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तीन सीटों पर खिला कमल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 06 Nov 2019 10:36 PM IST
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BJP wins in three blocks
चंपावत जिले के तीन ब्लॉकों में हुए ब्लॉक प्रमुख चुनाव में भाजपा ने दो सीटों पर सफलता हासिल की है। चंपावत की हॉट सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत हासिल की है, जबकि जिले के चौथे ब्लॉक लोहाघाट में नेहा ढेक पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुकी हैं।
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चंपावत में मतदान केंद्र से कुछ दूरी पर विधायक कैलाश गहतोड़ी और कुछ लोगों में छिटपुट कहासुनी हुई लेकिन पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले को सुलझा दिया।
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जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र नारायण पांडेय और एसपी धीरेंद्र गुंज्याल ने बताया कि चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से निपटा। चुनाव के मद्देनजर तीनों ब्लॉक परिसरों में सुरक्षा का तगड़ा बंदोबस्त था। बाद में विजयी प्रत्याशियों ने जुलूस निकाला।
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चंपावत ब्लॉक में निर्दलीय प्रत्याशी रेखा देवी ने भाजपा अधिकृत प्रत्याशी मुकेश महराना को 4 वोटों से हराया। रेखा को 21 वोट मिले। जबकि मुकेश को 17 वोट मिले। 2 वोट अवैध घोषित किए गए। प्रेक्षक कमेंद्र सिंह की मौजूदगी में आरओ नरेंद्र डुंगरियाल ने विजयी प्रत्याशियों को प्रमाणपत्र बांटे। चुनाव संचालन में एडीएम टीएस मर्तोलिया, एसडीएम अनिल गर्ब्याल, सीओ ध्यान सिंह आदि ने सहयोग किया। रेखा देवी ने अपनी जीत का श्रेय पूर्व जिला पंचायत सदस्य गोविंद सामंत को दिया है।
बाराकोट में ब्लॉक प्रमुख पद भाजपा अधिकृत प्रत्याशी विनीता फर्त्याल ने निर्दलीय आनंद अधिकारी को 8 वोटों से हराया। पिथौरागढ़ जिला सहकारी बैंक की उपाध्यक्ष रह चुकीं विनीता को 13 और आनंद को 5 वोट मिले, जबकि 2 सदस्यों जगदीश अधिकारी और मीनाक्षी माहरा ने वोट नहीं डाला। आरओ राजेंद्र रावत ने चुनाव परिणामों की घोषणा की। लोहाघाट के एसडीएम आरसी गौतम, एसओ मनीष खत्री आदि ने चुनाव संचालन में सहयोग किया।
वहीं पाटी में ब्लॉक प्रमुख पद पर भाजपा अधिकृत प्रत्याशी सुमनलता ने निर्दलीय कविता को 4 वोटों से हराया। सुमनलता को 22 और कविता को 18 वोट मिले। आरओ प्रशांत कुमार ने नतीजे का एलान किया। चुनाव संचालन में एसडीएम शिप्रा जोशी, बीडीओ डॉ. अमित ममगाई आदि ने सहयोग किया।
चंपावत जिले के चारों विकासखंडों के ब्लॉक प्रमुख: द्भचंपावत: रेखा देवी (निर्दलीय)
पाटी: सुमनलता (भाजपा)
बाराकोट: विनीता फर्त्याल (भाजपा)
लोहाघाट: नेहा ढेक (भाजपा)
उप प्रमुखों पर भी भाजपा जीती
चंपावत/बाराकोट/पाटी। चंपावत में कनिष्ठ उप प्रमुख पद पर मोहन चंद ने मनोज सिंह को हराया। मोहन चंद को 21 और मनोज सिंह को 16 वोट मिले। तीन वोट अवैध पाए गए। पाटी ब्लॉक के ज्येष्ठ उप प्रमुख पद पर वीर बहादुर ने नीलांबर को 4 वोटों से हराया। जबकि कनिष्ठ उप प्रमुख पर शंकर सिंह ने देवेंद्र सिंह को 4 वोटों से हराया। बाराकोट में कनिष्ठ उप प्रमुख में बबीता सामंत ने सपना जोशी को हराया। चंपावत में मोनिका बोहरा व बाराकोट में नंदाबल्लभ बगौली पहले ही निर्विरोध ज्येष्ठ उप प्रमुख चुने जा चुके हैं।
निर्वाचित प्रतिनिधि:
कनिष्ठ उप प्रमुख चंपावत : मोहन चंद।
कनिष्ठ उप प्रमुख बाराकोट : बबीता सामंत।
