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चुका में पुल निर्माण के टेंडर को सात माह भी नहीं मिल पाई शासन की मंजूरी
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जान जोखिम में डाल कर लधिया नदी पार करता ग्रामीण। विज्ञप्ति
- फोटो : TANAKPUR
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टनकपुर (चंपावत)। नेेपाल सीमा पर बन रही टनकपुर-जौलजीबी सड़क के पहले पैकेज में पुलों के निर्माण को छोड़ शेष सड़क बनकर तैयार हो चुकी है, लेकिन पहले और दूसरे पैकेज के बीच चूका में लधिया नदी पर प्रस्तावित 690 मीटर लंबे पुल निर्माण पर अब भी अनिश्चितता बनी है। निर्माण में देरी के कारण निर्माण एजेंसी बदलकर लोनिवि को काम सौंपा गया है। सात माह पहले हो चुके इसके टेंडर को शासन की मंजूरी नहीं मिल सकी है। इस कारण पुल निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका है।
टनकपुर-जौलजीबी रोड पर चूका और सीम के बीच लधिया में 690 मीटर लंबे पुल का निर्माण होना है। यह पुल 2019 में पूरा होना था लेकिन अभी इसका टेंडर तक मंजूर नहीं हो सका है। कार्यदायी विभाग पीआईयू ने इसकी लागत करीब 33 करोड़ रुपये आंकी है। उसने पहले इस पुल के निर्माण का काम ब्रिज, रोपवे, टनल एंड अदर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (ब्रिडकुल) को सौंपा था, लेकिन काम में विलंब के कारण पिछले वर्ष न सिर्फ निर्माण एजेंसी बदल दी गई, बल्कि टेंडर की शर्तों के उल्लंघन पर ठेकेदार का अनुबंध भी निरस्त कर दिया गया।
अब पुल बनाने का काम लोनिवि को सौंपा गया है। कार्यदायी विभाग के अपर सहायक अभियंता वीएस पोखरिया ने बताया कि लोनिवि ने मई में टेंडर आमंत्रित किए थे, लेकिन शासन स्तर से टेंडर की मंजूरी न मिलने से निर्माण लंबित है।
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जान जोखिम में डाल लधिया को पार कर रहे ग्रामीण
चूका और सीम के बीच आवागमन के लिए ग्रामीणों ने लधिया पुल वाले स्थल पर ह्यूमपाइप डालकर वैकल्पिक रास्ता बनाया था, लेकिन 18 नवंबर की आपदा में यह वैकल्पिक रास्ता भी लधिया के उफान में बह गया। इसके बाद सीम, चूका के ग्रामीण जान जोखिम में डालकर लधिया को पैदल पार कर आवाजाही कर रहे हैं। चूका के समाजसेवी दशरथ सिंह, सीम के नारायण सिंह का कहना है कि टीजे रोड से टनकपुर आने के लिए सीम और उससे आगे के गांवों के लोगों को जान जोखिम में डालकर लधिया पार करनी पड़ रही है। उन्होंने पुल बनने तक पहले जैसा वैकल्पिक रास्ता बनाने की मांग की है।
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टनकपुर-जौलजीबी रोड पर चूका और सीम के बीच लधिया में 690 मीटर लंबे पुल का निर्माण होना है। यह पुल 2019 में पूरा होना था लेकिन अभी इसका टेंडर तक मंजूर नहीं हो सका है। कार्यदायी विभाग पीआईयू ने इसकी लागत करीब 33 करोड़ रुपये आंकी है। उसने पहले इस पुल के निर्माण का काम ब्रिज, रोपवे, टनल एंड अदर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (ब्रिडकुल) को सौंपा था, लेकिन काम में विलंब के कारण पिछले वर्ष न सिर्फ निर्माण एजेंसी बदल दी गई, बल्कि टेंडर की शर्तों के उल्लंघन पर ठेकेदार का अनुबंध भी निरस्त कर दिया गया।
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अब पुल बनाने का काम लोनिवि को सौंपा गया है। कार्यदायी विभाग के अपर सहायक अभियंता वीएस पोखरिया ने बताया कि लोनिवि ने मई में टेंडर आमंत्रित किए थे, लेकिन शासन स्तर से टेंडर की मंजूरी न मिलने से निर्माण लंबित है।
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जान जोखिम में डाल लधिया को पार कर रहे ग्रामीण
चूका और सीम के बीच आवागमन के लिए ग्रामीणों ने लधिया पुल वाले स्थल पर ह्यूमपाइप डालकर वैकल्पिक रास्ता बनाया था, लेकिन 18 नवंबर की आपदा में यह वैकल्पिक रास्ता भी लधिया के उफान में बह गया। इसके बाद सीम, चूका के ग्रामीण जान जोखिम में डालकर लधिया को पैदल पार कर आवाजाही कर रहे हैं। चूका के समाजसेवी दशरथ सिंह, सीम के नारायण सिंह का कहना है कि टीजे रोड से टनकपुर आने के लिए सीम और उससे आगे के गांवों के लोगों को जान जोखिम में डालकर लधिया पार करनी पड़ रही है। उन्होंने पुल बनने तक पहले जैसा वैकल्पिक रास्ता बनाने की मांग की है।