समय से इसकी कोशिश चल रही थी, मगर ये कवायद अंजाम तक नहीं पहुंच सकी थी। पहली बार 2015 में हेलीपेड को हरी झंडी मिली। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय के मुताबिक सर्किट हाउस के पास हेलीपेड निर्माण का काम जनवरी 2016 में शुरू भी हुआ। सेलाखोला वन पंचायत की प्रस्तावित जमीन का समतलीकरण किया गया, लेकिन धन अवमुक्त न होने से काम बीच में ही लटक गया है। उन्होंने बताया कि हेलीपेड का निर्माण 0.20 हेक्टेयर जमीन पर किया जाना है। इस हेलीपेड में दो चॉपर और एक एम-17 जहाज तीनों एक साथ उतर सकेंगे। इस हेलीपेड के बनने से जिले में राजकीय अतिथियों की आवाजाही, आपदा राहत आदि मौकों पर हेलीकॉप्टर को उतारने की सुविधा मिल सकेगी। अगले साल के शुरू में यह हेलीपेड बनकर तैयार हो जाएगा। वर्तमान में चंपावत आने वाले हेलीकॉप्टर को गोरलचौड़ मैदान में उतारा जाता है।
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बनबसा में भी बनेगा हेलीपेड
चंपावत जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय के अनुसार चंपावत में हेलीपेड के लिए धनराशि आवंटन की मांग शासन से की गई है, जबकि जिले के बनबसा में भी नया हेलीपेड प्रस्तावित किया गया है। जल्द ही तकनीकी टीम हेलीपेड निर्माण के लिए सर्वेक्षण का कार्य करेगी।
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इस वर्ष जनवरी में सर्किट हाउस के पास करीब 99 लाख रुपए की लागत से हेलीपेड का निर्माण प्रस्तावित किया गया था, लेकिन 11 माह बाद भी 99 लाख रुपए की मांग के सापेक्ष बजट रिलीज न होने के कारण प्रस्तावित स्थल में जमीन कटिंग के बाद आगे का काम भी रुक गया है।
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सितंबर 1997 में स्थापित चंपावत जिले में कोई हेलीपेड नहीं है। लंबे समय से इसकी कोशिश चल रही थी, मगर ये कवायद अंजाम तक नहीं पहुंच सकी थी। पहली बार 2015 में हेलीपेड को हरी झंडी मिली। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय के मुताबिक सर्किट हाउस के पास हेलीपेड निर्माण का काम जनवरी 2016 में शुरू भी हुआ। सेलाखोला वन पंचायत की प्रस्तावित जमीन का समतलीकरण किया गया, लेकिन धन अवमुक्त न होने से काम बीच में ही लटक गया है। उन्होंने बताया कि हेलीपेड का निर्माण 0.20 हेक्टेयर जमीन पर किया जाना है। इस हेलीपेड में दो चॉपर और एक एम-17 जहाज तीनों एक साथ उतर सकेंगे। इस हेलीपेड के बनने से जिले में राजकीय अतिथियों की आवाजाही, आपदा राहत आदि मौकों पर हेलीकॉप्टर को उतारने की सुविधा मिल सकेगी। अगले साल के शुरू में यह हेलीपेड बनकर तैयार हो जाएगा। वर्तमान में चंपावत आने वाले हेलीकॉप्टर को गोरलचौड़ मैदान में उतारा जाता है।
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बनबसा में भी बनेगा हेलीपेड
चंपावत जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय के अनुसार चंपावत में हेलीपेड के लिए धनराशि आवंटन की मांग शासन से की गई है, जबकि जिले के बनबसा में भी नया हेलीपेड प्रस्तावित किया गया है। जल्द ही तकनीकी टीम हेलीपेड निर्माण के लिए सर्वेक्षण का कार्य करेगी।