ज्येष्ठ उप प्रमुख पाटी : वीर बहादुर।
कनिष्ठ उप प्रमुख पाटी: शंकर सिंह।
असली किंग मेकर: बीडीसी चुनाव हार कर भी जीत गए सामंत
ससुराल की सल्ली बीडीसी सीट से कमल रावत ने शिकस्त दी थी, ब्लॉक प्रमुख पर निर्दलीय प्रत्याशी को जिताया
चंपावत। 21 अक्तूबर की रात सल्ली बीडीसी सीट पर निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य गोविंद सामंत की हार होने के साथ ही पंचायती राजनीति के जानकारों को लग रहा था कि उनके सियासी सफर की पारी खत्म हो गई। छह नवंबर को उनका ये अनुमान गलत साबित हुआ। वह भले ही खुद ब्लॉक प्रमुख न बन सके लेकिन चंपावत ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में उन्होंने अपने उम्मीदवार को शानदार तरीके से जीता दिया। अनारक्षित सीट पर निर्दलीय रेखा देवी ने भाजपा के मुकेश महराना को पराजित कर दिया। ऐसा कर सांसद अजय टम्टा के प्रतिनिधि रहे सामंत सही मायने में किंग मेकर बन गए। यद्यपि चुनाव से पूर्व भाजपा के कई आला नेताओं ने उन्हें मनाने का भी प्रयास किया लेकिन वे कामयाब नहीं रहे। चार नवंबर को उन्हें पार्टी से भी निष्कासित किया गया। ब्यूरो
फोटो 06 सीपीटी 05पी (सिंगल)
टूट गया मुकेश महराना का रिकार्ड
चंपावत। निर्विरोध बीडीसी सदस्य बने भाजपा प्रत्याशी मुकेश महराना को ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में मिली हार उनके सियासी सफर की पहली शिकस्त है। इससे पूर्व वे हमेशा शानदार तरीके से चुनाव जीतते रहे हैं। यहां तक कि 2007 के जिला पंचायत सदस्य के उप चुनाव में बिरगुल से वे निर्विरोध रूप से जीते। 2008 में उनकी पत्नी निर्मला महराना एकतरफा रहे मुकाबले में चंपावत की ब्लॉक प्रमुख बनीं।
इसके बाद 2014 में निर्मला महराना बिरगुल से जिला पंचायत सदस्य भी बनीं। इस बार वे निर्विरोध बीडीसी सदस्य बनने के बावजूद उन्हें ब्लॉक प्रमुख चुनाव में शिकस्त मिली। उनकी हार की वजह भाजपा में बड़े पैमाने पर हुए भितरघात को माना जा रहा है। हार को विनम्रता से स्वीकारते हुए मुकेश महराना ने लोगों के लिए काम करने की बात कही है। ब्यूरो
चंपावत में पहली बार नारी शक्ति का क्लीन स्वीप
चंपावत। सियासी रूप में महिला सशक्तीकरण का यह नायाब नमूना है। चंपावत जिले में पंचायत के पांचों शीर्ष पदों पर महिलाएं काबिज हो गई हैं। यहां तक कि ब्लॉक प्रमुख की दो अनारक्षित सीटों पर भी महिला प्रत्याशियों ने पुरुष उम्मीदवारों को हराया।
चंपावत जिला पंचायत अध्यक्ष के अलावा लोहाघाट ब्लॉक प्रमुख की सीट महिला आरक्षित और पाटी ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी एससी महिला के लिए आरक्षित होने से इन सीटों पर तो महिलाओं का काबिज होना तय था। चंपावत और बाराकोट ब्लॉक प्रमुख की अनारक्षित कुर्सी पर भी महिलाएं काबिज हो गईं।
चंपावत में रेखा देवी ने मुकेश महराना को, बाराकोट में विनीता फर्त्याल ने आनंद अधिकारी को पराजित कर इतिहास रचा है। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी अनारक्षित सीट पर महिला ने चुनाव जीता हो। चंपावत में रेखा देवी की जीत के बाद ये लगातार तीसरा मौका है जब यहां महिला ब्लॉक प्रमुख बनी हो। इससे पूर्व 2008 में निर्मला महराना और 2014 में पुष्पा सकारी ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं।
पति के बाद अब पत्नी बनीं ब्लॉक प्रमुख
चंपावत। चंपावत के ब्लॉक प्रमुख रह चुके बहादुर सिंह फर्त्याल की पत्नी विनीता फर्त्याल के बाराकोट की ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित होने से चंपावत जिले में दूसरी बार पति-पत्नी ब्लॉक प्रमुख बने हैं। इससे पूर्व पाटी में दिग्गज नेता लक्ष्मण सिंह लमगड़िया और उनकी पत्नी पुष्पा लमगड़िया भी ब्लॉक प्रमुख बन चुके हैं।
पंचायत चुनाव में कांग्रेस की करारी हार
चंपावत। त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए बेहद कड़वे रहे। 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद से इस जिले में कांग्रेस को लगातार करारी शिकस्त मिली। इसमें एकमात्र अपवाद नवंबर 2018 में चंपावत नगर पालिकाध्यक्ष की कुर्सी रही, जिसमें कांग्रेस के विजय वर्मा को जीत मिली थी। इस चुनाव में न केवल कांग्रेस हारी बल्कि उसने पूरी तरह हथियार डाल दिया। यहां तक कि एक भी जगह उसने प्रत्याशी तक मैदान में नहीं उतारे।
जिला पंचायत अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पर भाजपा निर्विरोध रूप से काबिज हुई। चारों ब्लॉकों के प्रमुख की कुर्सी पर भी कांग्रेस के हाथ खाली रहे। चार में से चंपावत को छोड़ कर शेष तीन ब्लॉकों में भाजपा ने शानदार जीत हासिल की। जबकि चंपावत में निर्दलीय प्रत्याशी ने भाजपा उम्मीदवार को हराया। 2014 में हुए पंचायती चुनाव में कांग्रेस ने न केवल जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जा किया था बल्कि पाटी के ब्लॉक प्रमुख पद की कुर्सी भी हासिल की थी।
कांग्रेस की इस हार को संगठन की निष्क्रियता और पार्टी के बड़े नेताओं की जनता से दूरी के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तम देऊ का कहना है कि पार्टी फिर से लोगों के बीच जाकर जन संघर्ष में भागीदारी कर राजनीतिक जमीन को मजबूत करने का प्रयास करेगी।
चंपावत ब्लॉक में भाजपा रही कमजोर
चंपावत। कांग्रेस को तो पंचायत चुनाव में करारा झटका लगा ही है लेकिन चंपावत ब्लॉक के नतीजे भाजपा के लिए अनुकूल नहीं रहे। चंपावत जिले के तीन ब्लॉक में जीतने वाली भाजपा को ब्लॉक प्रमुख चुनाव में एकमात्र झटका चंपावत ब्लॉक में लगा है। यहां पार्टी को निर्दलीय प्रत्याशी से शिकस्त खानी पड़ी।
चंपावत विधानसभा क्षेत्र में आने वाले इस एकमात्र ब्लॉक में मिली हार ने चंपावत विधायक कैलाश गहतोड़ी को सियासी तौर पर कमजोर किया है। जिला पंचायत में भी चंपावत ब्लॉक से 6 में से 2 ही सीटें पार्टी जीत सकी थी। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी बाराकोट व उपाध्यक्ष की कुर्सी लोहाघाट ब्लॉक के हाथ लगी। पंचायत चुनाव से पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष के चुनाव में भी चंपावत में भाजपा को कांग्रेस से शिकस्त मिली थी। चंपावत विधानसभा सीट के अंतर्गत आने वाली टनकपुर व बनबसा नगर निकाय में भी निर्दलीय प्रत्याशी जीते थे।

बाद में ये दोनों निर्दलीय प्रत्याशी भाजपा में शामिल हो गए लेकिन भाजपा जिलाध्यक्ष रामदत्त जोशी का कहना है कि पंचायत चुनाव के नतीजों से विधायक की लोकप्रियता को मापना ठीक नहीं है। नतीजे के लिए कई कारण जिम्मेदार है। पार्टी नतीजों की समीक्षा करेगी। वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के अलावा लोहाघाट, बाराकोट व पाटी में भाजपा के प्रमुख जीतने से लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल की ताकत में जबर्दस्त इजाफा हुआ है।
अमर उजाला के सभी पूर्वानुमान सही साबित:
1.23 अक्तूबर के अंक में : पहली बार निर्विरोध हो सकता है चंपावत जिला पंचायत अध्यक्ष।
2. 25 अक्तूबर के अंक में : हार के बावजूद किंग मेकर बनने की राह पर सामंत।
3. 25 अक्तूबर के अंक में : लोहाघाट ब्लॉक में भाजपा की नेहा ढेक का प्रमुख बनना तय।
4. 4 नवंबर के अंक में : भाजपा के लिए आसान नहीं चंपावत की सियासी जंग
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